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Lucknow: चढ़ावा चोरी के बाद डैमेज कंट्रोल की कोशिश में संघ, विहिप और संत; मिलकर तैयार करेंगे नया मंच
Fri, 17 Jul 2026 07:06 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 17 Jul 2026 07:06 AM IST
सार
बैठक में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले एक ऐसी रणनीति तैयार की जाएगी, जिसके जरिए आहत हिंदू समाज को एक भरोसा करने लायक संदेश दिया जा सके।
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राम लला
- फोटो : X-Ayodhya Darshan
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विस्तार
राष्ट्रीय सेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) की संत समाज के साथ अयोध्या में 23 जुलाई को प्रस्तावित बैठक केवल धार्मिक विमर्श तक सीमित नहीं मानी जा रही है, बल्कि इस बैठक को चढ़ावा चोरी से भाजपा को हो रहे सियासी नुकसान के डैमेज कंट्रोल के लिए नया मंच तैयार करने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक बैठक में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले एक ऐसी रणनीति तैयार की जाएगी, जिसके जरिए आहत हिंदू समाज को एक भरोसा करने लायक संदेश दिया जा सके।
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हालांकि विहिप के उच्च पदस्थ सूत्र के मुताबिक यह बैठक सिर्फ चढ़ावा चोरी से हिंदू समाज में उपजे अविश्वास को बनाए रखने को लेकर आगे की रणनीति तैयार करने के लिए हो रही है। इसके सियासी निहितार्थ नहीं खोजना चाहिए। जबकि संघ के एक पदाधिकारी का कहना है कि बैठक में अब तक की कार्यवाही, एसआईटी की रिपोर्ट में उठाए गए सवालों और श्रद्धालुओं के उपजे भ्रम को दूर करने को लेकर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
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संघ के एक सूत्र ने बताया कि अयोध्या की घटना राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद उठे सवालों और विपक्ष के हमलों के बीच यह बैठक श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना बड़ी चुनौती है। इसलिए 2027 के चुनाव तैयारी में जुटी भाजपा के साथ ही सभी हिंदुवादी संगठनों की सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि वह श्रद्धालुओं में उपजे अविश्वास को मिलकर दूर करे। संघ और विहिप की इस पहल को मंदिर की व्यवस्था को लेकर पैदा हुई शंकाओं को दूर करने के प्रयास के तौर पर भी देखा जा रहा है।
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वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भाजपा और संघ परिवार के लिए लंबे समय से वैचारिक और राजनीतिक आधार का भी महत्वपूर्ण प्रतीक रहा है। ऐसे में यदि मंदिर प्रबंधन से जुड़े किसी विवाद के कारण आम श्रद्धालुओं के बीच असंतोष या भ्रम की स्थिति बनती है, तो उसका असर राजनीतिक माहौल पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से संत समाज, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के बीच संवाद को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में इस बात पर भी विचार होगा कि कि श्रद्धालुओं तक यह संदेश कैसे पहुंचाया जाए कि कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और भविष्य में चढ़ावे की सुरक्षा तथा मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। इससे आस्था और विश्वास को मजबूत करने का प्रयास किया जा सकता है।
बैठक में शामिल होंगे प्रांतीय पदाधिकारी
सूत्रों के मुताबिक 23 जुलाई को होने वाली बैठक में अयोध्या के प्रमुख अखाड़ों, मठों और मंदिरों के संत-महंतों के अलावा संघ और विहिप के प्रांतीय स्तर के पदाधिकारी शामिल होंगे। बैठक की तैयारी के लिए दोनों संगठनों के प्रचार प्रभाग के पदाधिकारियों को लगाया गया है। वहीं संतो से संपर्क करके उन्हेंन बैठक में आमंत्रित कर रहे हैं।