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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा को आरोपी बनाने की तैयारी, पुख्ता साक्ष्य का दावा

Wed, 08 Jul 2026 05:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा सूरज शुक्ला, अमर उजाला, लखनऊ
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 08 Jul 2026 05:53 AM IST
सार

ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को आरोपी बनाने की तैयारी है। एसआईटी रिपोर्ट को इसमें आधार बनाया जाएगा। कई पुख्ता साक्ष्य भी पुलिस को मिले हैं। साजिश में शामिल होने के आरोपी बनाए जा सकते हैं। हालांकि, अब तक किसी तरह का आधिकारिक बयान नहीं आया है।

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Ram Mandir Offering Theft: Preparations Underway to Name Former Trust Member Anil Mishra as an Accused
महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

चढ़ावा चोरी मामले में जांच का दायरा बढ़ गया है। ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को आरोपी बनाने की तैयारी है। एसआईटी रिपोर्ट को इसमें आधार बनाया जाएगा। कई पुख्ता साक्ष्य भी पुलिस को मिले हैं। साजिश में शामिल होने के आरोपी बनाए जा सकते हैं। हालांकि, अब तक किसी तरह का आधिकारिक बयान नहीं आया है।

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मामले में शुरू से ही तीन नाम चर्चा में रहे। जिसमें चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव शामिल हैं। एसआईटी रिपोर्ट में चंपत राय व गोपाल के नाम का सीधे तौर पर कहीं भी जिक्र नहीं है। लेकिन, अनिल मिश्रा की भूमिका स्पष्ट रूप से लिखी गई है। सूत्रों के मुताबिक, अनिल मिश्रा के खिलाफ कई सुबूत भी सामने आए हैं। जिनकी तस्दीक पुलिस कर रही है।
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वहीं, एसआईटी रिपोर्ट को अपनी जांच में शामिल कर लिया है। कुछ ही दिन में एसआईटी उनको आरोपी बनाकर केस में नाम जोड़ सकती है।  उधर, रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा गया है कि अनिल मिश्रा की मामले में सीधी जिम्मेदारी थी। उनके संबंध में उत्तरदायित्व इस आधार पर निर्धारित होता है कि उन्होंने सुरक्षा उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित नहीं किया।
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उनको पता था कि पूरा खेल हो रहा है, इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसलिए उनको दोषी पाया है। चूंकि जानकारी के बावजूद चोरी होती रही, इसलिए साजिश का आरोपी बनाया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, केस की विवेचना के दौरान भी पुलिस को कई बैंक कर्मियों की मिलीभगत के सुबूत मिले हैं। इसलिए जांच की जद में बैंक अधिकारी व कर्मचारी भी हैं। तीन से चार बैंक कर्मियों पर कार्रवाई तय है।


इसलिए बनाए जाएंगे आरोपी...बदल दिए थे नियम
एसआईटी की जांच में पता चला था कि अनिल मिश्रा वित्तीय मामलों व नकदी संकलन के प्रबंधन के कार्य का पर्यवेक्षण करते थे। साथ ही, गणना प्रक्रिया को नियमानुसार कराने की जिम्मेदारी भी उनकी ही थी। वहीं, बैंक के साथ मिलकर गणना के जो नियम आदि तय किए गए थे, उसमें ट्रस्ट की तरफ से वही प्रतिनिधि के तौर पर शामिल हुए थे। इसलिए प्रक्रिया को पुख्ता तौर से पूरी कराने की जिम्मेदारी उनकी ही थी। वहीं, गणनाकर्मियों के ड्रेस, बायोमीट्रिक, तलाशी आदि को लेकर बनाए गए नियमों को अनिल मिश्रा ने ही शिथिल कर दिए थे। इसलिए इन पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
 

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