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MP बोर्ड मूल्यांकन में गड़बड़ी: 87% लाने वाली छात्रा बोली-मेरे ही नंबर खा गया बोर्ड, अब कोर्ट जाने की तैयारी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Fri, 22 May 2026 06:04 PM IST
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सार
एमपी बोर्ड की छात्रा पूर्वा शर्मा ने कॉपी जांच में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए छात्रा का दावा है कि कई सही उत्तरों पर अंक नहीं दिए गए और कुछ जवाबों को गलत कर दिया गया। मामले में एमपी बोर्ड के सीएसओ भूपेश गुप्ता ने कहा है कि छात्रा आवेदन दे, नियमानुसार जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
छात्रा पूर्वा शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश बोर्ड की 12वीं परीक्षा के रिजल्ट के बाद कॉपी जांच को लेकर नया विवाद सामने आया है। 87 प्रतिशत अंक हासिल करने वाली छात्रा पूर्वा शर्मा ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। छात्रा का आरोप है कि उनकी कॉपियों में कई जवाबों पर नंबर ही नहीं दिए गए, जबकि कुछ सही उत्तरों को गलत मानकर अंक काट दिए गए। पूर्वा शर्मा ने बताया कि इस साल उन्होंने एमपी बोर्ड से 12वीं की परीक्षा पास की है। 15 अप्रैल को रिजल्ट आने के बाद वे अपने अंकों से संतुष्ट नहीं थीं, क्योंकि उनके मुताबिक उन्होंने परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन किया था।
अगले ही दिन कराया री-चेकिंग के लिए आवेदन
छात्रा के मुताबिक रिजल्ट आने के अगले ही दिन उन्होंने कॉपी निकलवाने और पुनर्गणना के लिए आवेदन कर दिया। 1 मई को उन्हें पॉलिटिकल साइंस और हिंदी की कॉपी मिली, जबकि 14 मई को हिस्ट्री की उत्तरपुस्तिका प्राप्त हुई। कॉपियां देखने के बाद वे हैरान रह गईं।
कई जवाब जांचे ही नहीं गए
पूर्वा का दावा है कि कई उत्तरों को जांचा ही नहीं गया। कुछ सवालों पर अंक नहीं दिए गए, जबकि कई जवाब एनसीईआरटी के अनुसार सही होने के बावजूद गलत कर दिए गए। उनका कहना है कि मूल्यांकन में गंभीर लापरवाही हुई है। छात्रा के मुताबिक जब उन्होंने इस मामले में बोर्ड कार्यालय और मूल्यांकनकर्ताओं से शिकायत की, तो अधिकारियों ने गलती मानने से इनकार कर दिया। पूर्वा ने आरोप लगाया कि उन्हें कहा गया कि अब कोर्ट से आदेश लेकर आइए।
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यह भी पढ़ें-भोपाल में कॉकरोच जनता पार्टी की एंट्री, सरकार पर भविष्य से खिलवाड़ का आरोप
अब अपने नंबरों के लिए लड़ना पड़ेगा
छात्रा ने कहा कि अब उन्हें अपने ही नंबरों के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि वे खुशकिस्मत हैं कि उनके माता-पिता उनका साथ दे रहे हैं, लेकिन कई छात्र और परिवार ऐसी परिस्थितियों में समझौता कर लेते हैं, जिससे छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है। पूर्वा शर्मा ने माध्यमिक शिक्षा मंडल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को इस तरह मजाक नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यह सिर्फ उनके साथ नहीं हुआ होगा, बल्कि कई अन्य छात्र भी ऐसी समस्याओं का सामना कर रहे होंगे।
यह भी पढ़ें-तेज आवाज वाले पीए सिस्टम हटाने के आदेश, पुलिस-प्रशासन से मांगा जवाब
बोर्ड अधिकारी ने क्या कहा?
