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Bhopal News: राज्यसभा में दिग्विजय सिंह का संदेश, विदाई नहीं, नई पारी की शुरुआत, बोले-अभी और काम बाकी है

न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Wed, 18 Mar 2026 04:49 PM IST
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सार

राज्यसभा से विदाई के मौके पर दिग्विजय सिंह ने साफ किया कि वे राजनीति से दूर नहीं हो रहे, बल्कि आगे भी सक्रिय रहेंगे, साथ ही उन्होंने संवाद, संतुलन और सौहार्द की राजनीति पर जोर दिया।

Bhopal News: Digvijaya Singh's Message in the Rajya Sabha—Not a Farewell, but the Start of a New Innings; Says
दिग्विजय सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राज्यसभा से रिटायर हो रहे सांसदों को दी जा रही विदाई के बीच मध्य प्रदेश से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने संबोधन में साफ कर दिया कि यह उनके राजनीतिक सफर का अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत है। अपने भाषण में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई  की मशहूर पंक्तियां याद करते हुए कहा कि वे न थके हैं और न ही रिटायर हुए हैं, आगे भी सक्रिय रहकर काम करते रहेंगे।
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बिना छात्र राजनीति के शुरूआत
दिग्विजय सिंह ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि छात्र जीवन में उनका राजनीति से कोई खास जुड़ाव नहीं था। परिस्थितियां ऐसी बनीं कि वे 22 साल की उम्र में ही नगर पालिका अध्यक्ष बन गए। इसके बाद 30 साल में विधायक, 33 में मंत्री और 46 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बने। उन्होंने कहा कि लंबे राजनीतिक सफर में उन्होंने हमेशा अपनी विचारधारा को प्राथमिकता दी और कभी उससे समझौता नहीं किया।
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मतभेद रहे, लेकिन मनभेद नहीं
अपने भाषण में उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उन्होंने कभी किसी से व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं रखी। अगर उनके किसी शब्द से किसी को ठेस पहुंची हो तो उन्होंने उसके लिए खेद भी जताया। उन्होंने बताया कि अलग विचारधारा के नेताओं के साथ भी उनके रिश्ते अच्छे रहे। चाहे विधानसभा हो, लोकसभा या राज्यसभा उन्होंने हमेशा संवाद बनाए रखा।

पुराने नेताओं से मिली सीख
दिग्विजय सिंह ने अपने संसदीय अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और चंद्रशेखर जैसे नेताओं के साथ काम करने का मौका मिला, जिससे उन्हें काफी सीख मिली।

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लोकतंत्र में संवाद जरूरी
उन्होंने सदन की कार्यप्रणाली पर भी बात करते हुए कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत चर्चा और संवाद में है। सरकार और विपक्ष को मिलकर रास्ता निकालना चाहिए, लेकिन आज इस परंपरा में कमी दिख रही है।भाषण के अंत में उन्होंने देश में बढ़ती साम्प्रदायिक तनाव और मनमुटाव पर चिंता जताई और कहा कि यह देश की संस्कृति, लोकतंत्र और संविधान के लिए सही नहीं है। अपने संबोधन का अंत उन्होंने संत कबीरदास की पंक्तियों के साथ किया सबके लिए भलाई की कामना, न किसी से खास दोस्ती, न किसी से बैर।


 
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