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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: ₹219 crore spent via IFMS without budget provision; CAG raises questions on financial management.

CAG Report: आईएफएमएस में बिना बजट 219 करोड़ रुपये खर्च, सीएजी ने उठाए वित्तीय प्रबंधन पर सवाल

Thu, 06 Aug 2026 10:27 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Thu, 06 Aug 2026 10:27 AM IST
सार

सीएजी की रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, नई सेवाओं पर रोक के बावजूद 5,120.88 करोड़ रुपये का पुनर्विनियोजन किया गया। राज्य संसाधनों से वित्तपोषित योजनाओं में भी 10,186.62 करोड़ रुपये के अनियमित पुनर्विनियोजन के मामले सामने आए हैं।

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UP: ₹219 crore spent via IFMS without budget provision; CAG raises questions on financial management.
- फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वित्त एवं राजस्व विभागों से संबंधित नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की वर्ष 2022-23 की रिपोर्ट में वित्तीय प्रबंधन और बजटीय नियंत्रण को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (आईएफएमएस) में बिना बजटीय प्रावधान और स्वीकृति के 219.57 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। वहीं, नई सेवाओं पर रोक के बावजूद 5,120.88 करोड़ रुपये का पुनर्विनियोजन किया गया। राज्य संसाधनों से वित्तपोषित योजनाओं में भी 10,186.62 करोड़ रुपये के अनियमित पुनर्विनियोजन के मामले सामने आए हैं।

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2014-15 से आईटी संचालन समिति का पुनर्गठन नहीं : सीएजी की सूचना प्रौद्योगिकी लेखापरीक्षा में आईएफएमएस के आईटी गवर्नेस पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2014-15 में आईएफएमएस लागू होने के बाद से आईटी संचालन समिति का पुनर्गठन नहीं किया गया। इसके अलावा आईटी नीति भी तैयार नहीं की गई। परियोजना के निर्धारित पड़ाव समय से पूरा नहीं किए जाने के कारण केंद्र सरकार से मिलने वाली 20.06 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भी जारी नहीं हो सकी। 
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स्थानांतरण सेवानिवृत्ति के बाद भी सक्रिय मिलीं यूजर आईडी
आईएफएमएस में डाटा सुरक्षा से जुड़ी गंभीर विसंगतियां भी मिलीं। जांच में ऐसे मामले सामने आए, जिनमें कर्मचारियों के स्थानांतरण या सेवानिवृत्ति के बाद भी उनकी उपयोगकर्ता आईडी सक्रिय थीं। इससे अनधिकृत रूप से वित्तीय प्रणाली तक पहुंच बनाए जाने का खतरा बना रहा।

संपत्तियों का पूरा ब्योरा छिपाने से 6.83 करोड़ के राजस्व की क्षति
स्टाम्प एवं निबंधन विभाग की जांच में भी राजस्व हानि का मामला सामने आया। संपत्तियों की खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेजों में सड़क की चौड़ाई, संपत्ति के व्यावसायिक उपयोग व वास्तविक क्षेत्रफल जैसी जानकारियां पूरी तरह दर्ज नहीं की गईं। इससे संपत्तियों का सही मूल्यांकन नहीं हो सका व 6.83 करोड़ रुपये के स्टाम्प शुल्क एवं निबंधन फौस की कम वसूली हुई।

36,241.90 करोड़ रुपये का राजस्व बकाया

रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2023 तक बिक्री, व्यापार आदि पर कर, राज्य आबकारी, वाहनों पर कर तथा स्टाम्प एवं निबंधन शुल्क से संबंधित कुल 36,241.90 करोड़ का राजस्व बकाया था। अकेले स्टाम्प राजस्व की 15,293.15 करोड़ की राशि पांच वर्ष से अधिक समय से बकाया थी। रिपोर्ट में उल्लेख है कि बार-बार अनुस्मारक भेजे जाने के बावजूद खनन विभाग ने बकाया राजस्व के आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए।

नियमों के विपरीत 571 डॉक्टरों को मिला एनपीए
स्वास्थ्य विभाग में गैर-प्रैक्टिसिंग भत्ता (एनपीए) के भुगतान में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। विधानसभा में बुधवार को पेश कैग की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018 से 2024 के बीच 571 सरकारी डॉक्टरों को नियमों के विपरीत एनपीए दिया गया, जिससे सरकार को 16.93 लाख रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ। रिपोर्ट में बताया गया कि प्रदेश में डॉक्टरों को मूल वेतन का 20% एनपीए दिया जाता है, लेकिन मूल वेतन और एनपीए मिलाकर मासिक राशि 2.37 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद निर्धारित सीमा से अधिक वेतन पाने वाले 571 डॉक्टरों को भी एनपीए का भुगतान किया गया। इसके अलावा 1660 मामलों में एनपीए की दर 21 प्रतिशत तक दी गई, जिसे कैग ने नियमों का उल्लंघन माना है। ब्यूरो

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