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UP: सड़क दुर्घटना में तीन या अधिक मौतों पर माना जाएगा स्पेशल रिपोर्ट केस, पढ़ें डीजीपी का नया आदेश

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Fri, 17 Apr 2026 07:20 PM IST
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सार

प्रदेश में सड़क दुर्घटना में तीन या अधिक मौत होने पर मामला स्पेशल रिपोर्ट केस माना जाएगा। डीजीपी ने जांच में लापरवाही रोकने और मौतों में कमी लाने के निर्देश दिए हैं। अब बीमा, फिटनेस, लाइसेंस, ओवरस्पीड, सीसीटीवी और दुर्घटना कारणों की गहन जांच होगी।

UP: Road Accidents Resulting in Three or More Deaths to Be Treated as 'Special Report Cases' — Read the DGP's
राजीव कृष्ण, डीजीपी यूपी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

प्रदेश में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में तीन या उससे अधिक मौतें होने पर उसे स्पेशल रिपोर्ट केस मानते हुए पुलिस मुख्यालय को रिपोर्ट भेजनी होगी। डीजीपी राजीव कृष्ण ने इस बाबत दिशा-निर्देश जारी करने के साथ ऐसे मामलों की जांच में वरिष्ठ अधिकारियों को विवेचकों का सहयोग करने को कहा है, ताकि दोषियों को दंडित कराया जा सके। यह कवायद सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या में 50 फीसद कमी लाने के शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुपालन में की गई है।

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दरअसल, ऐसे मामलों की जांच में सामने आया है कि इनकी विवेचना को अपेक्षित महत्व नहीं दिया जाता है। वरिष्ठ अधिकारियों के पर्यवेक्षण के अभाव में विवेचनाओं की कमियों की वजह से मृतकों के आश्रितों को बीमा का भुगतान मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। 
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डीजीपी ने ऐसे प्रकरणों की विवेचना में कुछ बिंदुओं का खास ध्यान रखने को कहा है, जिनमें विवेचना के दौरान वाहन स्वामी और चालक का सही नाम-पता केस डायरी में दर्ज करना, वाहन का नियम विरुद्ध मॉडिफिकेशन, बीमा, फिटनेस, प्रदूषण और रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण एवं वैधता का केस डायरी में जिक्र करना आदि शामिल है।

 

इन बिंदुओं का भी रखना होगा ध्यान

  • दुर्घटना का कारण क्या रहा है। जैसे तीव्र मोड़, सड़क का खराब होना, अवैध कट होना आदि।
  •  दुर्घटना के समय चालक का शराब या अन्य मादक पदार्थ का सेवन करना। उसका मेडिकल कराना।
  • वाहन चालक के लाइसेंस के निरस्तीकरण की कार्रवाई और उसका विवरण केस डायरी में दर्ज करना।
  • आरसी निरस्तीकरण और निलंबन की रिपोर्ट देना।
  • परमिट की शर्तों का उल्लंघन करने पर निरस्तीकरण की रिपोर्ट देना।
  • वाहन में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट होना अथवा नहीं।
  • वाहन स्वामी का मोबाइल नंबर वाहन के विवरण में अपडेट होना।
  • वाहन का तकनीकी परीक्षण निरीक्षक, उपनिरीक्षक, एमटी द्वारा मौके पर जाकर करना।
  • दुर्घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी चेक करना।
  • ओवरस्पीड, ओवरलोड आदि की जानकारी।
  • भारी वाहन नियमानुसार सड़क के बांयी तरफ चल रहा था कि नहीं।
  • वाहन चालक अवयस्क तो नहीं था। वह नींद में तो नहीं था।
  • सीट बेल्ट और हेलमेट धारण किया था कि नहीं।
  • रांग साइड में ड्राइविंग तो नहीं कर रहा था।
  • दुर्घटनास्थल पूर्व में ब्लैकस्पॉट चिन्हित था कि नहीं। चिन्हित था तो संबंधित विभाग ने क्या सुधार किया।




 

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