सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   Anxiety mounts ahead of the NEET exam: Some are battling depression, others are grappling with shattered hopes

नीट एग्जाम से पहले बढ़ी धड़कनें: कोई डिप्रेशन में, कोई टूटी उम्मीदों से जूझ रहा, छात्र बोले-आत्मविश्वास हुआ कम

न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Thu, 18 Jun 2026 07:11 PM IST
विज्ञापन
सार

21 जून को होने वाले नीट री-एग्जाम से पहले अभ्यर्थियों में चिंता, तनाव और असमंजस का माहौल है। भोपाल की  छात्राओं का कहना है कि पहली परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें दोबारा परीक्षा देनी पड़ रही है। पेपर लीक कांड ने न सिर्फ उनकी मेहनत पर असर डाला, बल्कि आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य को भी झकझोर दिया है।

Anxiety mounts ahead of the NEET exam: Some are battling depression, others are grappling with shattered hopes
नीट परीक्षा की तैयारी कर रहीं छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक कांड के बाद रद्द हुई परीक्षा अब 21 जून को दोबारा आयोजित होने जा रही है। लेकिन री-एग्जाम से पहले अभ्यर्थियों के बीच उत्साह कम और मानसिक तनाव ज्यादा दिखाई दे रहा है। महीनों की मेहनत के बाद परीक्षा देने वाले छात्र अब फिर से उसी तैयारी और दबाव के दौर से गुजर रहे हैं। कई छात्रों का कहना है कि उनकी कोई गलती नहीं थी, फिर भी उन्हें दोबारा परीक्षा देकर इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है।




 अब हर दिन तनाव में गुजर रहा है
भोपाल की पूजा राही पिछले एक साल से नीट की तैयारी कर रही हैं। उनका कहना है कि 3 मई को हुई परीक्षा उम्मीद के मुताबिक अच्छी गई थी। पेपर मॉडरेट था और उन्हें अच्छे अंक आने की पूरी उम्मीद थी। परीक्षा देकर लौटने के बाद उन्होंने राहत महसूस की थी कि महीनों की मेहनत रंग लाने वाली है, लेकिन कुछ दिनों बाद पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की खबर ने सब कुछ बदल दिया। पूजा कहती हैं, जब पता चला कि परीक्षा दोबारा होगी तो बहुत बड़ा झटका लगा। अब पढ़ाई तो कर रही हूं, लेकिन मन बिल्कुल नहीं लग रहा। लगातार यही सोच चलती रहती है कि दोबारा वही प्रदर्शन कर पाऊंगी या नहीं। एंग्जायटी और तनाव इतना बढ़ गया है कि कई बार किताब लेकर बैठने के बाद भी पढ़ाई नहीं हो पाती। उन्होंने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम का असर परिवार पर भी पड़ा है। घर वाले भी परेशान हैं। वे लगातार हौसला बढ़ाते हैं, लेकिन उनके चेहरे पर भी चिंता साफ दिखाई देती है। सभी को डर है कि दोबारा परीक्षा में क्या होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


अब फिर से शून्य से शुरुआत करनी पड़ रही है
दो साल से तैयारी कर रहीं और दूसरा ड्रॉप ले चुकीं रानी रैकवार बताती हैं कि पहली परीक्षा के बाद उन्हें पहली बार लगा था कि उनका मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का सपना पूरा हो सकता है। रानी कहती हैं, पेपर अच्छा गया था। हमने प्रश्नों का विश्लेषण किया था और लग रहा था कि इस बार चयन हो जाएगा। घर वाले भी खुश थे। लेकिन फिर अचानक पेपर लीक की खबर आई और सब कुछ खत्म हो गया। ऐसा लगा जैसे मंजिल के बिल्कुल करीब पहुंचकर किसी ने रास्ता ही बदल दिया हो। उन्होंने कहा कि अब तैयारी तो जारी है, लेकिन पहले जैसा आत्मविश्वास नहीं है। मॉक टेस्ट दे रहे हैं, पढ़ाई भी कर रहे हैं, लेकिन मन में लगातार डर बना रहता है। कहीं नया पेपर बहुत कठिन न आ जाए। कभी लगता है कि मेहनत का परिणाम मिलेगा, तो कभी लगता है कि फिर कुछ गड़बड़ न हो जाए। रानी का कहना है कि सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि लाखों ईमानदार छात्रों को कुछ लोगों की गलती की सजा भुगतनी पड़ रही है। पेपर लीक करने वालों पर ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए कि भविष्य में कोई इस तरह छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने की हिम्मत न करे।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें-राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दिग्विजय के निशाने पर CEC: पूछा- चुनाव आयुक्त रहते ट्रस्ट से कैसे जुड़े?


जोश और आत्मविश्वास दोनों प्रभावित हुए
भोपाल की शाहीन खातून कहती हैं कि पहली परीक्षा उनकी उम्मीद से कहीं बेहतर गई थी। परीक्षा के बाद वे परिणाम को लेकर आश्वस्त थीं, लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद पूरा माहौल बदल गया। शाहीन बताती हैं, अप्रैल और मई में जिस ऊर्जा और उत्साह के साथ तैयारी कर रहे थे, वह अब नहीं है। पहले एक लक्ष्य सामने था और उसी पर पूरा फोकस था। लेकिन अब दोबारा तैयारी के दौरान मानसिक थकान महसूस होती है। उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द होने के बाद केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन बनाए रखना भी चुनौती बन गया है। घर वाले सहयोग कर रहे हैं, लेकिन वे भी परेशान हैं। आने-जाने और पढ़ाई के अतिरिक्त खर्च भी बढ़ गए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि हमें फिर से उसी दबाव से गुजरना पड़ रहा है, जिससे हम पहले ही निकल चुके थे।

यह भी पढ़ें-फुटपाथ बना पिंजरा, पैदल यात्रियों का रास्ता बंद, सौंदर्याकरण पर उठे सवाल

हमारी गलती नहीं थी, फिर भी परीक्षा दोबारा देनी पड़ रही
अधिकांश छात्रों का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाएं सिर्फ परीक्षा व्यवस्था पर नहीं, बल्कि छात्रों के मनोबल पर भी गहरा असर डालती हैं। कई अभ्यर्थी महीनों तक एक ही लक्ष्य के लिए मेहनत करते हैं और परीक्षा के बाद मानसिक रूप से खुद को अगले चरण के लिए तैयार करते हैं। लेकिन परीक्षा रद्द होने से उन्हें फिर उसी दबाव और अनिश्चितता में लौटना पड़ता है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed