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UP: जांच आयोग की रिपोर्ट में खुलासा, संभल हिंसा सुनियोजित साजिश का नतीजा, सांसद बर्क समेत कई नेताओं की भूमिका

Wed, 05 Aug 2026 03:13 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ
डिजिटल डेस्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Wed, 05 Aug 2026 03:13 PM IST
सार

जांच आयोग ने संभल हिंसा को पूर्व नियोजित साजिश बताते हुए कई नेताओं और मस्जिद प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारियों की भूमिका का उल्लेख किया है। रिपोर्ट के अनुसार चारों मृतकों की मौत पुलिस की गोली से नहीं हुई। आयोग ने पुलिस कार्रवाई को प्रभावी बताते हुए भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए सुझाव भी दिए।

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UP: Inquiry commission report reveals Sambhal violence was the result of a pre-planned conspiracy; roles of se
संभल हिंसा। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा पूर्व नियोजित साजिश का परिणाम थी। भीड़ को भड़काने, गलत जानकारी फैलाने और हिंसा की पृष्ठभूमि तैयार करने में संभल के सांसद जिया-उर-रहमान बर्क, विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहेल इकबाल और  जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के पदाधिकारियों की भूमिका रही। यह निष्कर्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में दिया है।

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आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक 19 नवंबर को अधूरा सर्वे होने के बाद से ही माहौल को तनावपूर्ण बनाने की तैयारी शुरू हो गई थी। आरोपियों ने मुस्लिम समुदाय के बीच यह भ्रम फैलाया कि सर्वे के बहाने मस्जिद पर कब्जा करने या उसे ध्वस्त करने की कोशिश की जा रही है। जबकि अदालत के आदेश में केवल प्राचीन स्मारक अधिनियम के तहत रखरखाव और आम जनता के प्रवेश से जुड़े बिंदुओं पर ही विचार किया जाना था।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि 24 नवंबर की सुबह बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के आसपास एकत्र हो गए। इसके बाद नारेबाजी, पथराव, गोलीबारी और आगजनी की घटनाएं हुईं। भीड़ में शामिल कई लोगों ने अपने चेहरे ढके हुए थे। आयोग ने जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली, सचिव मशहूद अली फारूकी और कमेटी के अन्य पदाधिकारियों की भूमिका का भी उल्लेख किया है।

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पुलिस की गोली से नहीं हुई थी मौत

हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी। आयोग ने पोस्टमार्टम और बैलिस्टिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चारों की मौत पुलिस की गोलियों नहीं हुई थी। मृतकों के परिजनों ने भी अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए थे।रिपोर्ट के मुताबिक ,हिंसा में 28 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें सात को गोली लगी। एसपी संभल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी घायल हुए। उपद्रवियों ने पुलिस के हथियार और अन्य सामान लूटने का भी प्रयास किया।

पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई प्रभावी

आयोग ने जिला प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई को प्रभावी बताते हुए कहा कि पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग और संयमित कार्रवाई के कारण हिंसा को व्यापक सांप्रदायिक दंगे में बदलने से रोक लिया गया। पुलिस ने घातक हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया, जिससे प्रदेश में बड़े स्तर पर तनाव फैलने की आशंका टल गई।

पुरानी घटनाओं का भी जिक्र

रिपोर्ट में संभल के सांप्रदायिक हिंसा के इतिहास का भी उल्लेख किया गया है। आयोग ने कहा कि शहर पहले भी कई बार सांप्रदायिक हिंसा का गवाह रहा है, जिसमें 1978 का दंगा सबसे अधिक विनाशकारी था। आयोग ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कई सुझाव देते हुए कहा कि अदालत के आदेशों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है और भीड़ के माध्यम से कानून को चुनौती देने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

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