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घटनास्थल बोलता है, बस उससे बात करने की जरूरत: सुजीत पांडेय
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Tue, 20 Jan 2026 03:05 AM IST
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उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में सोमवार को क्राइम सीन मैनेजमेंट कोर्स के दू
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सरोजनीनगर। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में सोमवार को क्राइम सीन मैनेजमेंट कोर्स के दूसरे बैच के प्रशिक्षण का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस महानिदेशक (लखनऊ जोन) सुजीत पांडेय ने कहा कि जो अधिकारी घटनास्थल को गंभीरता से समझता है, उसे बाद में अदालत में कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता।
उन्होंने कहा कि घटनास्थल बोलता है, बस उससे बात करने की जरूरत है। सतही जांच के कारण कई बार साक्ष्य के अभाव में अभियुक्त छूट जाते हैं। उन्होंने बड़े मामलों के उदाहरण देते हुए साक्ष्य संकलन के महत्व पर प्रकाश डाला और प्रशिक्षणार्थियों से कानूनी जरूरतों के अनुरूप कार्य कर पीड़ितों को न्याय दिलाने का आह्वान किया।
संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने उन्हें स्मृति चिह्न और अंगवस्त्रम भेंट कर सम्मानित किया। इस 45 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न कमिश्नरेट और जनपदों से आरक्षी से लेकर निरीक्षक रैंक के 100 पुलिस अधिकारी भाग ले रहे हैं। कोर्स के दौरान क्राइम सीन मैनेजमेंट के साथ-साथ साइबर और फोरेंसिक विषयों का गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा।
डॉ. गोस्वामी ने कहा कि फोरेंसिक विशेषज्ञ विवेचना की धुरी हैं। डीएनए और वैज्ञानिक साक्ष्य न केवल अपराधी को दोषी ठहराने में सहायक होते हैं, बल्कि निर्दोष को भी बचाते हैं। उन्होंने साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती पर भी चिंता जताई।
जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी के संचालन में आयोजित कार्यक्रम के अंत में महानिरीक्षक राजीव मल्होत्रा ने आभार व्यक्त किया। इस मौके पर उपनिदेशक जितेंद्र श्रीवास्तव, अतुल यादव, डॉ. श्रुति दास गुप्ता, डॉ. वाष्णेय, डॉ. पोरवी सिंह, गिरजेश राय, उप निरीक्षक शैलेंद्र सिंह और कार्तिकेय सहित संस्थान के अन्य अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि घटनास्थल बोलता है, बस उससे बात करने की जरूरत है। सतही जांच के कारण कई बार साक्ष्य के अभाव में अभियुक्त छूट जाते हैं। उन्होंने बड़े मामलों के उदाहरण देते हुए साक्ष्य संकलन के महत्व पर प्रकाश डाला और प्रशिक्षणार्थियों से कानूनी जरूरतों के अनुरूप कार्य कर पीड़ितों को न्याय दिलाने का आह्वान किया।
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संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने उन्हें स्मृति चिह्न और अंगवस्त्रम भेंट कर सम्मानित किया। इस 45 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न कमिश्नरेट और जनपदों से आरक्षी से लेकर निरीक्षक रैंक के 100 पुलिस अधिकारी भाग ले रहे हैं। कोर्स के दौरान क्राइम सीन मैनेजमेंट के साथ-साथ साइबर और फोरेंसिक विषयों का गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा।
डॉ. गोस्वामी ने कहा कि फोरेंसिक विशेषज्ञ विवेचना की धुरी हैं। डीएनए और वैज्ञानिक साक्ष्य न केवल अपराधी को दोषी ठहराने में सहायक होते हैं, बल्कि निर्दोष को भी बचाते हैं। उन्होंने साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती पर भी चिंता जताई।
जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी के संचालन में आयोजित कार्यक्रम के अंत में महानिरीक्षक राजीव मल्होत्रा ने आभार व्यक्त किया। इस मौके पर उपनिदेशक जितेंद्र श्रीवास्तव, अतुल यादव, डॉ. श्रुति दास गुप्ता, डॉ. वाष्णेय, डॉ. पोरवी सिंह, गिरजेश राय, उप निरीक्षक शैलेंद्र सिंह और कार्तिकेय सहित संस्थान के अन्य अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।

उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में सोमवार को क्राइम सीन मैनेजमेंट कोर्स के दू

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