UP News: कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर सवाल, हाईटेक तकनीक के बावजूद खामियां; मानवीय निगरानी की जरूरत
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे धंसने के बाद इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 3डी एएमजी सहित कई आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल के बाद भी खामियां सामने आई हैं। सवाल है कि क्या तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के बीच मानवीय इंजीनियरिंग निगरानी कमजोर पड़ी है? आगे पढ़ें पूरी खबर...
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यूपी में कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को देश के हाईटेक एक्सप्रेसवे के तौर पर तैयार किया गया है। यह 63 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे है। इसके निर्माण में पहली बार बड़े स्तर पर 3डी ऑटोमेटेड मशीन गाइडेंस (एएमजी) तकनीक का उपयोग किया गया। एक्सप्रेसवे के संचालन में एआई आधारित निगरानी कैमरे, एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और बैरियरलेस टोलिंग जैसी तकनीकें भी शामिल हैं। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही समय बाद बारिश में सड़क क्षतिग्रस्त हो गई।
सड़क की परत उखड़ने और एक हिस्से के धंसने से हाईटेक निर्माण मॉडल पर सवाल उठे हैं। विशेषज्ञ पूछ रहे हैं कि जब मशीनें सड़क की ऊंचाई, ढलान और डिजाइन को सटीकता से नियंत्रित कर सकती हैं, तो गुणवत्ता में चूक क्यों हुई। यह भी सवाल है कि क्या तकनीक के साथ मानवीय इंजीनियरिंग हस्तक्षेप और मौके पर गुणवत्ता की निगरानी उतनी मजबूत थी।
3डी एएमजी तकनीक का उपयोग
एक्सप्रेसवे निर्माण में 3डी एएमजी तकनीक को एक पायलट के तौर पर इस्तेमाल किया गया। इसमें 3डी इंजीनियरिंग मॉडल को निर्माण मशीनों के कंप्यूटर सिस्टम से जोड़ा जाता है। मशीन पर लगे रिसीवर वास्तविक स्थिति की जानकारी देते हैं और ऑनबोर्ड कंप्यूटर डिजिटल मॉडल से तुलना करता है। इससे मशीन के संचालन को नियंत्रित किया जाता है, जैसे मिट्टी की सतह को निर्धारित ऊंचाई के अनुसार काटना या भरना। पारंपरिक व्यवस्था में बार-बार सर्वे और मैनुअल मार्किंग की जरूरत पड़ती थी, जो इस तकनीक से खत्म हो गई।
तकनीक और गुणवत्ता का संबंध
एनएचएआई से जुड़े एक विशेषज्ञ के मुताबिक, 3डी एएमजी मशीन सड़क की सतह की ऊंचाई, चौड़ाई और ढलान बता सकती है। लेकिन यह मिट्टी या अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता निर्धारित नहीं करती। केवल तकनीक सड़क की गुणवत्ता तय नहीं कर सकती। मिट्टी की प्रकृति, नमी, परतों की मोटाई, कम्पैक्शन और सामग्री की गुणवत्ता जैसे कई कारक मजबूती तय करते हैं। जल निकासी और मौसम का असर भी महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञ ने कहा कि आधुनिक तकनीक के बावजूद साइट पर इंजीनियरों की निगरानी, सामग्री की जांच और फील्ड टेस्ट की भूमिका खत्म नहीं हो सकती।
मानवीय निगरानी की जरूरत
एक विशेषज्ञ के अनुसार, 3डी एएमजी सेंसर सतह की डिजाइन के अनुसार स्थिति बता सकता है। लेकिन नीचे की मिट्टी की वास्तविक मजबूती का आकलन इंजीनियरिंग जांच से ही होगा। उन्होंने आशंका जताई कि इंजीनियर डिजिटल सिस्टम के आउटपुट को अंतिम सत्य मानकर गुणवत्ता जांच कम कर सकते हैं। हालांकि, मौजूदा खराबियों को देखते हुए तकनीक पर निर्भरता को गुणवत्ता खराब होने का कारण मानना जल्दबाजी होगी। यह जांच का विषय है कि क्या डिजिटल मॉडल के अनुसार बनी सड़क में गुणवत्तापूर्ण सामग्री, पर्याप्त कम्पैक्शन और उचित जल निकासी थी। इंजीनियरों ने मौके पर क्या जांच की और बारिश से पहले कमजोर परतों की पहचान क्यों नहीं हो सकी, यह भी देखना होगा।