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Lucknow: गैस सिलिंडर के लिए लोग रो रहे, आपूर्ति के जिम्मेदार सो रहे, जमकर चल रहा कालाबाजारी का धंधा

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Fri, 13 Mar 2026 12:22 PM IST
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सार

रसोई गैस सिलिंडर की उपलब्धता को लेकर अफसरों के दावे जमीन पर नजर नहीं आ रहे हैं। संकट की घड़ी में हेल्पलाइन नंबर तक नहीं जारी किए गए हैं।

Lucknow: People are crying for gas cylinders, those responsible for supply are sleeping.
गैस सिलिंडर की मारामारी। - फोटो : amar ujala
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विस्तार

केंद्र सरकार ने देश में गैस उत्पादन बढ़ाने के आदेश दिए हैं। इधर, अफसर भी कह रहे हैं कि प्रदेश में गैस सिलिंडर, पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है। इन सब के बावजूद शहर में हर गैस एजेंसी पर बुकिंग कराने और सिलिंडर लेने के लिए मारामारी की स्थिति बनी हुई है।

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दरअसल, गैस किल्लत का माहौल बनने के साथ मुनाफाखोर सक्रिय हो गए हैं, जिससे कालाबाजारी का धंधा जोरों पर है। सिलिंडरों से गैस चोरी का धंधा भी चार गुना तक बढ़ गया है। इन सब के बावजूद ऐसे लोगों पर नकेल लगाने के लिए जिम्मेदार आपूर्ति विभाग की फौज आराम से सो रही है।
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सूत्र बताते हैं कि एजेंसियों के गोदाम सिलिंडर से भरे हुए हैं, इसके बावजूद डिलीवरी नहीं दी जा रही है। इसके पीछे बुकिंग न होने का बहाना है। जो सिलिंडर वितरण के लिए गोदाम से निकल भी रहे हैं तो उन्हें बीच में गुप्त ठिकानों पर ले जाकर उसमें से गैस चोरी की जा रही है। आपूर्ति विभाग न गैस गोदामों में स्टॉक की जांच कर रहा है, न जमाखोरों के ठिकानों की पड़ताल।

वितरण के लिए जा रहे सिलिंडरों की रेंडम जांच भी नहीं हो रही। घरेलू सिलिंडरों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर भी जिम्मेदारों ने आंखें बंद कर रखी हैं, जिसका फायदा गैस एजेंसी के वितरण नेटवर्क से जुड़े ठेकेदार कालाबाजारी करके उठा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर हेल्पलाइन नंबर भी जारी नहीं किया गया है, जिस पर लोग शिकायत दर्ज करा सकें।

कालाबाजारी के धंधे पर अंकुश नहीं
जब से गैस सिलिंडरों की किल्लत शुरू हुई, तब से कालाबाजारी का धंधा जोरों पर है। तमाम गोदाम और गोपनीय जगहों पर घरेलू सिलिंडर से गैस निकालकर 19 किलो के व्यावसायिक सिलिंडर तैयार किए जा रहे हैं। इन्हें 4000 रुपये तक बेचा जा रहा है। मुख्यमंत्री की चेतावनी के बाद भी आपूर्ति विभाग ने गैस चोरी करने वालों और कालाबाजारी के खिलाफ कोई ठोस मुहिम शुरू नहीं की है।

बुकिंग के सिलिंडरों की हेराफेरी

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सिलिंडर के लिए लाइनों में लगे लोग। - फोटो : amar ujala

गैस एजेंसियों ने ग्राहक के घर तक सिलिंडर की आपूर्ति करने के लिए ठेकेदारों को नियुक्त कर रखा है। ये ठेकेदार बुकिंग के 100 सिलिंडर गोदाम से लेकर जाते तो हैं, लेकिन इसमें से 30 से 40 मनमाने दाम में बेच रहे हैं। जिन उपभोक्ताओं के घर सिलिंडर नहीं पहुंच रहे, उनकी शिकायत पर कार्रवाई भी नहीं हो रही।

जिला आपूर्ति अधिकारी ने कहा....
जिला आपूर्ति अधिकारी विजय प्रकाश ने कहा कि राजधानी में गैस वितरण मामले को इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के एरिया मैनेजर विशाल भरत देख रहे, आप उन्हीं से बात कर लें। विशाल भरत को पांच बार कॉल करने व मेसेज भेजने पर भी कोई जवाब नहीं मिला।

सर्वर पर दस गुना बढ़ा बुकिंग का बोझ
तेज उद्योग के राज्य स्तरीय समन्वयक संजय भंडारी का कहना है कि ऑयल कंपनियों के सर्वर पर आम दिनों के मुकाबले इस वक्त सिलिंडर बुकिंग का बोझ दस गुना बढ़ गया जिससे सॉफ्टवेयर सिस्टम प्रभावित हुआ है। यही वजह है कि ऑनलाइन बुकिंग नहीं हो पा रही है। ऐसे में गोदाम में गैस सिलिंडर का स्टॉक होने पर भी ग्राहकों को आपूर्ति नहीं मिल पा रही। 24 घंटे के भीतर बुकिंग सिस्टम बेहतर हो जाएगा। इसके लिए तकनीकी टीम काम कर रही है।

ये हो जाएं इंतजाम तो दूर हो जाए संकट

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की जा रही है अवैध रिफिलिंग। - फोटो : amar ujala

- शहर में विभिन्न कंपनियों की करीब 150 गैस एजेंसियां हैं। इनके गोदाम में स्टॉक की नियमित जांच होनी चाहिए।
- बुकिंग वाले सिलिंडरों की आपूर्ति बैकलॉग को अभियान चलाकर पूरा कराया जाए जिससे लोगों के मन से संकट का भय दूर हो।
- वितरण करने वाले डिलीवरीमैन के पास मौजूद सिलिंडरों की संख्या, उनमें गैस के वजन आदि की रेंडम जांच हो।
- होटल, रेस्टोरेंट, पटरी दुकानदारों, खानपान सामग्री निर्माण इकाइयों के यहां घरेलू सिलिंडर के व्यावसायिक इस्तेमाल की जांच कर कड़ी कार्रवाई हो।
- पुलिस तंत्र की सहायता से गैस चोरी एवं सिलिंडर की अवैध रिफिलिंग करने वालों के खिलाफ अभियान चले।

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