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खाकी भी हुई साइबर ठगी का शिकार: सीआरपीएफ जवान बनकर ठग ने प्रधान आरक्षक से ऐंठे 1.63 लाख रुपये, हड़कंप

Sun, 21 Jun 2026 12:43 PM IST
भोपाल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: भोपाल ब्यूरो Updated Sun, 21 Jun 2026 12:43 PM IST
सार

भोपाल में पुलिस कंट्रोल रूम के प्रधान आरक्षक दिलीप कुमार से साइबर ठग ने सीआरपीएफ जवान बनकर 1.63 लाख रुपये ठग लिए। आरोपी ने उनके बचपन के दोस्त का नाम लेकर सस्ते फर्नीचर का झांसा दिया। शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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Even the police fall victim to fraud: Conman posing as a CRPF jawan swindles 1.63 lakh from a Head Constable
थाना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आम लोगों को साइबर अपराधों से सतर्क रहने की सलाह देने वाली पुलिस भी ठगों के जाल से अछूती नहीं रही। राजधानी भोपाल में एक साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस कंट्रोल रूम में पदस्थ एक प्रधान आरक्षक को शातिर ठग ने झांसे में लेकर 1.63 लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपी ने खुद को सीआरपीएफ का जवान बताया और पुलिसकर्मी के बचपन के दोस्त का नाम लेकर सस्ते दाम पर फर्नीचर बेचने का लालच दिया।

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कंट्रोल रूम में पदस्थ हैं पीड़ित दिलीप कुमार

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गोविंदपुरा थाना पुलिस के अनुसार, 43 वर्षीय दिलीप कुमार मध्य प्रदेश पुलिस में प्रधान आरक्षक हैं और वर्तमान में पुलिस कंट्रोल रूम में पदस्थ हैं। वे परिवार सहित पुलिस लाइन गोविंदपुरा में रहते हैं। 9 जून को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को सीआरपीएफ का जवान बताया और कहा कि वह उनके बचपन के मित्र योगेश आठनेरे का परिचित है। बातचीत के दौरान आरोपी ने बताया कि उसका दूसरे शहर में तबादला हो गया है, इसलिए वह अपने घर का फर्नीचर कम कीमत में बेचना चाहता है।

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दोस्त का नाम लेकर जीता भरोसा
आरोपी ने व्हाट्सएप पर सोफा सेट, डाइनिंग टेबल और अन्य घरेलू सामान की तस्वीरें भेजीं। उसने दावा किया कि योगेश ने ही उसे बताया था कि दिलीप को फर्नीचर की आवश्यकता है। दोस्त का नाम सामने आने और फर्नीचर की तस्वीरें देखने के बाद दिलीप को उस पर भरोसा हो गया। आरोपी ने पूरे फर्नीचर का सौदा 80 हजार रुपये में तय किया और एडवांस के रूप में 10 हजार रुपये मांगे। दिलीप ने तुरंत ऑनलाइन भुगतान कर दिया।



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ट्रांसपोर्टेशन और एंट्री के नाम पर वसूली
एडवांस मिलने के बाद आरोपी ने अलग-अलग बहाने बनाकर और पैसे मांगने शुरू कर दिए। पहले उसने शेष 70 हजार रुपये जमा करवा लिए। इसके बाद सेना की ट्रांसपोर्ट लाइन और एंट्री प्रक्रिया का हवाला देकर 41,500 रुपये और ट्रांसफर करवा लिए। फिर आरोपी ने यह कहकर दोबारा भुगतान करवाया कि पिछला लेन-देन तकनीकी कारणों से गलत हो गया है। इस बहाने उसने 41 हजार रुपये और 500 रुपये की अतिरिक्त राशि भी जमा करा ली। इस तरह कुल 1.63 लाख रुपये ठग लिए गए।

टैक्स के नाम पर मांगे और पैसे, तब हुआ शक
मामले का खुलासा तब हुआ, जब आरोपी ने टैक्स और ट्रांसपोर्टेशन शुल्क के नाम पर 23,150 रुपये की अतिरिक्त मांग की। इस बार दिलीप कुमार को संदेह हुआ और उन्होंने आगे पैसे देने के बजाय अपनी रकम वापस मांगी। आरोपी ने रुपये लौटाने से इनकार कर दिया और अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने गोविंदपुरा थाने में शिकायत दर्ज कराई। थाना प्रभारी अवधेश सिंह तोमर ने बताया कि शिकायत के आधार पर साइबर ठगी का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के आधार पर आरोपी की तलाश कर रही है।

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