पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
फ्री ई-पेपर
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Ram Temple offering theft: Police knew about the theft at the temple and were secretly recovering the money.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: पुलिस को पहले से पता था कि चल रही है मंदिर में चोरी, गुपचुप कर रही थी रकम की रिकवरी

Wed, 01 Jul 2026 06:06 AM IST
रोहित मिश्र सूरज शुक्ला, अमर उजाला लखनऊ
सूरज शुक्ला, अमर उजाला लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Wed, 01 Jul 2026 06:06 AM IST
सार

Ram Mandir dispute: राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला खुलने से बहुत पहले पुलिस को इस चोरी के बारे में जानकारी थी। बस वह गुपचुप तरीके से चुप्पी साधे थी। 

विज्ञापन
Ram Temple offering theft: Police knew about the theft at the temple and were secretly recovering the money.
राम मंदिर के चढ़ावे की राशि में गबन - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला पुलिस को भी पहले दिन से पता था। ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ मिलकर पुलिस रकम बरामद करवाने में मदद कर रही थी। इसका खुलासा सीसीटीवी फुटेज से ही हुआ है, जिसमें पुलिसकर्मी अविनाश शुक्ला को गाड़ी में बैठाते कैद हुए हैं। साथ में एक बैग है, जिसमें बरामद रकम बताई जा रही है। हकीकत में पुलिस भी वही कर रही थी, जो ट्रस्ट के पदाधिकारी कह रहे थे। इसलिए सवालों के जवाब में सिर्फ पुलिस की चुप्पी थी।
विज्ञापन


छह जून को चढ़ावा चोरी का मामला मीडिया में आया था। जब मामले ने तूल पकड़ा और ट्रस्टी सवालों से घिरे, तब एसआईटी गठन की मांग हुई। एसआईटी की प्रारंभिक जांच के बाद 23 जून को केस दर्ज किया गया। एफआईआर होने से पहले तक कोई भी पुलिस अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं था। हर किसी का जवाब था कि पुलिस का कोई हस्तक्षेप नहीं है, क्योंकि कोई शिकायत नहीं मिली है। लेकिन दो दिन पहले एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया, जिसमें कुछ लोग अविनाश शुक्ला के घर जाकर उसको कार में बैठाते नजर आ रहे हैं। साथ में एक काले रंग का बैग भी बरामद किया गया था। इस फुटेज में पुलिसकर्मी भी दिख रहे हैं। यह फुटेज पांच जून का है। स्पष्ट है कि पुलिस को पहले से जानकारी तो थी ही, वह संदिग्धों को पकड़ने व रकम बरामद करने में मदद कर रही थी।
विज्ञापन


ट्रस्ट के पदाधिकारियों का था दबाव
ट्रस्ट के पदाधिकारी चंपत राय, अनिल मिश्रा व अन्य तमाम लोग मामला दबाने में जुटे थे। उनकी मंशा थी कि रकम बरामद कर ली जाए और फिर मामला रफादफा कर दिया जाए। इसलिए पहले केस दर्ज नहीं कराया। लेकिन, पुलिस की मदद से अधिकारियों की तरह काम करते हुए ये पदाधिकारी छानबीन में खुद ही जुटे थे। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस भी इन पदाधिकारियों के दबाव में थी, इसलिए चुप्पी साधे थी। जैसा निर्देश ये पदाधिकारी कर रहे थे, वह वैसा ही करते जा रहे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


पूछताछ करने में भी हिचक रहे पुलिसकर्मी
चंपत राय से लेकर मंदिर प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारियों की पहुंच काफी ऊपर तक है। अमूमन पुलिस-प्रशासन के अधिकारी भी उनसे बातचीत करने में दबाव में रहते हैं। सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय से जब पूछताछ की जानी थी, तो पुलिसकर्मी हिचक रहे थे। बहुत सख्ती से पूछताछ नहीं कर पाए। पूछताछ जरूर की, लेकिन एक तरह से बयान ही लिए। अब देखना होगा कि क्या किसी बड़े जिम्मेदार पर पुलिस नकेल कस पाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed