UP: उम्मीदवार चयन पर उठे सवालों पर मायावती का पलटवार, बोलीं- मिशन-2027 की तैयारी से घबराए विरोधी
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख ने उम्मीदवार चयन और आर्थिक सहयोग को लेकर उठे सवालों को पार्टी को बदनाम करने की साजिश बताया। उन्होंने कहा कि विरोधी दल और कुछ वर्ग दुष्प्रचार फैला रहे हैं। कार्यकर्ताओं से अफवाहों से दूर रहने की अपील करते हुए मिशन-2027 की तैयारियों पर जोर दिया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने पार्टी के उम्मीदवार चयन और आर्थिक सहयोग को लेकर उठ रहे सवालों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बसपा को बदनाम करने के लिए विरोधी दल और मीडिया का एक वर्ग सुनियोजित तरीके से दुष्प्रचार कर रहा है। चुनाव नजदीक आते ही ऐसी गतिविधियां बढ़ जाती हैं, जिनका मकसद बसपा के बढ़ते जनाधार और संगठनात्मक मजबूती को नुकसान पहुंचाना होता है।
सोशल मीडिया पर शुक्रवार को जारी बयान में मायावती ने कहा कि बसपा बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों पर चलने वाली ऐसी पार्टी है, जो बड़े पूंजीपतियों या धनकुबेरों के इशारों पर नहीं, बल्कि अपने समर्थकों के सहयोग और समर्पण के बल पर आगे बढ़ती है।
जैसाकि सर्वविदित है कि बी.एस.पी. देश में ’बहुजन समाज’ व अपरकास्ट समाज के ग़रीब शोषित-पीड़ित व उपेक्षितों द्वारा, उनके संवैधानिक हक़ व न्याय आदि के लिये परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के बताये रास्तों पर चलने वाली ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सच्ची व ईमानदार…
विज्ञापन — Mayawati (@Mayawati) June 19, 2026
पूंजीवादी ताकतों को बसपा की मजबूती रास नहीं आती
यही वजह है कि संकीर्ण, जातिवादी और पूंजीवादी ताकतों को बसपा की मजबूती रास नहीं आती। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार चयन को लेकर जानबूझकर भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि पार्टी में चयन प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और गंभीरता के साथ होती है।
मायावती ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल समेत पार्टी के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारी और कार्यकर्ता मिशन-2027 को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत से जुटे हैं।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे विरोधियों के प्रायोजित दुष्प्रचार और अफवाहों से भ्रमित न हों। बसपा प्रमुख ने दावा किया कि पार्टी की बढ़ती तैयारियों और जनसमर्थन को देखकर विरोधी दलों की बेचैनी बढ़ गई है, इसलिए वे लगातार भ्रामक अभियान चला रहे हैं।