Health: 'क्युडेंगा' बनेगी डेंगू का सुरक्षा कवच, पहली वैक्सीन को मिली मान्यता; 80 फीसदी संक्रमण रोकने में कारगर
यूपी में पांच साल में एक लाख से ज्यादा डेंगू मरीज मिले। अब इन मरीजों का सुरक्षा कवच क्युडेंगा बनेगी। पहली डेंगू वैक्सीन को मान्यता मिल गई है। यह संक्रमण रोकने में 80 फीसदी कारगर है। भर्ती का खतरा 90 फीसदी तक कम करेगी।'मेक इन इंडिया' के तहत हैदराबाद की कंपनी यह टीका बनाएगी। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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उत्तर प्रदेश में पिछले पांच वर्षों के दौरान एक लाख से अधिक लोग डेंगू से संक्रमित हुए हैं। अब केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की मंजूरी के बाद देश को डेंगू के खिलाफ पहली स्वीकृत वैक्सीन क्युडेंगा मिल गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गंभीर डेंगू, अस्पताल में भर्ती होने और मौत के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है। अब लोगों की नजर इस पर है कि सरकार इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में कब तक शामिल करती है।
अमर उजाला से बातचीत में लखनऊ स्थित सेंटर ऑफ बायोमेडिकल रिसर्च (सीबीएमआर) के पूर्व निदेशक व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आलोक धवन ने बताया कि भारत में डेंगू की रोकथाम के लिए स्वीकृत यह पहला टीका है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि सात वर्षों तक इस टीके के असर और निगरानी करने के बाद ये नतीजे सामने आए हैं कि यह वैक्सीन डेंगू संक्रमण को रोकने में करीब 80 प्रतिशत तक कामयाब रही है।
दो खुराक बनेगी सुरक्षा की ढ़ाल
यह वैक्सीन चार से 60 वर्ष आयु वर्ग के लोगों के लिए स्वीकृत है। इसकी 0.5 मिलीलीटर की दो खुराकें तीन महीने के अंतराल पर दी जाएंगी। यह डेंगू वायरस के चारों सीरोटाइप के खिलाफ प्रतिरक्षा विकसित करती है।
संक्रमण रोकने में 80 फीसदी, भर्ती का खतरा 90 फीसदी तक कम
अंतरराष्ट्रीय शोध और क्लीनिकल ट्रायल के अनुसार दूसरी खुराक के 12 महीने बाद यह वैक्सीन डेंगू संक्रमण रोकने में करीब 80 प्रतिशत प्रभावी रही। वहीं 18 महीने बाद गंभीर मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम 90 प्रतिशत तक कम पाया गया। इसके प्रभाव की सात वर्षों तक निगरानी भी की गई।
टीका लगवाने से पहले जांच की जरूरत नहीं
डॉ. धवन ने बताया कि क्यूडेंगा एक लाइव एटेन्यूएटेड टेट्रावैलेंट वैक्सीन है, जिसमें डेंगू वायरस के चारों प्रकार के कमजोर रूप शामिल हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि टीका लगवाने से पहले यह जांच कराने की जरूरत नहीं होती कि व्यक्ति को पहले कभी डेंगू हुआ था या नहीं।
पहली वैक्सीन ''डेंगवैक्सिया'' से बेहतर हैं क्युडेंगा के नतीजे
उन्होंने बताया कि क्यूडेंगा से पहले आई दुनिया की पहली डेंगू वैक्सीन डेंगवैक्सिया लगाने से पहले ब्लड टेस्ट अनिवार्य था, जिससे बड़े स्तर पर टीकाकरण मुश्किल हो जाता था। क्यूडेंगा ने इस बाधा को दूर कर दिया है और बड़े पैमाने पर टीकाकरण का रास्ता आसान बनाया है।
टीके की कीमत चार से पांच हजार रुपये रहने का अनुमान
जापान की टाकेडा कंपनी में विकसित इस वैक्सीन का आयात टाकेडा बायोफार्मास्यूटिकल्स इंडिया करेगी। शुरुआती अनुमान के अनुसार एक डोज की कीमत चार से पांच हजार रुपये के बीच हो सकती है। ''मेक इन इंडिया'' के तहत हैदराबाद की बायोलॉजिकल ई के साथ मिलकर हर वर्ष करीब पांच करोड़ डोज बनाने की योजना है।
42 देशों में मंजूरी, फिर भी मच्छर नियंत्रण जरूरी
क्यूडेंगा को यूरोपीय संघ, ग्रेट ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड समेत 42 देशों में मंजूरी मिल चुकी है। डॉ. धवन ने कहा कि यह कोई ''जादुई समाधान'' नहीं है। इससे गंभीर बीमारी, आईसीयू में भर्ती और मौतों में कमी आने की उम्मीद है, लेकिन डेंगू पर स्थायी नियंत्रण के लिए मच्छरों के प्रजनन को रोकना, पानी जमा न होने देना और स्वच्छता बनाए रखना पहले की तरह ही जरूरी रहेगा।दशकों के संघर्ष के बाद बना था मलेरिया का टीका
डॉ. धवन ने मलेरिया टीके को लेकर दिलचस्प किस्सा साझा किया। बताया कि मलेरिया का टीका बनाना वैज्ञानिकों के लिए सबसे मुश्किल पहेलियों में से एक था। दशकों के लंबे शोध और प्रयासों के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हाल ही में आरटीएस,एस और आर-21 टीकों को मंजूरी दी। ये टीके विशेषकर बच्चों में प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम से होने वाले गंभीर मलेरिया और इससे होने वाली मौतों के जोखिम को करीब 50 फीसदी तक घटाने में प्रभावी साबित हुए हैं।2021 से 2025 के बीच यूपी में डेंगू संक्रमितों का डाटा
| वर्ष | कुल मामले |
| 2021 | 29750 |
| 2022 | 19821 |
| 2023 | 35402 |
| 2024 | 15868 |
| 2025 | 9206 |
स्रोत: राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम, यूपी