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भोपाल घोषणा पत्र के साथ ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन का समापन,14 देशों ने मिलकर तय की विरासत और कलाकारों की नई राह
Sat, 08 Aug 2026 07:02 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा/ भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा/ भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sat, 08 Aug 2026 07:02 PM IST
सार
भोपाल में चार दिन चले ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन का शनिवार को ‘भोपाल घोषणा पत्र’ के साथ समापन हुआ। 14 देशों ने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, कलाकारों को अवसर देने और विदेशों में पहुंची धरोहरों की वापसी के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई।
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केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, सीएम मोहन यादव और केंद्र और राज्य के अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी में पांच अगस्त से चल रहे ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन-2026 का शनिवार को समापन हो गया। चार दिन तक चले इस आयोजन में संस्कृति और विरासत से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा के बाद ‘भोपाल घोषणा पत्र’ को मंजूरी दी गई। इसमें ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को संस्थागत रूप देने, कलाकारों को नए अवसर उपलब्ध कराने, ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा और विदेशों में पहुंची सांस्कृतिक संपदाओं को मूल देश में वापस लाने के लिए सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। समापन अवसर पर संस्कृति मंत्रियों की बैठक में भारत समेत 14 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें 10 ब्रिक्स सदस्य और चार साझेदार देश रहे। बैठक में कुल 55 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। मिस्र की ओर से मंत्री स्तरीय बैठक में ऑनलाइन भागीदारी की गई। समापन कार्यक्रम पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखाबत और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रेस कॉफ्रेंस में शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह ने बैठक में हुई घोषणा और प्रस्ताव की जानकारी दी।
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चार महीने की तैयारियों के बाद भोपाल में अंतिम रूप
ब्रिक्स संस्कृति ट्रैक की शुरुआत अप्रैल में हुई थी। पहली संस्कृति कार्य समूह की बैठक 29-30 अप्रैल को ऑनलाइन हुई। इसके बाद 4-5 जून को वाराणसी में दूसरी बैठक हुई। तीसरी बैठक 5-6 अगस्त को भोपाल में हुई। इन बैठकों में हुए विचार-विमर्श को शनिवार को संस्कृति मंत्रियों की बैठक में अंतिम रूप दिया गया। केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि पिछले तीन दिनों से विभिन्न मुद्दों पर चल रहा मंथन भोपाल घोषणा पत्र के साथ पूरा हुआ है। उन्होंने कहा कि पहली बार सांस्कृतिक सहयोग के लिए समयबद्ध लक्ष्यों पर भी जोर दिया गया है और सदस्य देशों के बीच साझा रोडमैप तैयार किया गया है।
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चोरी गई धरोहरों की वापसी के लिए तकनीक का इस्तेमाल
भोपाल घोषणा पत्र में सांस्कृतिक संपदाओं की पहचान और उनके मूल स्थान तक वापसी को सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है। इसके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ट्रेसिंग टूल्स की संभावनाएं तलाशने पर भी सहमति बनी है। इससे विदेशों में मौजूद चोरी या अवैध तरीके से बाहर गई सांस्कृतिक वस्तुओं का पता लगाने और उनकी वापसी की प्रक्रिया में मदद मिलने की उम्मीद है। घोषणा पत्र में यूनेस्को की बहुराष्ट्रीय नामांकन प्रक्रियाओं में सहयोग बढ़ाने का भी प्रावधान है। इसका उद्देश्य ऐसी सांस्कृतिक विरासत को संयुक्त रूप से संरक्षित और मान्यता दिलाना है, जो एक से अधिक देशों से जुड़ी हुई है।
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कलाकारों के लिए बनेगा साझा मंच
