UP: मणिपुर में CRPF जवान की मौत, लखनऊ में शव रखकर बवाल-हंगामा; पत्नी बोलीं- अधिकारियों की प्रताड़ना से गई जान
मणिपुर में तैनात सीआरपीएफ जवान की संदिग्ध मौत के बाद लखनऊ में परिजनों ने शव रखकर प्रदर्शन किया। पत्नी ने अधिकारियों पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए दोबारा पोस्टमार्टम, निष्पक्ष जांच, शहीद का दर्जा, सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता की मांग की। अधिकारियों के आश्वासन पर प्रदर्शन समाप्त हुआ।
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मणिपुर में तैनात सीआरपीएफ जवान विनीत सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद बृहस्पतिवार देर रात लखनऊ के बुद्धेश्वर स्थित आदर्श विहार कॉलोनी में परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही परिजनों और स्थानीय लोगों ने शव सड़क पर रखकर दुबग्गा से अवध चौराहे जाने वाले मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया।
करीब पांच घंटे तक चले प्रदर्शन में दोबारा पोस्टमार्टम, निष्पक्ष जांच, शहीद का दर्जा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता की मांग उठाई गई। जाम के चलते दुबग्गा से कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर जाने वाला यातायात भी प्रभावित रहा।
विनीत सिंह (37) मणिपुर में सीआरपीएफ की 112वीं बटालियन में तैनात थे। देर रात पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही परिजन बिलख पड़े और मौत को संदिग्ध बताते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया।
पत्नी ने लगाया प्रताड़ना का आरोप
जवान की पत्नी नेहा सिंह ने आरोप लगाया कि उनके पति को विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था, जिसके चलते उन्होंने गोली मारकर आत्महत्या कर ली। उन्होंने कहा कि पति के माथे पर गोली लगी थी, लेकिन मणिपुर में हुए पोस्टमार्टम से परिवार संतुष्ट नहीं है। उन्होंने लखनऊ में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे मौत की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।
भारी पुलिस बल तैनात, पांच घंटे बाद खत्म हुआ प्रदर्शन
सूचना मिलते ही एडीसीपी पश्चिमी धनंजय कुशवाहा, एसीपी काकोरी शकील अहमद, आईपीएस अमित कुमावत समेत कई थानों की पुलिस और पीएसी मौके पर पहुंच गई। अधिकारियों ने काफी देर तक परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन परिजन मांगों पर ठोस आश्वासन मिलने तक डटे रहे।करीब पांच घंटे बाद अधिकारियों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्ष जांच कराने और परिजनों का ज्ञापन जिलाधिकारी तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
इसके बाद पत्नी नेहा सिंह ने जिलाधिकारी के नाम संबोधित ज्ञापन एडीसीपी पश्चिमी को सौंपा, जिसमें दोबारा पोस्टमार्टम, निष्पक्ष जांच, सरकारी नौकरी, आर्थिक सहायता और शहीद का दर्जा देने की मांग की गई।
आश्वासन मिलने के बाद परिजन शव लेकर हरदोई के लिए रवाना हो गए, जहां शुक्रवार को पैतृक गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।इंस्पेक्टर सुरेश सिंह ने बताया कि परिजनों की मांगों से शासन को अवगत करा दिया गया है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मौत से 11 मिनट पहले हुई थी आखिरी बातचीत
नेहा सिंह के मुताबिक विनीत सिंह का 23 जून को मणिपुर स्थित सीआरपीएफ की 112वीं बटालियन में तबादला हुआ था। 5 अगस्त की शाम 7:36 बजे उनकी पति से आखिरी बार बात हुई थी। बातचीत में उन्होंने बुखार और अन्य मौसमी बीमारियों से परेशान होने के साथ कैंप में हाल ही में हुई गोलीबारी की घटना के बाद तनाव में होने की बात कही थी। उन्होंने यह भी बताया था कि छुट्टी मांगने के बावजूद उन्हें अवकाश नहीं मिला।
पत्नी का दावा है कि बातचीत के महज 11 मिनट बाद शाम 7:47 बजे सीआरपीएफ अधिकारियों की व्हाट्सएप कॉल आई, जिसमें बताया गया कि विनीत सिंह कैंप परिसर में बैरक के पीछे गंभीर रूप से घायल मिले हैं। बाद में उनकी मौत की सूचना दी गई। पत्नी ने कमांडेंट समेत अन्य अधिकारियों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
2009 में हुए थे भर्ती
विनीत सिंह वर्ष 2009 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। पहली तैनाती प्रशिक्षण के लिए केरल में हुई थी। परिवार में पत्नी नेहा सिंह और बेटा रुद्र हैं। परिवार पिछले पांच वर्षों से बुद्धेश्वर स्थित आदर्श विहार कॉलोनी में अपने मकान में रह रहा था।