{"_id":"696017d7a8e93637b80cc80c","slug":"school-evaluation-will-be-transparent-simple-and-digital-partha-sarathi-lucknow-news-c-13-1-lko1028-1551848-2026-01-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"पारदर्शी, सरल और डिजिटल होगा स्कूलों का मूल्यांकन: पार्थ सारथी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पारदर्शी, सरल और डिजिटल होगा स्कूलों का मूल्यांकन: पार्थ सारथी
विज्ञापन
विज्ञापन
लखनऊ। प्रदेश में परिषदीय व माध्यमिक विद्यालयों की गुणवत्ता को नए सिरे से परखने और सुदृढ़ करने के लिए स्कूल क्वालिटी असेसमेंट एंड एक्रीडिटेशन फ्रेमवर्क (स्क्वाफ) को प्रभावी बनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप यह मूल्यांकन पारदर्शी, सरल और पूरी तरह डिजिटल होगा।
यह जानकारी बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने दी। वे राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की ओर से आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्कवाफ के माध्यम से विद्यालयों का आकलन दंड या निरीक्षण आधारित नहीं, बल्कि आत्म मूल्यांकन, मार्गदर्शन और सतत सुधार के सिद्धांत पर किया जाएगा।
इसका उद्देश्य किसी भी रूप में विद्यालयों को हतोत्साहित करना नहीं, बल्कि शैक्षिक चुनौतियों की पहचान कर उन्हें गुणवत्ता सुधार के लिए सक्षम बनाना है। यह फ्रेमवर्क केवल मूल्यांकन का दस्तावेज नहीं, बल्कि ऐसा मार्ग दर्शक तंत्र है, जो विद्यालयों को वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप विकसित होने में सहायता करेगा।
इसका विकास इस प्रकार किया जा रहा है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, डिजिटल और उपयोगकर्ता अनुकूल हो, जिससे विद्यालयों को अनुपालन में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। वहीं मानक ऐसे बनाए जा रहे हैं, ताकि प्रधानाचार्य, शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक सभी को यह स्पष्ट समझ हो सके कि विद्यालय का मूल्यांकन किन बिंदुओं पर किया जा रहा है और क्या सुधार करने हैं।
कार्यशाला में महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी, एससीईआरटी निदेशक गणेश कुमार, संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान, अपर राज्य परियोजना निदेशक माध्यमिक विष्णुकांत पांडेय आदि उपस्थित थे।
Trending Videos
यह जानकारी बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने दी। वे राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की ओर से आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्कवाफ के माध्यम से विद्यालयों का आकलन दंड या निरीक्षण आधारित नहीं, बल्कि आत्म मूल्यांकन, मार्गदर्शन और सतत सुधार के सिद्धांत पर किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
इसका उद्देश्य किसी भी रूप में विद्यालयों को हतोत्साहित करना नहीं, बल्कि शैक्षिक चुनौतियों की पहचान कर उन्हें गुणवत्ता सुधार के लिए सक्षम बनाना है। यह फ्रेमवर्क केवल मूल्यांकन का दस्तावेज नहीं, बल्कि ऐसा मार्ग दर्शक तंत्र है, जो विद्यालयों को वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप विकसित होने में सहायता करेगा।
इसका विकास इस प्रकार किया जा रहा है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, डिजिटल और उपयोगकर्ता अनुकूल हो, जिससे विद्यालयों को अनुपालन में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। वहीं मानक ऐसे बनाए जा रहे हैं, ताकि प्रधानाचार्य, शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक सभी को यह स्पष्ट समझ हो सके कि विद्यालय का मूल्यांकन किन बिंदुओं पर किया जा रहा है और क्या सुधार करने हैं।
कार्यशाला में महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी, एससीईआरटी निदेशक गणेश कुमार, संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान, अपर राज्य परियोजना निदेशक माध्यमिक विष्णुकांत पांडेय आदि उपस्थित थे।