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यूजीसी के नियमों पर रोक:मायावती ने कोर्ट के फैसले का किया स्वागत, कहा- सभी पक्षों को विश्वास में लेना चाहिए था
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 29 Jan 2026 04:16 PM IST
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सार
बसपा सुप्रीमो मायावती ने यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से रोक लगाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इससे सामाजिक तनाव का वातावरण पैदा हो गया था।
बसपा सुप्रीमो मायावती।
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विस्तार
बसपा सुप्रीमो मायावती ने यूजीसी के उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए लाए गए नियमों में रोक लगाने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इन नियमों से देश में सामाजिक तनाव पैदा हो गया था। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का आज लिया गया निर्णय उचित है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने इन नियमों को लागू करते समय सभी पक्षों को विश्वास में लिया होता तो इस तरह का तनाव नहीं पैदा होता।
एक्स पर दिए गए बयान में उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी द्वारा देश के सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों मे जातिवादी घटनाओं को रोकने के लिए जो नये नियम लागू किये गये हैं, जिससे सामाजिक तनाव का वातावरण पैदा हो गया है। ऐसे वर्तमान हालात के मद्देनजर रखते हुये माननीय सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नये नियम पर रोक लगाने का आज का फैसला उचित है। देश में, इस मामले में सामाजिक तनाव आदि का वातावरण पैदा ही नहीं होता अगर यूजीसी नये नियम को लागू करने से पहले सभी पक्ष को विश्वास में ले लेती और जांच कमेटी आदि में भी अपरकास्ट समाज को नेचुरल जस्टिस के अन्तर्गत उचित प्रतिनिधित्व दे देती।
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सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने) विनियम, 2026 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए नए नियमों पर रोक लगा दी है। मामले में केंद्र सरकार को नोटिस दे दिया गया है और अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
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उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने इन नियमों को लागू करते समय सभी पक्षों को विश्वास में लिया होता तो इस तरह का तनाव नहीं पैदा होता।
एक्स पर दिए गए बयान में उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी द्वारा देश के सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों मे जातिवादी घटनाओं को रोकने के लिए जो नये नियम लागू किये गये हैं, जिससे सामाजिक तनाव का वातावरण पैदा हो गया है। ऐसे वर्तमान हालात के मद्देनजर रखते हुये माननीय सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नये नियम पर रोक लगाने का आज का फैसला उचित है। देश में, इस मामले में सामाजिक तनाव आदि का वातावरण पैदा ही नहीं होता अगर यूजीसी नये नियम को लागू करने से पहले सभी पक्ष को विश्वास में ले लेती और जांच कमेटी आदि में भी अपरकास्ट समाज को नेचुरल जस्टिस के अन्तर्गत उचित प्रतिनिधित्व दे देती।
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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी द्वारा देश के सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों मे जातिवादी घटनाओं को रोकने के लिए जो नये नियम लागू किये गये है, जिससे सामाजिक तनाव का वातावरण पैदा हो गया है। ऐसे वर्तमान हालात के मद्देनजर रखते हुये माननीय सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नये नियम पर रोक…
— Mayawati (@Mayawati) January 29, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने) विनियम, 2026 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए नए नियमों पर रोक लगा दी है। मामले में केंद्र सरकार को नोटिस दे दिया गया है और अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
