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ग्राउंड रिपोर्ट: जेवर एयरपोर्ट बना तो मिले मुआवजे का सच, एक ही दिन में एक गांव में आ गईं 21 स्कॉर्पियो

अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Tue, 21 Apr 2026 09:48 AM IST
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सार

रौनेरा में किराना स्टोर संचालक अतुल कुमार का कहना था कि पैसा बैंक में जमा कर दिया। उससे घर और खेत खरीदे हैं। कुछ पैसा बचाकर रखा है। दयायनतपुर गांव के हंसराज को सात साल पहले 25 बीघा जमीन के एवज में करीब 9.5 करोड़ रुपये का मुआवजा मिला। उन्होंने ट्रैक्टर, कमर्शियल वाहन और छोटे उद्योगों में भी पैसा लगाया गया, ताकि स्थायी आय का स्रोत बन सके।

Compensation Reality Received Following Jewar Airport Project 21 Scorpio Arrive in Single Village in One Day
Jewar Airport - फोटो : Delhi Noida International Airport via X/@dr_maheshsharma
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विस्तार

समृद्धि के साथ बेरोजगारी की यारी देखनी हो तो जेवर एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण से मिले मुआवजे की पड़ताल कर लीजिए। जिन गांवों में दोपहिया वाहनों का टोटा था, वहां चार पहिया गाड़ियां बैलगाड़ियों की तरह भाग रही हैं।
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उधर करोड़ों का मुआवजा मिला तो इधर अकेले दयानतपुर और रानेरा गांव में ही एक दिन में 21 स्कॉर्पियो की फ्लीट आ गई। रबूपुरा जैसे कस्बे में रात 09 के बाद भले खाना तलाश करना पड़े, लेकिन आईफोन आसानी से मिल जाएगा। विस्थापितों की आर एंड आर कॉलोनी में हुक्का गुड़गुड़ाते युवा मिल जाएंगे। 
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आज शान की जिंदगी जी रहे हैं

पूछने पर बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हैं, लेकिन हाथ में महंगे फोन और महंगी कारों की चाबियों ने 18-25 हजार की नौकरी के लिए हाथ बांध दिए हैं। हर किसी ने अचानक आई संपत्ति को फिजूलखर्ची में नहीं उड़ाया और आज वे शान की जिंदगी जी रहे हैं।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए जेवर क्षेत्र में की गई जमीन अधिग्रहण ने किसानों को आर्थिक स्थिति को पूरी तरह से बदल दिया है। दो चरणों में कुल 2,420 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया, जिसके बदले में लगभग 7,000 किसानों को 8,016 करोड़ का मुआवजा मिला। पहले चरण में 1,334 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया। 

जमीन अधिग्रहण में ये गांव शामिल

इसमें रोही, परोही, दयानंतपुर, रौनेरा, बनवारी बांस और किशोरपुर गांव शामिल थे। यहां के किसानों को लगभग 3,688 करोड़ का मुआवजा मिला। दूसरे चरण में 1,187 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन का अधिग्रहण किया गया, जिसमें रौनेरा, कुरैब, करावली बांगर, दयानतपुर और मुधराह गांवों के लगभग 4,000 किसान शामिल थे। 

उन्हें कुल 4,328 करोड़ का मुआवजा मिला। यमुना सिटी के रीयल इस्टेट ब्रोकर अंशुमान प्रधान ने बतया कि ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने का विचार जब पहली बार सामने आया था, तब जेवर के गांवों के कई किसान भविष्य को लेकर असमंजस में थे लेकिन स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है।

 

करोड़ों आए, पर उड़ाए नहीं

इस उछाल का फायदा उन किसानों को भी मिला, जिन्होंने अपनी कुछ जमीन बचाए रखी या आसपास नई जमीन खरीदी। कई लोगों ने मुआवजे की रकम को नई जमीन में निवेश किया, जबकि कुछ ने इसे बैंक जमा, बच्चों की शिक्षा और घर बनाने में लगाया। रबूपुरा में मोबाइल की दुकान चलाने वाले सुमित सिंह ने बताया कि शुरु में पैसा खर्च हुआ लेकिन फिर घर बनाया। तीन बच्चे निजी स्कूल में पढ़ रहे हैं। 40 किमी दूर 12 बीघा जमीन भी ले ली है। 

...और कुछ नौकरी के इंतजार में

एयरपोर्ट के लिए सात गांवों के विस्थापितों के लिए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (पीठा) ने आर एंड आर (रोहैबिलिटेशन एंड रीसेटरमेंट) कालोनी विकसित की गई है। जल भराव जैसी समस्याएं छोड़ दें पाश इलाकों के कालोनियों की तरह ये शानदार है। हुक्का गुड़गुड़ाते शोएब आलम, पासीन और गौरव सिंह ने बताया कि रोजगार नहीं है क्या करें? 

यीडा के वरिष्ठ अधिकारी का कहना था कि जमीन अधिग्रहण के एवज में मुआवजे के साथ नौकरी या 5.50 लाख रुपये का प्रावधान था। जिन्होंने नौकरी का विकल्प चुना, उन्होंने भी नौकरी नहीं की क्योंकि आठवीं, हाईस्कूल या इंटर पास के लिए एयरपोर्ट में ग्राउंड स्टाफ की ही नौकरी मिलेगी, जिसकी सेलरी 18 से 25 हजार होगी। ग्रेजुएट कोई हुआ तो 28 हजार तक मिल जाएगी। युवा चतुर्थ श्रेणी की नौकरी करना नहीं चाहते।

किसान मनवीर सिंह ने बताया कि मुआवजे में भेदभाव किया गया। करोड़ों की जमीनें बेहद सस्ते में ली गईं। उसमें भी जो वादे सरकार ने किए थे, उनमें भी तमाम को पूरा नहीं किया। खेत-खलिहान छोड़कर धरने पर बैठने को मजबूर हैं।

किसान नेता पिंटू त्यागी ने बताया कि एक से डेढ़ करोड़ रुपए बीघा वाली जमीन 4300 रुपये मीटर में ली जा रही है। नौकरी का वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ। खेत चले गए और घर के युवा बेरोजगार घूम रहे हैं।
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