UP: गोमती को बचाने वाला 'एसटीपी' ही कर रहा नदी को प्रदूषित; यूपीपीसीबी की जांच में दूषित निकला शोधित पानी
गोमती को प्रदूषण से बचाने के लिए हैदर कैनाल पर बना 120 एमएलडी क्षमता का एसटीपी जांच में फेल हो गया है। यूपीपीसीबी की रिपोर्ट में शोधित पानी भी दूषित पाया गया। फीकल कालीफार्म अधिक मिलने पर जल निगम को नोटिस की चेतावनी दी गई है।
विस्तार
गोमती नदी का प्रदूषण दूर करने के लिए हैदर कैनाल नाले पर बना 120 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट जांच में फेल निकला है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी ) की जांच में पता चला है कि जिस पानी को एसटीपी से पूरी तरह शोधित बताकर छोड़ा जा रहा है, वह प्रदूषित है। ऐसे में करीब 300 करोड़ रुपये खर्च कर बनाया गया एसटीपी एक साल में ही फेल हो रहा है। हालांकि, जल निगम ने पीसीबी की जांच पर सवाल उठाया है।
इस एसटीपी का संचालन बीते साल 15 अगस्त को शुरू हुआ था। उस समय जल निगम ने कहा था कि हैदर कैनाल में करीब 200 एलएलडी सीवर और नाले का पानी आता है, जिसमें से 100 एमएलडी सीवर पहले से बने पंपिंग स्टेशन से पंप कर भरवारा एसटीपी भेजा जा रहा है। शेष 100 एमएलडी सीवर नए एसटीपी से शोधित होगा। ऐसे में गोमती में हैदर कैनाल से होने वाला प्रदूषण शून्य हो जाएगा, लेकिन यूपीपीसीबी की जांच रिपोर्ट इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीसीबी ने जल निगम को लिखा पत्र
जांच के बाद यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी जेपी मौर्य ने जल निगम के अधिशासी अभियंता निर्माण खंड द्वितीय को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि हैदर कैनाल एसटीपी का संचालन मुंबई की कंपनी सापूरजी पालनजी एंड कंपनी कर रही है। इसकी जांच के लिए 13 जनवरी को एसटीपी से गोमती में छोड़े जा रहे पानी के नमूने लिए गए थे।
राज्य बोर्ड की लखनऊ स्थित केंद्रीय प्रयोगशाला में जांच कराने पर 22 जनवरी को जो रिपोर्ट आई, उसमें फीकल कालीफार्म की मात्रा तय मानक से अधिक पाई गई है। यह प्रदूषण निवारण अधिनियम के तहत शर्तों का उल्लंघन है। यदि सुधार नहीं किया गया तो कार्रवाई की जाएगी। जिसकी जिम्मेदारी जल निगम की होगी।
इसलिए निकला दूषित मिला पानी
जेपी मौर्य का कहना है कि शोधित पानी इसलिए दूषित निकला है, क्योंकि फीकल कालीफार्म में बैक्टीरिया पाया गया है। यह बैक्टीरिया प्लांट में यूबी सिस्टम (अल्ट्रा वायलेट) के सही से काम न करने के कारण मिला है। यूबी सिस्टम इसलिए होता है कि शोधित पानी में कोई बैक्टीरिया न रहे। हालांकि, उन्होंने प्लांट को बिजली खर्च बचाने के लिए बीच-बीच में बंद किए जाने की संभावना से इन्कार किया।
जल निगम ने कहा- आईआईटी की जांच में तो सही मिला पानी
इधर, जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर अतहर कादरी का कहना है कि नवंबर में आईआईटी रुड़की से जांच कराई गई, उसमें शोधित पानी मानक के तहत पाया गया था। अब पीसीबी की जांच में कैसे गड़बड़ी मिली, इस बारे में उनके क्षेत्रीय अधिकारी से बात की जाएगी कि उन्होंने कहां से नमूने लिए और जांच रिपोर्ट का आधार क्या है। यह भी कहा कि यूबी प्लांट सही से काम कर रहा है। प्लांट अभी नया है तो खराब होने का सवाल नहीं।
यूपीपीसीबी की जांच सही है कि नहीं
जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर अतहर कादरी ने बताया कि यूपीपीसीबी की जांच सही है कि नहीं, यह अलग बात है, मगर उनकी रिपोर्ट के आधार पर एसटीपी का संचालन करने वाली निजी कंपनी को नोटिस जारी किया जाएगा।
