सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Tensions with Gulf countries have had a direct impact on the state, halting exports of leather, readyma

यूपी: खाड़ी देशों के तनाव का प्रदेश पर पड़ा सीधा असर, रुक गया चमड़ा, रेडीमेड और मीट सहित इन चीजों का निर्यात

अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 03 Mar 2026 09:43 AM IST
विज्ञापन
सार

Iran war: ईरान संकट के बीच खाड़ी देशों में चल रहे तनाव का सीधा असर यूपी के निर्यात पर पड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक इसमें छह हजार करोड़ का  नुकसान हो सकता है। 

UP: Tensions with Gulf countries have had a direct impact on the state, halting exports of leather, readyma
ईरान संकट का असर यूपी के बाजार पर। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब उत्तर प्रदेश के निर्यातकों पर भी दिखने लगा है। राज्य का सालाना कुल निर्यात लगभग 1.86 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है, जिसमें खाड़ी देशों की हिस्सेदारी सीमित लेकिन अहम है। निर्यातकों का कहना है कि यदि क्षेत्रीय संघर्ष लंबा खिंचता है तो लॉजिस्टिक लागत, ऑर्डर और भुगतान चक्र प्रभावित हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक निर्यात संयुक्त अरब अमीरात को होता है। उपलब्ध व्यापार आंकड़ों के अनुसार राज्य से यूएई को सालाना लगभग 5,000 से 6,000 करोड़ के उत्पाद भेजे जाते हैं। यह यूपी के कुल निर्यात का लगभग 5-6 प्रतिशत हिस्सा है।

Trending Videos


चर्म निर्यात परिषद के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष जावेद इकबाल के मुताबिक यूएई को मुख्य रूप से रेडीमेड गारमेंट्स, चमड़ा और लेदर उत्पाद (कानपुर क्लस्टर), बासमती चावल, हैंडीक्राफ्ट (मुरादाबाद पीतल उत्पाद) और इलेक्ट्रॉनिक सामान निर्यात किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त सऊदी अरब, कतर, ओमान, कुवैत और बहरीन को भी यूपी से कृषि उत्पाद, मीट उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान और निर्माण सामग्री भेजी जाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

इन सेक्टरों पर ज्यादा खतरा

लेदर उद्योग (कानपुर-उन्नाव) : खाड़ी बाजार पर निर्भरता के कारण ऑर्डर घटने का जोखिम।
कृषि व खाद्य प्रसंस्करण : भुगतान चक्र में देरी का असर।
एमएसएमई निर्यातक : शिपिंग बीमा और मालभाड़ा बढ़ने से मार्जिन घट सकता है।

तेल महंगा तो लागत बढ़ेगी

कंटेनर कारोबारी मोहम्मद शिराज के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ीं हैं तो फैक्ट्री संचालन लागत, माल ढुलाई खर्च, कंटेनर शिपिंग चार्ज, निर्यात प्रतिस्पर्धा पर पड़ेगा। बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यातकों पर असर सीमित रह सकता है, लेकिन छोटे और मध्यम उद्योगों पर दबाव अधिक रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्रीय हालात जल्दी सामान्य हो जाते हैं तो निर्यात पर असर सीमित रह सकता है। लेकिन लंबा तनाव रहने पर ऑर्डर में अस्थायी गिरावट, भुगतान में देरी, लॉजिस्टिक बाधाएं, निर्यात लागत में वृद्धि हो सकती है।

संकट लंबा चला तो निर्यात में 3–8% तक गिरावट की आशंका

UP: Tensions with Gulf countries have had a direct impact on the state, halting exports of leather, readyma
ईरान संकट। - फोटो : अमर उजाला
फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन के एके श्रीवास्तव ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव यदि लंबा खिंचता है तो उत्तर प्रदेश के निर्यात पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह का असर पड़ सकता है। आशंका है कि खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बनी रहने पर यूपी के कुल निर्यात में 3 से 8 प्रतिशत तक अस्थायी गिरावट आ सकती है।

संभावित आर्थिक असर
1-तनाव 1–2 महीने में सामान्य हुआ तो शिपिंग लागत 5–7% बढ़ेगी। ऑर्डर अस्थायी रूप से धीमे होने पर निर्यात पर 2–3% प्रभाव।
2-तनाव 6 माह तक जारी रहा तो समुद्री बीमा व मालभाड़ा 10–20% महंगा होगा। छोटे निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा घटेगी और निर्यात में 5–8% तक कमी आ सकती है। भुगतान चक्र 30–60 दिन तक खिंच सकता है।
3- तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हुआ तो परिवहन लागत बढ़ने से उत्पादन लागत 4–6% तक बढ़ सकती है। एमएसएमई सेक्टर पर गंभीर दबाव होगा।


 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed