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Lucknow News: हुसैनाबाद टूरिस्ट फैसिलेटेशन सेंटर के टेंडर में अनियमितताएं
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माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। एलडीए के हुसैनाबाद स्थित टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर के टेंडर में अनियमितताओं को लेकर जांच की मांग शनिवार को अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता रोहित कांत की ओर से उठाई गई। उन्होंने यूपी प्रेसक्लब में प्रेसवार्ता आयोजित कर मुद्दे की गंभीरता को उजागर किया।
उन्होंने बताया कि एलडीए ने हुसैनाबाद में टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर म्यूजियम बनाया, जिसके टेंडर में घोटाले हुए हैं। म्यूजियम संचालन के लिए दिसंबर में टेंडर प्रक्रिया हुई, तीन कंपनियों ने हिस्सा लिया। एक मुंबई, दो दिल्ली की थी। बिड धनराशि बीस लाख रुपये थी। टेक्नीकल में पास हो गईं। लेकिन टेंडर खुलने से पहले ही निरस्त कर दिया गया। इसके बाद धनराशि बीस लाख से घटाकर छह से आठ लाख रुपये कर दी गईं। तीन नई कंपनियों ने आवेदन किया, जिन्हें संचालन का अनुभव तक नहीं है। उन्होंने कहाकि सरकार से यह कहना है कि ऐसी कैान सी परिस्थितियां थीं कि धनराशि कम करनी पड़ी। अधिकारी आखिर किन कंपनियों को फायदा पहुंचाना चाहते हैं। क्यों ठेके की अवधि पांच से बढ़ाकर दस वर्ष कर दी गई। 48 लाख रुपये का वार्षिक विद्युत व्यय आखिर क्यों एलडीए के जिम्मे डाल दिया गया। उन्होंने कहाकि मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, मंडलायुक्त को इस बाबत ज्ञापन भी दिया गया है। कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट में प्रकरण को ले जाया जाएगा। वार्ता में यशब हुसैन, शक्ति कुमार, मोहसिन अदनान शामिल रहे।
लखनऊ। एलडीए के हुसैनाबाद स्थित टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर के टेंडर में अनियमितताओं को लेकर जांच की मांग शनिवार को अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता रोहित कांत की ओर से उठाई गई। उन्होंने यूपी प्रेसक्लब में प्रेसवार्ता आयोजित कर मुद्दे की गंभीरता को उजागर किया।
उन्होंने बताया कि एलडीए ने हुसैनाबाद में टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर म्यूजियम बनाया, जिसके टेंडर में घोटाले हुए हैं। म्यूजियम संचालन के लिए दिसंबर में टेंडर प्रक्रिया हुई, तीन कंपनियों ने हिस्सा लिया। एक मुंबई, दो दिल्ली की थी। बिड धनराशि बीस लाख रुपये थी। टेक्नीकल में पास हो गईं। लेकिन टेंडर खुलने से पहले ही निरस्त कर दिया गया। इसके बाद धनराशि बीस लाख से घटाकर छह से आठ लाख रुपये कर दी गईं। तीन नई कंपनियों ने आवेदन किया, जिन्हें संचालन का अनुभव तक नहीं है। उन्होंने कहाकि सरकार से यह कहना है कि ऐसी कैान सी परिस्थितियां थीं कि धनराशि कम करनी पड़ी। अधिकारी आखिर किन कंपनियों को फायदा पहुंचाना चाहते हैं। क्यों ठेके की अवधि पांच से बढ़ाकर दस वर्ष कर दी गई। 48 लाख रुपये का वार्षिक विद्युत व्यय आखिर क्यों एलडीए के जिम्मे डाल दिया गया। उन्होंने कहाकि मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, मंडलायुक्त को इस बाबत ज्ञापन भी दिया गया है। कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट में प्रकरण को ले जाया जाएगा। वार्ता में यशब हुसैन, शक्ति कुमार, मोहसिन अदनान शामिल रहे।
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