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सुना है क्या: 'छींका टूटने का इंतजार', साथ ही 'आदेश का इंतजार और जेन-जी के तेवर से बैकफुट पर मुखिया' के किस्से

Tue, 28 Jul 2026 09:21 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Tue, 28 Jul 2026 09:21 AM IST
सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

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Waiting for chhinka to break along with mukhiya being pushed onto back foot by attitude of Gen-Z
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'छींका टूटने का इंतजार' की कहानी। इसके अलावा 'हर पल आदेश का इंतजार' और 'जेन-जी का तेवर देख बैकफुट पर मुखिया' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

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छींका टूटने का इंतजार

दशहरे तक नौकरशाही में बड़े फेरबदल होने हैं लेकिन सबसे ज्यादा नजरें एक कद्दावर नौकरशाह के रिटायरमेंट पर हैं। चूंकि उनके पास बेहद महत्वपूर्ण महकमे हैं। ऐसे में उन पर काबिज होने के लिए जोड़-तोड़ चालू हो गई है। कल कारखाने से जुडे़ विभाग का मुखिया बनने की दौड़ में कई अधिकारी हैं। लाजमी है कि अंदरखाने घनघोर राजनीति भी चल रही है। ब्यूरोक्रेसी के गलियारों में चर्चा है कि दौड़ दिल्ली तक है।

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हर पल आदेश का इंतजार

पुलिस महकमे में एक वरिष्ठ अधिकारी पुलिस महानिदेशक के पद पर प्रमोट हो चुके हैं लेकिन अब तक वह जोन की ही कमान संभाले हैं। हर पल वह अपने तबादले के आदेश का इंतजार कर रहे हैं ताकि रैंक के अनुरूप विभाग व पद मिल सके। इसी तरह की बेचैनी एक और वरिष्ठ अफसर को भी है। उनकी परेशानी इससे मिलती जुलती है। उनका प्रमोशन डीजी के पद पर होना है। जगह भी खाली है लेकिन दो सप्ताह से आदेश जारी नहीं हो सका। अब देखना होगा कि आखिर कब दोनों अफसरों की बेचैनी शांत होती है।

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जेन-जी का तेवर देख बैकफुट पर मुखिया

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शन और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का व्यापक असर दिखने लगा है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में गुरुजी और मुखिया लोग दबाव में हैं। छात्रों से मेलजोल बढ़ा दिया है। हालत यह है कि प्रदेश के एक प्रमुख विश्वविद्यालय में एक महीने से चल रहे छात्र आंदोलन को अचानक समाप्त कराने की मुखिया ने खुद कवायद शुरू कर दी है जबकि अभी तक वह इन छात्रों से बात करने के लिए भी तैयार नहीं थे। जानकारी मिली है कि ऊपर से मुखिया को इसके लिए निर्देश दिए गए हैं कि जल्दी से जल्दी मामला सुलटाएं ताकि कोई विपरीत हालत न बने।

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