भारत ने ब्रिक्स संस्कृति ट्रैक के तहत स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री शुरू करने की पायलट पहल की घोषणा की है। इसका उद्देश्य अलग-अलग देशों के कलाकारों और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को एक-दूसरे से जोड़ना है। रजिस्ट्री के जरिए कलाकारों को सांस्कृतिक आदान-प्रदान, नेटवर्किंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। घोषणा पत्र में रचनात्मक उद्योग और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को भी सहयोग के प्रमुख क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया है। सदस्य देश अनुभव और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियां साझा करेंगे। डिजिटल माध्यमों के जरिए कलाकारों को बाजार तक पहुंच दिलाने के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
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पारंपरिक ज्ञान से संग्रहालयों तक सहयोग
ब्रिक्स देशों ने पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को संरक्षित करने की जरूरत को भी स्वीकार किया है। पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं, कला और ज्ञान को सुरक्षित रखने के लिए सहयोग बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागार के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी है। खासतौर पर दस्तावेजों के संरक्षण, डिजिटलीकरण और साझा विशेषज्ञता पर काम किया जाएगा।
एआई के दौर में कॉपीराइट पर भी नजर
घोषणा पत्र में रचनाकारों के अधिकारों को भी जगह दी गई है। एआई सिस्टम में कॉपीराइट वाली सामग्री के इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता और रचनाकारों को उचित पारिश्रमिक दिए जाने जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है।
मध्य प्रदेश की संस्कृति को भी मिला मंच
ब्रिक्स संस्कृति महोत्सव के दौरान मध्य प्रदेश की कला, जनजातीय परंपराओं, वास्तुकला, वस्त्र, आध्यात्मिक परंपराओं और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों को विदेशी प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत किया गया। ‘अमृतसया’ की प्रस्तुति के जरिए प्रदेश की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत को प्रदर्शित किया गया।
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सांची में बौद्ध विरासत से रूबरू होंगे विदेशी प्रतिनिधि
सम्मेलन के बाद विदेशी प्रतिनिधिमंडल सांची की सांस्कृतिक यात्रा पर गया। यहां प्रतिनिधियों को विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप का भ्रमण कराया गया। चेतियागिरी मंदिर में दर्शन के साथ योग और ध्यान सत्र भी आयोजित किया गया। शाम को बौद्ध इतिहास और कला पर आधारित 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग तथा लाइट एंड साउंड शो भी रखा गया। सम्मेलन में आए संस्कृति मंत्रियों और प्रतिनिधियों के लिए मध्य प्रदेश के पारंपरिक व्यंजन भी परोसे गए। भोजन में दाल-बाफले, निमोना, रिकमच, गुइया की सब्जी, चंबल का थोपा, चंदिया, बड़ा और कोदो-कुटकी जैसे मिलेट आधारित व्यंजन शामिल रहे। विदेशी मेहमानों की पसंद को ध्यान में रखते हुए पश्चिमी और ओरिएंटल व्यंजनों की व्यवस्था भी की गई।
इन 14 देशों ने लिया हिस्सा
ब्रिक्स सदस्य: भारत, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात।
साझेदार देश: बेलारूस, क्यूबा, कजाखस्तान और थाईलैंड।
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चार महीने की तैयारियों के बाद भोपाल में अंतिम रूप
ब्रिक्स संस्कृति ट्रैक की शुरुआत अप्रैल में हुई थी। पहली संस्कृति कार्य समूह की बैठक 29-30 अप्रैल को ऑनलाइन हुई। इसके बाद 4-5 जून को वाराणसी में दूसरी बैठक हुई। तीसरी बैठक 5-6 अगस्त को भोपाल में हुई। इन बैठकों में हुए विचार-विमर्श को शनिवार को संस्कृति मंत्रियों की बैठक में अंतिम रूप दिया गया। केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि पिछले तीन दिनों से विभिन्न मुद्दों पर चल रहा मंथन भोपाल घोषणा पत्र के साथ पूरा हुआ है। उन्होंने कहा कि पहली बार सांस्कृतिक सहयोग के लिए समयबद्ध लक्ष्यों पर भी जोर दिया गया है और सदस्य देशों के बीच साझा रोडमैप तैयार किया गया है।
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चोरी गई धरोहरों की वापसी के लिए तकनीक का इस्तेमाल
