{"_id":"69bb72ed3c3b505e5105e69e","slug":"up-the-heat-of-the-iran-crisis-has-reached-kitchens-with-edible-oil-becoming-costlier-by-10-these-prices-2026-03-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपी: रसोई घरों तक पहुंची ईरान संकट की आंच, 10 रुपये महंगा हुआ खाने वाला तेल; इनके दाम भी बढ़ेंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी: रसोई घरों तक पहुंची ईरान संकट की आंच, 10 रुपये महंगा हुआ खाने वाला तेल; इनके दाम भी बढ़ेंगे
अभिषेक गुप्ता अमर उजाला, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Thu, 19 Mar 2026 09:22 AM IST
विज्ञापन
सार
Iran crisis: ईरान में चल रहे संकट का असर यूपी की रसोई घरों तक पहुंच रहा है। गैस सिलिंडर के बाद अब खाने वाले तेल के दाम बढ़ गए हैं।
ईरान संकट का असर।
- फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन
विस्तार
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब आम आदमी की रसोई तक पहुंच गया है। कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव के कारण देश में खाद्य तेलों की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। पिछले 10 दिनों में रिफाइंड और सरसों तेल के दाम थोक बाजार में 7 से 12 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात ऐसे ही बने रहे तो कीमतों में और तेजी आ सकती है।
Trending Videos
हालिया वैश्विक घटनाक्रम के चलते क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। इससे बायोडीजल उत्पादन फिर से लाभदायक हो गया है। इंडोनेशिया, मलेशिया, अमेरिका और अर्जेंटीना जैसे बड़े उत्पादक देश अब खाद्य तेलों का इस्तेमाल ईंधन बनाने में अधिक कर रहे हैं, जिससे खाने वाले तेलों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बायोडीजल की दौड़ से घटा पाम ऑयल
इंडोनेशिया ने बायोडीजल मिश्रण को 40% से बढ़ाकर 50% (बी50) करने की दिशा में तेजी दिखाई है। इससे पाम ऑयल का बड़ा हिस्सा घरेलू ईंधन खपत में जा रहा है और निर्यात घट रहा है। परिणामस्वरूप वैश्विक बाजार में पाम ऑयल की कमी और कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। पाम ऑयल महंगा होने से रिफाइंड तेल की लागत बढ़ी है, वहीं सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के दाम भी चढ़ गए हैं। भारत जैसे आयात-निर्भर देश में इसका असर और अधिक दिखाई दे रहा है।
युद्ध और मालभाड़ा भी जिम्मेदार
मध्य-पूर्व संघर्ष के कारण शिपिंग रूट प्रभावित हुए हैं, जिससे मालभाड़ा करीब 25% तक बढ़ गया है। इसके अलावा कोयले की कीमतों में 50%, प्लास्टिक पैकेजिंग में 60% तक वृद्धि और टिन व अन्य पैकिंग सामग्री के महंगे होने से उत्पादन लागत पर दबाव बढ़ा है। डॉलर की मजबूती ने आयात लागत को और बढ़ा दिया है। कुल मिलाकर खाद्य तेल उद्योग की लागत में 20-25% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
बाजार में तेजी का असर
थोक कारोबारियों के अनुसार सरसों तेल का भाव 132 रुपये से बढ़कर 140 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं देश के कई हिस्सों में सूरजमुखी और अन्य तेलों के दाम 10-15 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं। उत्तर प्रदेश खाद्य तेल खपत के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में है। यहां सालाना खपत लगभग 500 करोड़ लीटर है। औसतन 10 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि से उपभोक्ताओं पर करीब 5000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है। प्रदेश में करीब 35 बड़े तेल प्लांट सक्रिय हैं, जो देशभर में आपूर्ति करते हैं।