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UP: मनमाना रवैया, अनबन और लापरवाही पड़ी आईएएस किंजल सिंह को भारी, छिनी परिवहन आयुक्त की कुर्सी; जानें वजह

नीरज 'अम्बुज', अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Mon, 20 Apr 2026 12:41 PM IST
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सार

उत्तर प्रदेश में आईएएस किंजल सिंह को सात महीने में परिवहन आयुक्त पद से हटा दिया गया। उन पर मनमाने रवैये, अधिकारियों से अनबन, लापरवाही और विभागीय तालमेल की कमी के आरोप लगे। उनकी जगह आशुतोष निरंजन को जिम्मेदारी दी गई है। फैसले के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं।

UP Arbitrary Conduct, Discord, and Negligence Prove Costly for IAS Kinjal Singh; Stripped of Post as Transpor
आईएएस किंजल सिंह - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

मनमाना रवैया, आला अफसरों से अनबन, लापरवाही, दूसरे विभागों में अनावश्यक हस्तक्षेप आईएएस किंजल सिंह को भारी पड़ गया। उन्हें महज सात महीने में ही परिवहन आयुक्त पद से हटा दिया गया। इस दैारान कोई भी बड़ा उल्लेखनीय कार्य उनके खाते में नहीं है। अब उनके हट जाने पर तमाम तरह की चर्चाएं सुर्खियों में है।

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प्रदेश सरकार ने 40 आईएएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। इसमें परिवहन आयुक्त पद पर तैनात रहीं किंजल सिंह को भी हटाया गया है। उनकी जगह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लैाटे आशुतोष निरंजन को जिम्मेदारी सैांपी गई है। सूत्र बताते हैं कि विभागीय तालमेल के अभाव के चलते वह रडार पर थीं। 
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अपने आला अफसरों अपर मुख्य सचिव व परिवहन मंत्री से उनकी नहीं बन रही थी। इतना ही नहीं तबादला नीति आने वाली है। ऐसे में तबादलों को लेकर विवाद खड़ा होने की आशंका जताई जा रही थी। एक आरटीओ, प्रशासन उनके बेहद करीबी हैं। 

जिनका स्थानांतरण तय माना जा रहा है। किंजल सिंह उन्हें बचाने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगाने को तैयार थीं, जबकि उनके विरोधी स्थानांतरण के लिए जीजान से लगे हुए हैं। हालांकि जब किंजल सिंह को परिवहन आयुक्त पद की जिम्मेदारी सैांपी गई तो विभाग में बदलाव की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। कार्यकाल के दैारान उनके कई फैसले संदेह के घेरे में रहे।

 

व्यवहार से परेशान थे मातहत

सूत्र बताते हैं कि किंजल सिंह के मातहत उनके व्यवहार से परेशान थे। उनकी गुडबुक में कुछ गिनेचुने अफसर थे। उनकी सूचनाओं पर ही वह निर्णय लेती थीं। पीड़ितों का पक्ष जानने-समझने में उनकी कोई रुचि नहीं थी। हालांकि उनके व्यवहार को लेकर किसी भी अफसर ने कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई है।

बेहद खास थे एक आरटीओ, हो गए मायूस

विभागीय अधिकारी बताते हैं कि आईएएस किंजल सिंह को परिवहन आयुक्त पद की जिम्मेदारी हटने के बाद विभाग में एक आरटीओ प्रशासन बेहद मायूस हैं। वह साये की तरह किंजल सिंह के साथ उपस्थित रहते थे। वह उनकी गुडबुक में थे और उनकी सूचनाओं पर ही वह निर्णय लेती थीं। ऐसे में उनके पद से हटने के बाद उपरोक्त आरटीओ प्रशासन पर तबादला नीति में गाज गिरने की आशंका जताई जा रही है।

बगैर जांच प्राइवेटकर्मियों पर गिराई गाज

प्रदेश में डीएल संबंधित कामकाज देखने वाले 320 प्राइवेटकर्मियों को दलाल बताकर हटाने का आदेश कर दिया गया। यह कर्मी पिछले डेढ़ दशक से विभाग में काम कर रहे थे। किंजल सिंह ने मामले की जांच तक नहीं करवाई। इस मामले में पीड़ित कर्मी लगातार गुहार लगाते रहे। लेकिन उनकी एक न सुनी गई। इतना ही नहीं नए कर्मियों की भर्ती में भ्रष्टाचार के मामले भी आए, लेकिन उन्होंने सुनवाई तक नहीं की।

 

निजी एजेंसियों पर थीं मेहरबान!

प्रदेश में डीएल प्रिंटिंग व डिलीवरी का काम तीन निजी एजेंसियों के पास है। फोकॅाम, रोजमार्टा व सिल्वर टच। इन कंपनियों पर कर्मचारियों से वसूली व शोषण के आरोप लगे। लेकिन परिवहन आयुक्त पद पर रहते हुए उन्होंने इस मामले को अनसुना किया। परिवहन मंत्री स्तर पर शिकायत के बाद उन्होंने 25 जिलों के डीएम को जांच के लिए लिखा, लेकिन उसकी रिपोर्ट दबा दी।

दूसरे विभागों में हस्तक्षेप पड़ा भारी

सूत्र यह भी बताते हैं कि परिवहन आयुक्त पद पर रहते हुए किंजल सिंह लगातार शिक्षा विभाग से स्कूली वाहनों के मामले में लेटरबाजी कर रही थीं। यह संबंधित विभाग के अफसरों, मंत्री को नागवार गुजरा। जबकि परिवहन विभाग स्कूली वाहनों के खिलाफ अभियान से लेकर उत्तर प्रदेश एकीकृत स्कूल वाहन प्रबंधन पोर्टल पर वाहनों का विवरण दर्ज करने में फिसड्डी साबित हुआ है।

बढ़ गए सड़क हादसे

किंजल सिंह के कार्यकाल के दैारान लखनऊ में सड़क हादसे भी बढ़ गए। हालांकि इसके लिए उन्हें सीधे तैार पर जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। पर, सड़क हादसों को रोकने के लिए अभियानों में शिथिलता बरती गई। अकेले लखनऊ में सिर्फ दो महीनों जनवरी-फरवरी में 342 हादसे हुए और 128 लोगों की जानें गईं।

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