भोपाल घोषणा पत्र में सांस्कृतिक संपदाओं की पहचान और उनके मूल स्थान तक वापसी को सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है। इसके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ट्रेसिंग टूल्स की संभावनाएं तलाशने पर भी सहमति बनी है। इससे विदेशों में मौजूद चोरी या अवैध तरीके से बाहर गई सांस्कृतिक वस्तुओं का पता लगाने और उनकी वापसी की प्रक्रिया में मदद मिलने की उम्मीद है। घोषणा पत्र में यूनेस्को की बहुराष्ट्रीय नामांकन प्रक्रियाओं में सहयोग बढ़ाने का भी प्रावधान है। इसका उद्देश्य ऐसी सांस्कृतिक विरासत को संयुक्त रूप से संरक्षित और मान्यता दिलाना है, जो एक से अधिक देशों से जुड़ी हुई है।
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कलाकारों के लिए बनेगा साझा मंच
भारत ने ब्रिक्स संस्कृति ट्रैक के तहत स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री शुरू करने की पायलट पहल की घोषणा की है। इसका उद्देश्य अलग-अलग देशों के कलाकारों और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को एक-दूसरे से जोड़ना है। रजिस्ट्री के जरिए कलाकारों को सांस्कृतिक आदान-प्रदान, नेटवर्किंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। घोषणा पत्र में रचनात्मक उद्योग और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को भी सहयोग के प्रमुख क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया है। सदस्य देश अनुभव और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियां साझा करेंगे। डिजिटल माध्यमों के जरिए कलाकारों को बाजार तक पहुंच दिलाने के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
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पारंपरिक ज्ञान से संग्रहालयों तक सहयोग
ब्रिक्स देशों ने पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को संरक्षित करने की जरूरत को भी स्वीकार किया है। पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं, कला और ज्ञान को सुरक्षित रखने के लिए सहयोग बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागार के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी है। खासतौर पर दस्तावेजों के संरक्षण, डिजिटलीकरण और साझा विशेषज्ञता पर काम किया जाएगा।
एआई के दौर में कॉपीराइट पर भी नजर
घोषणा पत्र में रचनाकारों के अधिकारों को भी जगह दी गई है। एआई सिस्टम में कॉपीराइट वाली सामग्री के इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता और रचनाकारों को उचित पारिश्रमिक दिए जाने जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है।
मध्य प्रदेश की संस्कृति को भी मिला मंच
ब्रिक्स संस्कृति महोत्सव के दौरान मध्य प्रदेश की कला, जनजातीय परंपराओं, वास्तुकला, वस्त्र, आध्यात्मिक परंपराओं और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों को विदेशी प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत किया गया। ‘अमृतसया’ की प्रस्तुति के जरिए प्रदेश की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत को प्रदर्शित किया गया।
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सांची में बौद्ध विरासत से रूबरू होंगे विदेशी प्रतिनिधि
सम्मेलन के बाद विदेशी प्रतिनिधिमंडल सांची की सांस्कृतिक यात्रा पर गया। यहां प्रतिनिधियों को विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप का भ्रमण कराया गया। चेतियागिरी मंदिर में दर्शन के साथ योग और ध्यान सत्र भी आयोजित किया गया। शाम को बौद्ध इतिहास और कला पर आधारित 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग तथा लाइट एंड साउंड शो भी रखा गया। सम्मेलन में आए संस्कृति मंत्रियों और प्रतिनिधियों के लिए मध्य प्रदेश के पारंपरिक व्यंजन भी परोसे गए। भोजन में दाल-बाफले, निमोना, रिकमच, गुइया की सब्जी, चंबल का थोपा, चंदिया, बड़ा और कोदो-कुटकी जैसे मिलेट आधारित व्यंजन शामिल रहे। विदेशी मेहमानों की पसंद को ध्यान में रखते हुए पश्चिमी और ओरिएंटल व्यंजनों की व्यवस्था भी की गई।
इन 14 देशों ने लिया हिस्सा
ब्रिक्स सदस्य: भारत, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात।
साझेदार देश: बेलारूस, क्यूबा, कजाखस्तान और थाईलैंड।
