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भोपाल में इंजीनियरिंग का नया नमूना: फुटपाथ बना पिंजरा, पैदल यात्रियों का रास्ता बंद, सौंदर्याकरण पर उठे सवाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 18 Jun 2026 04:22 PM IST
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सार
भोपाल के पीएंडटी चौराहे पर सौंदर्याकरण के तहत लगाई गई रेलिंग ने फुटपाथ को ही पैदल यात्रियों के लिए दुर्गम बना दिया है। लोगों ने इसे इंजीनियरिंग की बड़ी चूक बताते हुए सरकारी धन की बर्बादी करार दिया है, जबकि नगर निगम और जनप्रतिनिधियों ने डिजाइन में सुधार का भरोसा दिया है।
फुटपाथ में लोहे की रेलिंग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भोपाल में ऐशबाग के 90 डिग्री रेलवे ओवरब्रिज को लेकर उठे विवाद अभी थमे भी नहीं थे कि अब राजधानी में एक और निर्माण कार्य चर्चा का विषय बन गया है। वार्ड-32 के पीएंडटी चौराहे पर सौंदर्याकरण के नाम पर फुटपाथ के चारों ओर लोहे की रेलिंग लगा दी गई है, जिससे पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ तक पहुंचना ही मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस फुटपाथ का निर्माण राहगीरों की सुविधा के लिए किया गया था, वही अब उनके लिए अनुपयोगी साबित हो रहा है। सड़क किनारे करीब तीन फीट ऊंची लोहे की फेंसिंग लगा दी गई है, जिसके कारण लोग सीधे फुटपाथ पर चढ़ ही नहीं पा रहे हैं। कई जगहों पर स्थिति यह है कि एक तरफ लोहे की रेलिंग और दूसरी तरफ पहले से बनी पक्की दीवार है, जिससे फुटपाथ पूरी तरह घिर गया है। सबसे बड़ी परेशानी सार्वजनिक परिवहन से उतरने वाले यात्रियों के सामने है। बस या अन्य वाहनों से उतरने के बाद यात्रियों के पास सीधे फुटपाथ तक पहुंचने का रास्ता नहीं बचा है। कुछ स्थानों पर प्रवेश और निकास के लिए कट पॉइंट बनाए गए हैं, लेकिन वहां भी ठेले और अतिक्रमण होने से लोगों को सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
सुविधा के नाम पर असुविधा क्यों?
रहवासियों का कहना है कि सुरक्षा और सौंदर्याकरण के नाम पर ऐसा डिजाइन तैयार किया गया है, जिसने पैदल यात्रियों की सुविधा ही छीन ली। लोगों ने सवाल उठाया है कि बिना जमीनी हकीकत का आकलन किए ऐसे निर्माण कार्यों को मंजूरी कैसे दी जा रही है। उनका कहना है कि यह सरकारी धन की बर्बादी का उदाहरण है। क्षेत्र की पार्षद आरती अनेजा ने माना कि मौके पर स्थिति संतोषजनक नहीं है। उनका कहना है कि अतिक्रमण और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से यह काम कराया गया था, लेकिन यदि लोगों को फुटपाथ उपयोग करने में परेशानी हो रही है तो डिजाइन में बदलाव कराया जाएगा।
यह भी पढ़ें-मध्यप्रदेश पुलिस में उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सीधी भर्ती फिर शुरू, हर साल 60 पदों पर होगी नियुक्ति
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मामले की जांच कर रहें हैं
नगर निगम के कार्यपालन यंत्री एनके डेहरिया का कहना है कि शिकायत मेरे पास आई है हम मामले की जांच कर रहे हैं जल्द हमारी टीम पहुंच कर जांच करेगी और उसके बाद यदि जांच में पाया गया कि फुटपाथ का उपयोग प्रभावित हो रहा है तो आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। उन्होंने मौके का निरीक्षण करने की भी बात कही है।
यह भी पढ़ें-MP में प्री-मानसून का असर जारी, 28 जिलों में बारिश-आंधी का अलर्ट, जून में 35% कम वर्षा
नियम क्या कहते हैं?
शहरी विकास मानकों के अनुसार फुटपाथ तक पहुंच आसान और बाधारहित होना चाहिए। सड़क से फुटपाथ की ऊंचाई सीमित रखी जाती है ताकि पैदल यात्री आसानी से उसका उपयोग कर सकें। रिहायशी क्षेत्रों में फुटपाथ की न्यूनतम चौड़ाई 1.8 मीटर और व्यावसायिक क्षेत्रों में 2.5 मीटर निर्धारित है।
सुविधा के नाम पर असुविधा क्यों?
रहवासियों का कहना है कि सुरक्षा और सौंदर्याकरण के नाम पर ऐसा डिजाइन तैयार किया गया है, जिसने पैदल यात्रियों की सुविधा ही छीन ली। लोगों ने सवाल उठाया है कि बिना जमीनी हकीकत का आकलन किए ऐसे निर्माण कार्यों को मंजूरी कैसे दी जा रही है। उनका कहना है कि यह सरकारी धन की बर्बादी का उदाहरण है। क्षेत्र की पार्षद आरती अनेजा ने माना कि मौके पर स्थिति संतोषजनक नहीं है। उनका कहना है कि अतिक्रमण और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से यह काम कराया गया था, लेकिन यदि लोगों को फुटपाथ उपयोग करने में परेशानी हो रही है तो डिजाइन में बदलाव कराया जाएगा।
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मामले की जांच कर रहें हैं
नगर निगम के कार्यपालन यंत्री एनके डेहरिया का कहना है कि शिकायत मेरे पास आई है हम मामले की जांच कर रहे हैं जल्द हमारी टीम पहुंच कर जांच करेगी और उसके बाद यदि जांच में पाया गया कि फुटपाथ का उपयोग प्रभावित हो रहा है तो आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। उन्होंने मौके का निरीक्षण करने की भी बात कही है।
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नियम क्या कहते हैं?
शहरी विकास मानकों के अनुसार फुटपाथ तक पहुंच आसान और बाधारहित होना चाहिए। सड़क से फुटपाथ की ऊंचाई सीमित रखी जाती है ताकि पैदल यात्री आसानी से उसका उपयोग कर सकें। रिहायशी क्षेत्रों में फुटपाथ की न्यूनतम चौड़ाई 1.8 मीटर और व्यावसायिक क्षेत्रों में 2.5 मीटर निर्धारित है।
