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राम मंदिर मामला: इस्तीफा मतलब...सबकुछ रफादफा? कहीं ये एफआईआर से बचने का पैंतरा तो नहीं?

Wed, 01 Jul 2026 12:53 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Wed, 01 Jul 2026 12:53 PM IST
सार

चंपत राय व अनिल मिश्रा के इस्तीफे को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की थ्योरी गढ़ी जा रही हैं। वहीं, एफआईआर के कुछ घंटे बाद ही इस्तीफा सवाल खड़े कर रहा है।

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Ram Mandir case: Does resignation mean... sweeping everything under the rug?
राम मंदिर चढ़ावा चोरी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला उजागर होने के बीस दिन बाद सवालों से घिरे चंपत राय और अनिल मिश्रा इस्तीफा दे चुके हैं। पहले एफआईआर और फिर उसके कुछ घंटे बाद दोनों का इस्तीफा सवाल खड़े करता है। क्या इस्तीफे को ढाल बनाकर एफआईआर से बचने की कोशिश है? इसके लिए क्या दिल्ली से कोई आदेश-निर्देश मिले थे? क्योंकि आशंका है कि इस्तीफे के जरिए सब कुछ रफादफा करने की जद्दोजहद है।

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पहले दिन से चंपत और अनिल पर आरोप लग रहे हैं, लेकिन इस्तीफा नहीं दिया था। जैसे ही एफआईआर हुई, वैसे ही इस्तीफा दे दिया गया था। इसके पीछे कई कयास लगाए जा रहे हैं, खासकर सोशल मीडिया पर। एक चर्चा यह है कि मामले में सरकार संदेश देगी कि जो आपराधिक साजिश में संलिप्त थे, उन पर केस दर्ज कर जेल भेज दिया गया। वहीं, जिन पर सवाल उठ रहे थे, उन पदाधिकारियों ने खुद ही ट्रस्ट से अपने आपको अलग कर लिया, जिससे मामला शांत हो जाए। उसी दिशा में पूरा मामला जाता दिखाई दे रहा है।
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नृपेंद्र मिश्र ने खोल दी थी पोल
चोरी का मामला खुलने के बाद चंपत राय ने आठ जून को एक वीडियो बयान जारी किया था, जिसमें कहा था कि कोई गड़बड़ी नहीं मिली है, सब कुछ ठीक है। सामान्य ऑडिट प्रक्रिया हर बार की तरह चल रही है। लेकिन कुछ ही दिन बाद राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने उनकी पोल खोल दी थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि चोरी नहीं, बल्कि डाका पड़ा था। यहीं से चंपत राय पर और सवाल उठने लगे थे। शंका गहरा गई थी। अब इस्तीफा देकर प्रकरण से साइड होने की फिराक में हैं, जिससे एफआईआर व अन्य कार्रवाई से बचा जा सके।

नहीं आया कोई बयान
चंपत राय व अनिल मिश्रा के इस्तीफे को लेकर मामला गर्माया हुआ है। हालांकि, मामले में अब तक इन दोनों का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। वहीं, ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों ने भी इस बारे में कुछ नहीं कहा है। केवल निर्माण सहायक गोपाल राव ही सवाल का जवाब देते नजर आए, जिन्होंने इस्तीफे की बात से इनकार किया है।

पूरी जिम्मेदारी, एफआईआर से बाहर

चंपत राय व अनिल मिश्रा की ट्रस्ट में काफी अहम भूमिका रही है। दान राशि के हिसाब-किताब से लेकर हर व्यवस्था में इनकी भूमिका रही है। लेकिन जब चढ़ावा चोरी हुआ तो सिर्फ छोटे लोगों पर केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। ये दोनों एफआईआर से बाहर कैसे रह सकते हैं, यह समझ से परे है।

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