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सुना है क्या: 'पत्थर पर नाम की सियासत', साथ ही 'प्रमोटी नौकरशाह का तनाव और फितरत में कामयाब मैडम' के किस्से

Sun, 26 Jul 2026 10:01 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Sun, 26 Jul 2026 10:01 AM IST
सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

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politics of names on foundation stones along with stress of promoted bureaucrat and nature of successful Madam
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'पत्थर पर नाम की सियासत' की कहानी। इसके अलावा 'प्रमोटी नौकरशाह का तनाव' और 'फितरत में कामयाब मैडम' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

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पत्थर पर नाम की सियासत

हमेशा परदे के पीछे से सियासी खेल खेलने वाले एक माननीय ने सूबे के मुखिया के कार्यक्रम में भी खेल कर दिया। माननीय की कर्मभूमि वाले जिले में विकास कार्यों के लोकार्पण व शिलान्यास कार्यक्रम में मुखिया को आना था। लिहाजा पत्थर पर सभी के नाम खुदे। चूंकि माननीय जिले के जनप्रतिनिधि नहीं हैं, इसलिए प्रभारी मंत्री का भी नाम लिखा गया। माननीय को नागवार गुजरा, रातोंरात प्रभारी मंत्री के नाम पर स्टीकर लगाकर माननीय का नाम दर्ज हुआ लेकिन वह कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। चर्चा है कि माननीय अपने किसी सजातीय की प्रगति नहीं पचा पाते।

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प्रमोटी नौकरशाह का तनाव

एक प्रमोटी नौकरशाह इन दिनों काफी तनाव में है। दरअसल, उन्होंने मलाईदार तैनाती के लिए डेढ़ करोड़ रुपये का चढ़ावा चढ़ाया लेकिन काम नहीं बन पाया है। जहां चढ़ावा चढ़ाया, वहां बार-बार मिन्नत भी कर रहे हैं लेकिन नतीजा नहीं निकल रहा। यह बात प्रमोटी नौकरशाह ने खुद ही कुछ लोगों से साझा की। अब पुरानी कहावत है कि कान तो दीवारों के भी होते हैं।

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फितरत में कामयाब मैडम

राजस्व जुटाने वाले महकमे में तैनात एक मैडम की फितरत की चर्चा खूब हो रही है। दरअसल, मैडम ने दोबारा एनसीआर के उसी जिले में तैनाती पा ली है जिसे महकमे के लिए सबसे उपजाऊ माना जाता है। काम भी ऑडिट टैक्स का मिला है। मैडम पहले भी इस जिले में तैनात रह चुकी हैं। रिकार्ड में पहले की तैनाती की अवधि आगरा दिखा दी गई ताकि दोबारा पोस्टिंग में दिक्कत न आए। वह रायबरेली समेत कई जिलों में कुछ-कुछ दिन रहने के बाद अब फिर अपने पुराने जिलों में तैनाती पा चुकी हैं।

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