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Lucknow News: चित्रकला में युक्ति, निबंध में संस्कृति अव्वल
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लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान और उत्तर प्रदेश के संस्कृति विभाग ने रविवार को काकोरी ट्रेन एक्शन डे पर इंदिरानगर के तकरोही में स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में ‘भारत की स्वतंत्रता में काकोरी के क्रांतिकारी का योगदान’ विषय पर परिचर्चा, निबंध और चित्रकला प्रतियोगिताएं हुईं।
शहीदों की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पांजलि के बाद बौद्ध संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश सिंह ने कहा कि नौ अगस्त, 1925 को काकोरी के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी शासन को चुनौती दी थी। इस घटना ने युवाओं में राष्ट्रभक्ति और स्वतंत्रता की भावना मजबूत की। चित्रकला प्रतियोगिता में युक्ति वर्मा (कक्षा 9) ने प्रथम, अंजलि (कक्षा 7) ने द्वितीय और अनिरुद्ध (कक्षा 7) ने तृतीय पुरस्कार जीता। निबंध प्रतियोगिता में संस्कृति द्विवेदी (कक्षा 9) को प्रथम, आस्था रावत (कक्षा 10) को द्वितीय और शलोनी (कक्षा 10) को तृतीय पुरस्कार मिला। पांच अन्य को सांत्वना पुरस्कार मिले। सभी को स्मृति चिह्न और सहभागिता प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए।
डॉ. धीरेंद्र सिंह ने आभार व्यक्त किया। संस्थान के सदस्य तरुणेश बौद्ध ने बताया कि क्रांतिकारियों ने सरकारी खजाना व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम को गति देने के लिए लूटा था। सरस्वती शिशु मंदिर के प्राचार्य अवधेश ने कहा कि यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में साहस और क्रांतिकारी चेतना का महत्वपूर्ण अध्याय है। डॉ. धीरेंद्र सिंह, अरुणेश मिश्र, सुशील कुमार बच्चा, देवीशरण त्रिपाठी, सुभाष शर्मा, डॉ. आरपी सिंह, सुरेश व हिमांशु पांडेय आदि मौजूद रहे।
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शहीदों की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पांजलि के बाद बौद्ध संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश सिंह ने कहा कि नौ अगस्त, 1925 को काकोरी के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी शासन को चुनौती दी थी। इस घटना ने युवाओं में राष्ट्रभक्ति और स्वतंत्रता की भावना मजबूत की। चित्रकला प्रतियोगिता में युक्ति वर्मा (कक्षा 9) ने प्रथम, अंजलि (कक्षा 7) ने द्वितीय और अनिरुद्ध (कक्षा 7) ने तृतीय पुरस्कार जीता। निबंध प्रतियोगिता में संस्कृति द्विवेदी (कक्षा 9) को प्रथम, आस्था रावत (कक्षा 10) को द्वितीय और शलोनी (कक्षा 10) को तृतीय पुरस्कार मिला। पांच अन्य को सांत्वना पुरस्कार मिले। सभी को स्मृति चिह्न और सहभागिता प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए।
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डॉ. धीरेंद्र सिंह ने आभार व्यक्त किया। संस्थान के सदस्य तरुणेश बौद्ध ने बताया कि क्रांतिकारियों ने सरकारी खजाना व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम को गति देने के लिए लूटा था। सरस्वती शिशु मंदिर के प्राचार्य अवधेश ने कहा कि यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में साहस और क्रांतिकारी चेतना का महत्वपूर्ण अध्याय है। डॉ. धीरेंद्र सिंह, अरुणेश मिश्र, सुशील कुमार बच्चा, देवीशरण त्रिपाठी, सुभाष शर्मा, डॉ. आरपी सिंह, सुरेश व हिमांशु पांडेय आदि मौजूद रहे।
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