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Lucknow News: 225 डीएल कर्मियों की थी जरूरत, वसूली के लिए भर्ती किए 320, अब कर्मियों को नाैकरी से निकाल रहे, पैदा हुआ रोजीरोटी का संकट
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225 डीएल कर्मियों की थी जरूरत, वसूली के लिए भर्ती किए 320, अब कर्मियों को नाैकरी से निकाल रहे,
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परिवहन विभाग का मामला
105 कर्मियों को धीरे-धीरे नाैकरी से निकाल रहे, 45 हो चुके हैं बाहर
तीनों निजी डीएल एजेंसियों के लूट व भ्रष्टाचार पर अफसर चुप, जांच से कतरा रहे
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। डीएल बनाने वाली एजेंसियों की लूट व भ्रष्टाचार का आलम यह है कि तीनों एजेंसियों को कुल 225 कर्मचारियों की भर्ती करनी थी, लेकिन वसूली के लिए 320 कर्मियों को भर्ती कर लिया गया। उनसे तीन से चार लाख रुपये वसूले गए। लेकिन जब कर्मचारियों ने एजेंसी को सैलरी देने से इनकार किया तो उन्हें बाहर निकालना शुरू कर दिया गया। 45 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है।
हद तो यह है कि निजी एजेंसियों की लूट के खिलाफ परिवहन विभाग के अफसर कुछ भी सुनने को तैयार नहीं। पीड़ितों से मिलने का वक्त नहीं। उनकी शिकायतें रद्दी में डाल दी जाती हैं। आरोपों की जांच तक नहीं करवाई जाती। परिवहन विभाग में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने, प्रिंट कराने व उन्हें आवेदकों के घर तक डिलीवर करने की जिम्मेदारी तीन एजेंसियों सिल्वर टच, फोकाम व रोजमार्टा के पास है। इन एजेंसियों ने आरटीओ, एआरटीओ में डीएल बनाने का काम करने के लिए प्रदेशभर में 320 कर्मचारियों की भर्ती कर ली। जबकि नियमत: प्रत्येक एजेंसी को सिर्फ 75 कर्मचारियों की भर्ती करनी थी, लेकिन प्राइवेटकर्मियों से वसूली के लिए 125 कर्मियों की भर्ती की गई। तीन से चार लाख रुपये प्रत्येक कर्मचारी से भर्ती के नाम पर वसूला गया। इसके बाद जब एजेंसी प्रतिनिधियों ने कर्मचारियों से उनकी सैलरी का पैसा एडवांस में मांगा तो कर्मियों ने आपत्ति दर्ज कराई। ऐसा करने वाले 45 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इन पीड़ित कर्मचारियों ने शिकायत कि लेकिन परिवहन विभाग के जिम्मेदार अफसर जांच तक करवाने को तैयार नहीं।
बगैर ज्वाइनिंग लेटर एजेंसियां करवा रहे ड्यूटी
डीएल एजेंसियों की मनमानी का आलम यह है कि नियुक्ति के सात महीने बाद भी कर्मचारियों को ज्वाइनिंग लेटर नहीं दिया गया है। सिर्फ संबंधित आरटीओ-एआरटीओ को पत्र लिखकर ड्यूटी करने वाले कर्मियों की सूची साैंपी गई है। सूत्र बताते हैं कि सिल्वर टच व फोकाम लिमिटेड की ओर से लेटर नहीं दिए गए हैं।
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टीसी भी हो चुके हैं नाराज
डीएल बनाने वाले कर्मचारियों को एजेंसी की ओर से ज्वाइनिंग लेटर नहीं दिए गए। इतना ही नहीं आईडी कार्ड, ईएसआई आदि की सुविधाएं भी नहीं दी गई हैं। हाल ही में अयोध्या दाैरे पर गए ट्रांसपोर्ट कमिश्नर टीसी आशुतोष निरंजन इस पर नाराजगी भी जता चुके हैं। लेकिन एजेंसियां इससे बेपरवाह हैं।
एलआईयू कर रही पूछताछ
नाैकरी से निकाले गए प्राइवेटकर्मियों की नाराजगी बढ़ रही है। उनकी ओर से दो बार परिवहन आयुक्त कार्यालय पर ज्ञापन साैंपे गए। ऐसे में एलआईयू सक्रिय हो गई है। मामले को लेकर एलआईयू कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय भी इस मुद्दे को लेकर एक्टिव हो गया है। इतना ही नहीं अमर उजाला में लगातार प्रकाशित हो रही खबरों के बाद निजी एजेंसियों ने कर्मचारियों को एक और महीने की सैलरी दी है। हालांकि, कर्मियों को पूरी सैलरी नहीं दी गई।
आधिकारिक वर्जन
