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Lucknow News: आवासीय मकानों में चल रहे कारोबार पर एलडीए की नजर टेढ़ी, शुरू हुई गोपनीय जांच; होगी कार्रवाई
Fri, 24 Jul 2026 01:52 PM IST
Bhupendra Singh
प्रवेंद्र गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
प्रवेंद्र गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Bhupendra Singh
Updated Fri, 24 Jul 2026 01:52 PM IST
सार
राजधानी में आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग की गोपनीय जांच चल रही है। अलीगंज अग्निकांड के बाद एलडीए ने यह कदम उठाया है। शपथ पत्र लेकर बिल्डिंग की सील खुलवाने का खेल बंद होगा। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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अलीगंज के बेलीगारद चौराहे से सेक्टर-क्यू की तरफ जाने वाले मार्ग पर घरों में खुले शोरुम।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
राजधानी लखनऊ में अलीगंज अग्निकांड के बाद एलडीए ने शहर में उन आवासीय संपत्तियों की गोपनीय जांच शुरू कराई है, जिनका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। जांच के लिए योजनावार अधिकारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है।
जांच के बाद एलडीए ऐसे भवनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर सकता है। दरअसल अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री ने कहा था कि जो संपत्ति जिस उपयोग के लिए पंजीकृत है उसका उसी तरह उपयोग किया जाए। इसी के मद्देनजर एलडीए जांच में जुटा हुआ है।
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खास ये है कि ज्यादातर भवनों का मानचित्र आवासीय श्रेणी में पास कराया गया है जबकि उपयोग व्यावसायिक में किया जा रहा है। इन भवनों में पार्किंग का भी इंतजाम नहीं है। अवैध रूप से बेसमेंट बनाए गए हैं और वहां भी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। ऐसे भवनों में न तो फायर सेफ्टी के जरूरी उपाय हैं और न ही आगे-पीछे सेट बैंक ही छोड़ा गया है। अलीगंज की जिस बिल्डिंग में आग लगने से 15 लोगों की जान गई थी वह भी ऐसी ही अवैध थी। इसी घटना के बाद एलडीए अपनी सभी कॉलोनियों में ऐसी बिल्डिंगों को चिह्नित करने में जुटा है।
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जांच के बाद एलडीए ऐसे भवनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर सकता है। दरअसल अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री ने कहा था कि जो संपत्ति जिस उपयोग के लिए पंजीकृत है उसका उसी तरह उपयोग किया जाए। इसी के मद्देनजर एलडीए जांच में जुटा हुआ है।
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ये एलडीए की प्रमुख आवासीय कॉलोनियां हैं
अलीगंज, गोमतीनगर, गोमतीनगर विस्तार, जानकीपुरम, जानकीपुरम विस्तार, शारदानगर, एलडीए कॉलोनी आदि एलडीए की प्रमुख आवासीय कॉलोनियां हैं। इनमें मुख्य मार्ग के 90 प्रतिशत से अधिक मकानों को तोड़कर होटल, कॉम्प्लेक्स, अस्पताल, रेस्टोरेंट और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बना दिए गए हैं।
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खास ये है कि ज्यादातर भवनों का मानचित्र आवासीय श्रेणी में पास कराया गया है जबकि उपयोग व्यावसायिक में किया जा रहा है। इन भवनों में पार्किंग का भी इंतजाम नहीं है। अवैध रूप से बेसमेंट बनाए गए हैं और वहां भी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। ऐसे भवनों में न तो फायर सेफ्टी के जरूरी उपाय हैं और न ही आगे-पीछे सेट बैंक ही छोड़ा गया है। अलीगंज की जिस बिल्डिंग में आग लगने से 15 लोगों की जान गई थी वह भी ऐसी ही अवैध थी। इसी घटना के बाद एलडीए अपनी सभी कॉलोनियों में ऐसी बिल्डिंगों को चिह्नित करने में जुटा है।
तय है अवैध निर्माण कराने का रेट
मानचित्र के विपरीत बिल्डिंग बनाने के लिए एलडीए इंजीनियरों का रेट फिक्स है। एक जानकार ने बताया कि मानचित्र के विपरीत जब तक बिल्डिंग बनती है इंजीनियर हर महीने तय रकम के अलावा प्रति स्लैब अलग से रुपये लेते रहते हैं। इस तरह एक चार मंजिला बिल्डिंग पर 20 से 25 लाख रुपये इंजीनियर वसूल लेता है। इसी तरह सील बिल्डिंग में निर्माण कराने के लिए इंजीनियर दोगुना रेट वसूलते हैं।इसलिए हो रहा है सर्वे
एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य ऐसे भवनों को चिह्नित करना है जहां पर फायर सेफ्टी के उपाय नहीं हैं और मानचित्र एवं भू उपयोग के विपरीत निर्माण किया गया है। वैसे तो यह काम इंजीनियरों को रोज करना होता है, मगर अलीगंज अग्निकांड जैसी घटनाएं न हों, इसके लिए विशेष तौर पर सर्वे कराया जा रहा है। इसमें जो भवन फायर सेफ्टी के उपाय कर लेंगे और बिल्डिंग का अवैध निर्माण तोड़कर शमन मानचित्र पास करा लेंगे, उन पर कार्रवाई नहीं होगी। जो ऐसा नहीं करेंगे उन पर भवन निर्माण उपविधि के तहत सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।एलडीए इंजीनियरों की मिलीभगत से हुए निर्माण
बीती 22 जून को अलीगंज सेक्टर-डी में एनीमेशन सेंटर की बिल्डिंग में आग लगने से 15 लोगों की जान चली गई थी। बाद में जांच हुई तो सामने आया कि बिल्डिंग का मानचित्र आवासीय में पास कराया गया था और उसका व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा था। ये भी सामने आया कि इस बिल्डिंग के अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण का आदेश वर्ष 2016 में प्लॉट मालिक से शपथपत्र लेकर निरस्त कर दिया गया था। शपथपत्र में प्लॉट मालिक ने कहा था कि वह आवासीय निर्माण ही कर रहा है।इसके बाद एलडीए के जिम्मेदारों ने पलट कर यह देखने की जरूरत नहीं समझी कि मौके पर निर्माण मानचित्र के अनुरूप आवासीय हुआ है या व्यावसायिक। ऐसा ही खेल पूरे शहर में हुआ है। एलडीए के इंजीनियर कागजी कार्रवाई के लिए नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई तो करते हैं मगर बाद में शपथ-पत्र लेकर बिल्डिंग को खुलवा देते हैं। यही वजह है कि इस समय शहर में करीब 30 हजार ऐसी व्यावसायिक इमारतें हैं जो आवासीय भूखंडों पर बनाई गई हैं। इन पर एलडीए की ओर से नोटिस आदि की कार्रवाई तो की गई मगर वह महज खानापूरी ही रही।