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Lucknow News: सूरज की लाली और शेरो-शायरी से गुलजार हुई शाम
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Mon, 02 Feb 2026 01:31 AM IST
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सूरज की लाली और शेरो-शायरी से गुलजार हुई शाम
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लखनऊ। राजधानी की नवाबी विरासत और अदबी परंपराओं का जीवंत चित्र पेश करता महिंद्रा सनतकदा लखनऊ फेस्टिवल रविवार शाम अपनी पूरी रंगत में रहा। जैसे ही सूरज ढलकर अपनी लालिमा बिखेरने लगा, कैसरबाग स्थित राजाराम पार्क का माहौल शेरो-शायरी की खुशबू से सराबोर हो गया। इस दौरान गंगा-जमुनी तहजीब और कला का अनूठा संगम देखने को मिला। फेस्टिवल की थीम “राब्ता: लखनऊ-कलकत्ता का” परिसर की हर झलक में दिखाई दे रही थी।
खुशनुमा दोपहर में सफेद बारादरी से लेकर आमिर-उद-दौला लाइब्रेरी तक, हर कोना साझा विरासत की कहानी बयां कर रहा था। रविवार का दिन “होम कुक्ड फूड फेस्टिवल” के नाम रहा। राजा राम पाल सिंह पार्क में सजे “बावर्ची टोला” में घरों की रसोइयों से निकलकर आए पारंपरिक स्वादों ने जायके का जादू बिखेरा। कुमाऊं की पहाड़ियों के शुद्ध और बिना मिलावट वाले स्वादों को पेश करने वाले वाइल्डरिफ्ट ने लखनवियों को खूब लुभाया।
सांस्कृतिक अहमियत पर बोलते हुए शेफ शीबा इकबाल ने कहा कि खाने के जरिए लखनऊ-कोलकत्ता का रिश्ता लोगों तक पहुंचाना जरूरी है। वहीं, पारंपरिक स्वादों पर शाहपर किदवई ने कहा कि स्वाद हर किसी को जोड़ने और रिश्तों को मजबूत करने का काम करता है। इसके अलावा क्राफ्ट्स बाजार में दुर्लभ हथकरघा परंपरा ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा।
सांस्कृतिक संध्या में सुर, शब्द और सिनेमा का अनूठा संगम
सुबह की शुरुआत अमृत लाल नागर तख्त पर “सहर” के साथ हुई, जहां उस्ताद इरफान मोहम्मद खान के सरोद की गूंज और उस्ताद इल्मास हुसैन खान के तबले की थाप ने भोर को यादगार बना दिया। शाम को फेस्टिवल में “राब्ता लखनऊ-कलकत्ता का” थीम फिल्म का प्रदर्शन हुआ, जिसमें फोटोग्राफर तस्वीर हसन और कलाकार सौम्यदीप रॉय ने दो शहरों के बीच संबंधों और अक्स को तलाशने की कोशिश की।
दिन का समापन “बैतबाजी” की शेरो-शायरी और “बोर्नो अनन्यो” समूह के संगीत के साथ हुआ। रॉक, रवींद्र संगीत और लोक धुनों के संगम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरी सांस्कृतिक संध्या शेरो-शायरी और संगीत की खुशबू से सराबोर रही, जिसने लखनऊ की परंपरा और आधुनिकता का खूबसूरत संगम पेश किया।
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खुशनुमा दोपहर में सफेद बारादरी से लेकर आमिर-उद-दौला लाइब्रेरी तक, हर कोना साझा विरासत की कहानी बयां कर रहा था। रविवार का दिन “होम कुक्ड फूड फेस्टिवल” के नाम रहा। राजा राम पाल सिंह पार्क में सजे “बावर्ची टोला” में घरों की रसोइयों से निकलकर आए पारंपरिक स्वादों ने जायके का जादू बिखेरा। कुमाऊं की पहाड़ियों के शुद्ध और बिना मिलावट वाले स्वादों को पेश करने वाले वाइल्डरिफ्ट ने लखनवियों को खूब लुभाया।
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सांस्कृतिक अहमियत पर बोलते हुए शेफ शीबा इकबाल ने कहा कि खाने के जरिए लखनऊ-कोलकत्ता का रिश्ता लोगों तक पहुंचाना जरूरी है। वहीं, पारंपरिक स्वादों पर शाहपर किदवई ने कहा कि स्वाद हर किसी को जोड़ने और रिश्तों को मजबूत करने का काम करता है। इसके अलावा क्राफ्ट्स बाजार में दुर्लभ हथकरघा परंपरा ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा।
सांस्कृतिक संध्या में सुर, शब्द और सिनेमा का अनूठा संगम
सुबह की शुरुआत अमृत लाल नागर तख्त पर “सहर” के साथ हुई, जहां उस्ताद इरफान मोहम्मद खान के सरोद की गूंज और उस्ताद इल्मास हुसैन खान के तबले की थाप ने भोर को यादगार बना दिया। शाम को फेस्टिवल में “राब्ता लखनऊ-कलकत्ता का” थीम फिल्म का प्रदर्शन हुआ, जिसमें फोटोग्राफर तस्वीर हसन और कलाकार सौम्यदीप रॉय ने दो शहरों के बीच संबंधों और अक्स को तलाशने की कोशिश की।
दिन का समापन “बैतबाजी” की शेरो-शायरी और “बोर्नो अनन्यो” समूह के संगीत के साथ हुआ। रॉक, रवींद्र संगीत और लोक धुनों के संगम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरी सांस्कृतिक संध्या शेरो-शायरी और संगीत की खुशबू से सराबोर रही, जिसने लखनऊ की परंपरा और आधुनिकता का खूबसूरत संगम पेश किया।

सूरज की लाली और शेरो-शायरी से गुलजार हुई शाम

सूरज की लाली और शेरो-शायरी से गुलजार हुई शाम

सूरज की लाली और शेरो-शायरी से गुलजार हुई शाम

सूरज की लाली और शेरो-शायरी से गुलजार हुई शाम

सूरज की लाली और शेरो-शायरी से गुलजार हुई शाम
