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UP: वजूद पर संकट... फिर भी तेवर बरकरार, मायावती ने कार्यकर्ताओं में भरा जोश, दोहराया संकल्प

अशोक मिश्रा, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 16 Jan 2026 08:48 AM IST
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सार

बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने जन्मदिन के अवसर पर एक बार फिर अपने संकल्पों को दोहराया और कहा कि मैं कभी झुकने वाली नहीं हूं और किसी दबाव या लालच में पार्टी के मूवमेंट से पीछे नहीं हटूंगी।

UP: Existence threatened... yet the attitude remains intact, Mayawati energizes workers, reiterates resolve
बसपा सुप्रीमो मायावती। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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बसपा भले ही अपना अस्तित्व बचाने को जूझ रही हो, लेकिन बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने 70वें जन्मदिन पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों में जोश भरने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। उन्होंने दलितों समेत उपेक्षित वर्गों के मान-सम्मान के लिए अपनी जिंदगी समर्पित करने का दावा करते हुए कहा कि जब तक मैं जिंदा रहूंगी, मेरा संघर्ष जारी रहेगा।

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मायावती ने खुद की सेहत सही होने और बसपा संस्थापक कांशीराम का एकमात्र उत्तराधिकारी होने का जिक्र करके साफ कर दिया पार्टी को कमजोर करने की साजिशों का वह मुकाबला करने में सक्षम हैं। खासकर विरोधी दलों द्वारा बसपा को खत्म करने की साजिशों के साथ पार्टी में बीते दिनों गुटबाजी करने वाले कुछ पदाधिकारियों को भी उन्होंने सख्त संदेश दिया कि पार्टी की कमान उनके मजबूत हाथों में ही रहेगी। उन्होंने कहा कि मैं कभी झुकने वाली नहीं हूं और किसी दबाव या लालच में पार्टी के मूवमेंट से पीछे नहीं हटूंगी। इस कार्य में पार्टी के लोग भी मुझे निराश नहीं करेंगे।
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उन्होंने अपने मूल दलित वोट बैंक के साथ उन जातियों का जिक्र भी किया जो बीते कुछ दिनों से सियासी चर्चाओं में हैं। बता दें कि बसपा का सोशल इंजीनियरिंग का यह फॉर्मूला उसे चुनाव में सफलता भी दिला चुका है। मायावती के संबोधन में उनकी आयरन लेडी की छवि नजर आई, जो कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भर सकती है।

सपा का पीडीए देखता रह जाएगा
उन्होंने सपा के पीडीए पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछड़े वर्गों का भी आरक्षण का लाभ सपा सरकार में इनका खुद का समाज ही उठाता रहा। मुस्लिम समाज भी उपेक्षित रहा है। भरोसा जताया कि दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक समाज का वोट इस बार पहले से कहीं ज्यादा बसपा को ही मिलेगा और सपा का पीडीए देखता रह जाएगा। जातियों को बसपा के साथ जोड़ने की उनकी यह कवायद क्या असर दिखाती है, इसका नतीजा अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा।

कई दिक्कतों से जूझ रही बसपा
बसपा वर्तमान में कई दिक्कतों से जूझ रही है। राष्ट्रीय पार्टी का तमगा खतरे में है तो राज्यसभा में भी इस बार उनकी उपस्थिति नहीं रहेगी। विधानसभा में भी बसपा के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह हैं। इन हालात में पार्टी को अपना वजूद बचाने के लिए अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजरना पड़ रहा है। हालांकि बसपा ने अन्य राज्यों के निकाय चुनाव में सफलता हासिल की है। पार्टी ने प्रदेश में भी अपने जनाधार को बढ़ाया है। मायावती ने कई राज्यों में प्रभारी और प्रदेश अध्यक्षों को भी बदला है।

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