निजी एजेंसियों की ओर से निकाले गए प्राइवेटकर्मियों की शिकायतों का मामला संज्ञान में आया है। उनके आरोपों की जांच करवाई जाएगी। दोषी एजेंसी प्रतिनिधियों पर कार्रवाई होगी।
-दयाशंकर सिंह, परिवहन मंत्री
105 कर्मियों को धीरे-धीरे नाैकरी से निकाल रहे, 45 हो चुके हैं बाहर
तीनों निजी डीएल एजेंसियों के लूट व भ्रष्टाचार पर अफसर चुप, जांच से कतरा रहे
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। डीएल बनाने वाली एजेंसियों की लूट व भ्रष्टाचार का आलम यह है कि तीनों एजेंसियों को कुल 225 कर्मचारियों की भर्ती करनी थी, लेकिन वसूली के लिए 320 कर्मियों को भर्ती कर लिया गया। उनसे तीन से चार लाख रुपये वसूले गए। लेकिन जब कर्मचारियों ने एजेंसी को सैलरी देने से इनकार किया तो उन्हें बाहर निकालना शुरू कर दिया गया। 45 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है।
हद तो यह है कि निजी एजेंसियों की लूट के खिलाफ परिवहन विभाग के अफसर कुछ भी सुनने को तैयार नहीं। पीड़ितों से मिलने का वक्त नहीं। उनकी शिकायतें रद्दी में डाल दी जाती हैं। आरोपों की जांच तक नहीं करवाई जाती। परिवहन विभाग में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने, प्रिंट कराने व उन्हें आवेदकों के घर तक डिलीवर करने की जिम्मेदारी तीन एजेंसियों सिल्वर टच, फोकाम व रोजमार्टा के पास है। इन एजेंसियों ने आरटीओ, एआरटीओ में डीएल बनाने का काम करने के लिए प्रदेशभर में 320 कर्मचारियों की भर्ती कर ली। जबकि नियमत: प्रत्येक एजेंसी को सिर्फ 75 कर्मचारियों की भर्ती करनी थी, लेकिन प्राइवेटकर्मियों से वसूली के लिए 125 कर्मियों की भर्ती की गई। तीन से चार लाख रुपये प्रत्येक कर्मचारी से भर्ती के नाम पर वसूला गया। इसके बाद जब एजेंसी प्रतिनिधियों ने कर्मचारियों से उनकी सैलरी का पैसा एडवांस में मांगा तो कर्मियों ने आपत्ति दर्ज कराई। ऐसा करने वाले 45 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इन पीड़ित कर्मचारियों ने शिकायत कि लेकिन परिवहन विभाग के जिम्मेदार अफसर जांच तक करवाने को तैयार नहीं।
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बगैर ज्वाइनिंग लेटर एजेंसियां करवा रहे ड्यूटी
डीएल एजेंसियों की मनमानी का आलम यह है कि नियुक्ति के सात महीने बाद भी कर्मचारियों को ज्वाइनिंग लेटर नहीं दिया गया है। सिर्फ संबंधित आरटीओ-एआरटीओ को पत्र लिखकर ड्यूटी करने वाले कर्मियों की सूची साैंपी गई है। सूत्र बताते हैं कि सिल्वर टच व फोकाम लिमिटेड की ओर से लेटर नहीं दिए गए हैं।
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टीसी भी हो चुके हैं नाराज
डीएल बनाने वाले कर्मचारियों को एजेंसी की ओर से ज्वाइनिंग लेटर नहीं दिए गए। इतना ही नहीं आईडी कार्ड, ईएसआई आदि की सुविधाएं भी नहीं दी गई हैं। हाल ही में अयोध्या दाैरे पर गए ट्रांसपोर्ट कमिश्नर टीसी आशुतोष निरंजन इस पर नाराजगी भी जता चुके हैं। लेकिन एजेंसियां इससे बेपरवाह हैं।
एलआईयू कर रही पूछताछ
नाैकरी से निकाले गए प्राइवेटकर्मियों की नाराजगी बढ़ रही है। उनकी ओर से दो बार परिवहन आयुक्त कार्यालय पर ज्ञापन साैंपे गए। ऐसे में एलआईयू सक्रिय हो गई है। मामले को लेकर एलआईयू कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय भी इस मुद्दे को लेकर एक्टिव हो गया है। इतना ही नहीं अमर उजाला में लगातार प्रकाशित हो रही खबरों के बाद निजी एजेंसियों ने कर्मचारियों को एक और महीने की सैलरी दी है। हालांकि, कर्मियों को पूरी सैलरी नहीं दी गई।
आधिकारिक वर्जन
निजी एजेंसियों की ओर से निकाले गए प्राइवेटकर्मियों की शिकायतों का मामला संज्ञान में आया है। उनके आरोपों की जांच करवाई जाएगी। दोषी एजेंसी प्रतिनिधियों पर कार्रवाई होगी।
-दयाशंकर सिंह, परिवहन मंत्री