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UP News: तीन साल में राजधानी से 69 मासूम लापता, घर से निकले फिर नहीं लौटे; बच्चों की तलाश में बड़ी चुनौती

Sun, 09 Aug 2026 01:00 PM IST
Bhupendra Singh शुभम अवस्थी, अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
शुभम अवस्थी, अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Sun, 09 Aug 2026 01:00 PM IST
सार

राजधानी से तीन साल में 69 मासूम लापता हुए। बच्चे घर से निकले फिर कभी नहीं लौटे। बच्चों की तलाश एक बड़ी चुनौती है। रंग-रूप बदलने के करण नवजात और दो से चार साल के बच्चों का पता लगा पाना सबसे मुश्किल होता है। आगे पढ़ें पूरी खबर...

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Sixty-nine innocent children have gone missing from Lucknow over past three years left home and never returned
boy demo - फोटो : freepik

विस्तार

राजधानी लखनऊ में वर्ष 2023 से लेकर अब तक दो से छह साल के 69 बच्चे लापता हो चुके हैं। ये आंकड़े वे हैं, जिनकी विवेचना एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग (एएचटी) सेल को मिली है। इसके अलावा ऐसे भी तमाम मामले हैं, जिनमें बच्चे घर से निकले मगर कभी लौटे नहीं। इनमें वे मासूम भी शामिल हैं, जिनके अभिभावक गुमशुदगी भी दर्ज नहीं करा सके।

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शहर में कई मानव तस्करी गिरोह सक्रिय हैं, जो रोजाना छोटे बच्चों और किशोरियों का अपहरण करते हैं। इनमें से लड़कों को श्रम के लिए बेच दिया जाता है, जबकि किशोरियों में से कुछ को देह व्यापार के दलदल में धकेला जाता है तो अन्य को शादी के लिए बेच दिया जाता है। इसके अलावा कुछ बच्चे अभिभावक के डांटने पर घर से निकल जाते हैं। ऐसे 15 बच्चों को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल ने इस जनवरी से जुलाई तक खोजकर उनके मां-पिता के चेहरों पर मुस्कान लौटाई है, जबकि 24 बच्चों को अभी भी खोजा जा रहा है।
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लापता बच्चों को ट्रैक करने में जुटी सेल को सबसे ज्यादा मुश्किल नवजात और दो से चार साल के बच्चों को तलाशने में होती है। पहले तो पुलिस इन्हें खोजने में कई वर्ष लगा देती है। इसके बाद मामला सेल के पास ट्रांसफर कर दिया जाता है, तब इन बच्चों के रंग और शारीरिक संरचना में बदलाव आ जाता है। नाराज होकर घर से निकलने वाले किशोर और किशोरियां अपना नाम और धर्म भी बदल लेते हैं। इन्हें आप ट्रेस भी नहीं कर सकते हैं।

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बच्चों को खोजने में संसाधनों की कमी बन रही बाधा

एएचटी सेल में वर्तमान में केवल एक इंस्पेक्टर, 10 उपनिरीक्षक और चार अन्य पुलिसकर्मी तैनात हैं। अधिकारियों का कहना है कि सीमित स्टाफ और तकनीकी संसाधनों की कमी के कारण बड़ी संख्या में लंबित मामलों की जांच प्रभावित होती है। इसके बावजूद टीम लगातार बच्चों की तलाश में हर संभव प्रयास करती है।

...इसलिए ट्रेस करने में समस्या आती है

एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने बताया कि 6 कई बार विभिन्न थानों में दर्ज गुमशुदगी के मामलों में विवेचना में लापरवाही हो जाती है। जब संबंधित थानों से मामले हल नहीं होते तो ह्यूमन ट्रैफिकिंग टीम को दे दिए जाते हैं। तब तक बच्चों की उम्र बढ़ गई होती है है इसलिए उन्हें ट्रेस करने में समस्या आती है। इसके बावजूद टीम बच्चों को ढूंढने का प्रयास करती रहती है। पिछले वर्ष टीम ने 11 बच्चों को खोज निकाला था।

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