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Suna Hai Kya: फिर लपेटे में आ गए साहब, फील्ड वाले मस्त ऑफिस वाले पस्त, ये तो बन गए भविष्य के मुखिया
Mon, 13 Jul 2026 10:12 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Mon, 13 Jul 2026 10:12 AM IST
सार
"सुना है क्या" कॉलम में हम आपके लिए लाते हैं यूपी के सरकारी विभागों और सियासी गलियारे की वो हलचल जो कहीं भी नहीं छपती है। पढ़ें, ये किस्से:
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
"सुना है क्या" कॉलम में हम आपके लिए लाते हैं यूपी के सरकारी विभागों और सियासी गलियारे की वो हलचल जो कहीं भी नहीं छपती है। आज बात एक बड़े खेल अधिकारी की। साथ ही ईज आफ डूइंग बिजनेस के लिए काम करने वाले युवाओं की हकीकत। वहीं, खेत खलिहान विभाग के एक मुखिया की। पढ़ें, ये किस्से:
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फिर लपेटे में आ गए साहब
उत्तर प्रदेश की राजधानी में तैनात एक बड़े खेल अधिकारी विवादों से दूर रहने के काफी प्रयास करते हैं, लेकिन अक्सर लपेटे में आ ही जाते हैं। पिछले दिनों प्रमुख खेल स्टेडियम में एक खेल अभ्यास के दौरान एक खिलाड़ी चोटिल हो गया। फिर क्या था, मामले का वीडियो वायरल हो गया तो उच्चाधिकारियों तक पहुंच गया। साहब को फटकार लगी और उन्होंने तत्काल प्रभाव से खेल की ट्रेनिंग बंद करा दी। एक माह से ज्यादा वक्त हो गया है, लेकिन ट्रेनिंग सेंटर पर ताला लटका हुआ है। सवाल पूछने पर साहब ने ट्रेनिंग सेंटर को नए सिरे से बनाने की बात कही। शासन स्तर से बजट जारी होने और निर्माण में तीन से चार माह का समय लगना तय है। ऐसे में आने वाला वक्त साहब और इस खेल से जुड़े खिलाड़ियों के लिए मुश्किल होने वाला है।
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मित्र हैं कि टिकते नहीं
कल कारखानों को रफ्तार देने वाले विभाग की सूरत बदलने और ईज आफ डूइंग के लिए दर्जनों युवाओं को रखा गया है। मोटी पगार पर टेक्नोलाजी में माहिर इन युवाओं को फील्ड के साथ-साथ ऑफिस वर्क भी दिए गए हैं। फील्ड वाले तो मस्त हैं लेकिन ऑफिस वाले पस्त हैं। सुबह से रात तक क्लर्की वाले काम से बोर होकर तमाम ने बाय-बाय कर दिया है। टाटा करने वालों की बढ़ती संख्या से जिम्मेदार जूनियर परेशान हैं कि यही हाल रहा तो लंबी क्लास लगने का खतरा है।
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भविष्य का मुखिया
खेत खलिहान से जुड़े विभाग के मुखिया का समय पूरा होने वाला है, लेकिन उनकी कुर्सी का वारिस पहले से ही सक्रिय हो गया है। वह हर गतिविधि अपने हिसाब से चलाने की कोशिश में है। सप्ताहभर पहले एक मातहत को किसी काम के लिए कड़क आदेश दिया। मातहत ने आव देखा न ताव, बोला कि इस तरह से तो मुखिया भी आदेश नहीं देते हैं। जब आप कुर्सी पर बैठना तब इस तरह का आदेश देना। फिर क्या था। अब अन्य कर्मियों ने इनका नाम ही भविष्य का मुखिया रख दिया है।
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