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सुना है क्या: पोस्टिंग के फेर में बढ़ गया BP की कहानी, साथ ही लाल टोपी पर भगवा रंग व जुगाड़ की जुगत के किस्से

अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Fri, 06 Mar 2026 10:12 AM IST
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सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

suna hai kya BP escalated due to postings story including tales of saffron on red cap and jugaad a trick
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'पोस्टिंग के फेर में बढ़ गया ब्लड प्रेशर' की कहानी। इसके अलावा 'लाल टोपी पर चढ़ा भगवा रंग' और 'जुगाड़ की जुगत में साहब' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी... 

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पोस्टिंग के फेर में बढ़ गया ब्लड प्रेशर

चूरन चटनी वाले विभाग के डॉक्टरों ने एक अफसर से पिंड छूटने के बाद राहत की सांस ली है। इस अफसर के जाने के बाद उम्मीद थी कि पदोन्नति के बाद मनचाही पोस्टिंग मिल जाएगी। मनचाही पोस्टिंग के दावेदारों ने अपने- अपने आकाओं को सेट भी कर लिया, लेकिन पोस्टिंग देने वाले चालाक निकले। वे किसी न किसी बहाने से सूची को लटकाए हुए हैं। ऐसे में मनचाही पोस्टिंग के दावेदारों का ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है। वे अपने विभाग की दवा छोड़कर एलोपैथ की दवाएं खा रहे हैं। अब देखना यह है कि यह दवा कारगर होती है अथवा नहीं।

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लाल टोपी पर चढ़ा भगवा रंग

होली का त्योहार गिले-शिकवे दूर करने का अच्छा मौका था। लिहाजा लाल रंग की टोपी पहने एक नेताजी ने इसका फायदा खूब उठाया। नेताजी रंग खेलने के बहाने सत्ताधारी मंत्री के घर पहुंचे तो मंत्री ने भी उनका स्वागत भगवा गुलाल से किया। उनका पूरा लिबास भगवाधारी हो गया। इसपर वहां मौजूद लोगों ने चुटकी ली कि अब तो आप भी हो गए भगवाधारी, अब तो लाल टोपी उतार फेंको। ऐसा स्वागत देख नेताजी झेंप गए। पर उनके साथ आए एक चिंटू ने 'हम तो तेरे आशिक हैं सदियों पुराने..चाहे तो माने...चाहे न माने... गाना गाकर नए सियसी संकेत देकर माहौल को हल्का कर दिया।

जुगाड़ की जुगत में साहब

बंदी जेल की दीवार तोड़कर भागे क्या, कि साहब के दिन खराब हो गए। बड़े साहब ने बचाने की हर एक कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे थे। इसलिए जेल के मुखिया रहे साहब की होली फीकी रही। उन्होंने जुगाड़ के गुलाल को उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हर जगह हाजिरी लगाई, ताकि उनके पुराने वाले दिन बहुर सकें। अब देखना होगा कि इसका असर होता है, या फिर साहब का संघर्ष जारी रहेगा।

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