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यूपी: पश्चिम के बाद अब पूर्वांचल में बसपा का किला मजबूत करेंगे आकाश, सितंबर में हो सकती हैं कई बड़ी जनसभाएं
Tue, 18 Aug 2026 07:18 AM IST
रोहित मिश्र
अशोक मिश्रा, अमर उजाला लखनऊ
अशोक मिश्रा, अमर उजाला लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Tue, 18 Aug 2026 07:18 AM IST
सार
UP Assembly Elections: यूपी में बसपा अपने आप को पूरी तरह से मजबूत करने में जुट गई है। आकाश आनंद पश्चिम के जिलों के साथ अब पूर्वांचल पर भी फोकस करेंगे।
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आकाश आनंद हुए सक्रिय।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश अब पूर्वांचल में पार्टी को मजबूत करेंगे। पश्चिमी उप्र के बाद पूर्वांचल में उनकी सितंबर माह में जनसभाएं प्रस्तावित हैं। मायावती ने आकाश की 25 अगस्त को नोएडा के जेवर में जनसभा को मंजूरी दी है। विधानसभा चुनाव से पहले मायावती की मंडलीय रैलियों से पूर्व आकाश वोट बैंक मजबूत करेंगे। बसपा सुप्रीमो आकाश को मैदान में उतारेंगी ताकि जेन जी को आकर्षित किया जा सके। इससे पार्टी के कोर वोट बैंक को विपक्ष के पाले में जाने से बचाया जा सकेगा।
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पूर्वांचल के जिलों से आकाश की जनसभाओं की लगातार मांग हो रही है। बसपा ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल में चार सीटों पर जीत हासिल की थी। इनमें आजमगढ़ की लालगंज से संगीता आजाद और गाजीपुर से अफजाल अंसारी सांसद बने थे। घोसी से अतुल राय और जौनपुर से श्याम सिंह यादव भी जीतकर सांसद बने थे। पश्चिमी उप्र में भी चार सांसद बने थे।
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इनमें सहारनपुर से हाजी फजलुर्रहमान और बिजनौर से मलूक नागर शामिल थे। नगीना से गिरीश चंद्र और अमरोहा से कुंवर दानिश अली भी सांसद बने थे। तराई इलाके के श्रावस्ती से राम शिरोमणि वर्मा और अवध क्षेत्र रितेश पांडेय भी सांसद बने थे। हालांकि इसके बाद वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा का खाता भी नहीं खुल सका। इसी वजह से बसपा का फोकस पश्चिम और पूर्वांचल पर अधिक है। पूर्वांचल में बसपा नेता इंदु चौधरी लगातार पार्टी के लिए जमीन तैयार कर रही हैं तो पूर्व सांसद एवं बाहुबली नेता अतुल राय भी पार्टी को मजबूत करने में जुटे हैं।
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वजूद बचाने की जद्दोजहद
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा का खाता भी नहीं खुल सका। वर्तमान में बसपा का लोकसभा में कोई प्रतिनिधि नहीं है। राज्यसभा सांसद रामजी गौतम का कार्यकाल भी जल्द खत्म होने वाला है। उत्तर प्रदेश में बसपा के अकेले विधायक उमाशंकर सिंह का निधन हो चुका है। पार्टी का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा कई वर्षों से खतरे में है। चुनाव से पहले विपक्षी दलों के कई कद्दावर नेताओं को पार्टी में शामिल कराने की रणनीति पर भी काम जारी है।