इस मामले में एमपी बोर्ड के सीएसओ भूपेश गुप्ता ने कहा कि यदि छात्रा की कॉपी के किसी भाग का मूल्यांकन नहीं हुआ है, तो वह नियमानुसार मंडल को आवेदन दें। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया पुनर्गणना के दायरे में आती है और विशेषज्ञ द्वारा जांच के बाद यदि अंक बनते हैं तो संशोधित परीक्षा परिणाम जारी किया जाएगा। भूपेश गुप्ता ने कहा कि जहां तक कम नंबर दिए जाने या एनसीईआरटी के अनुसार उत्तर लिखने के बावजूद अंक नहीं मिलने की बात है, तो मंडल में पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान नहीं है। ऐसे में छात्रा को अपनी उत्तरपुस्तिका और आवेदन जमा कराना होगा, जिसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय जाना पूरी तरह आवेदक की इच्छा पर निर्भर है, इसके लिए कोई बाध्यता नहीं है। वहीं यदि छात्रा ने पहले कोई शिकायत दी है, तो उसकी पावती उपलब्ध कराने पर मंडल मामले की दोबारा जांच करवाएगा।
अगले ही दिन कराया री-चेकिंग के लिए आवेदन
छात्रा के मुताबिक रिजल्ट आने के अगले ही दिन उन्होंने कॉपी निकलवाने और पुनर्गणना के लिए आवेदन कर दिया। 1 मई को उन्हें पॉलिटिकल साइंस और हिंदी की कॉपी मिली, जबकि 14 मई को हिस्ट्री की उत्तरपुस्तिका प्राप्त हुई। कॉपियां देखने के बाद वे हैरान रह गईं।
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कई जवाब जांचे ही नहीं गए
पूर्वा का दावा है कि कई उत्तरों को जांचा ही नहीं गया। कुछ सवालों पर अंक नहीं दिए गए, जबकि कई जवाब एनसीईआरटी के अनुसार सही होने के बावजूद गलत कर दिए गए। उनका कहना है कि मूल्यांकन में गंभीर लापरवाही हुई है। छात्रा के मुताबिक जब उन्होंने इस मामले में बोर्ड कार्यालय और मूल्यांकनकर्ताओं से शिकायत की, तो अधिकारियों ने गलती मानने से इनकार कर दिया। पूर्वा ने आरोप लगाया कि उन्हें कहा गया कि अब कोर्ट से आदेश लेकर आइए।
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अब अपने नंबरों के लिए लड़ना पड़ेगा
छात्रा ने कहा कि अब उन्हें अपने ही नंबरों के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि वे खुशकिस्मत हैं कि उनके माता-पिता उनका साथ दे रहे हैं, लेकिन कई छात्र और परिवार ऐसी परिस्थितियों में समझौता कर लेते हैं, जिससे छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है। पूर्वा शर्मा ने माध्यमिक शिक्षा मंडल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को इस तरह मजाक नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यह सिर्फ उनके साथ नहीं हुआ होगा, बल्कि कई अन्य छात्र भी ऐसी समस्याओं का सामना कर रहे होंगे।
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बोर्ड अधिकारी ने क्या कहा?
इस मामले में एमपी बोर्ड के सीएसओ भूपेश गुप्ता ने कहा कि यदि छात्रा की कॉपी के किसी भाग का मूल्यांकन नहीं हुआ है, तो वह नियमानुसार मंडल को आवेदन दें। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया पुनर्गणना के दायरे में आती है और विशेषज्ञ द्वारा जांच के बाद यदि अंक बनते हैं तो संशोधित परीक्षा परिणाम जारी किया जाएगा। भूपेश गुप्ता ने कहा कि जहां तक कम नंबर दिए जाने या एनसीईआरटी के अनुसार उत्तर लिखने के बावजूद अंक नहीं मिलने की बात है, तो मंडल में पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान नहीं है। ऐसे में छात्रा को अपनी उत्तरपुस्तिका और आवेदन जमा कराना होगा, जिसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय जाना पूरी तरह आवेदक की इच्छा पर निर्भर है, इसके लिए कोई बाध्यता नहीं है। वहीं यदि छात्रा ने पहले कोई शिकायत दी है, तो उसकी पावती उपलब्ध कराने पर मंडल मामले की दोबारा जांच करवाएगा।

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