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केन-बेतवा मुआवजा: उमंग सिंघार का आरोप, बोले- गांव में नहीं रहने वाले मुस्लिम परिवार के खाते में पहुंचा भुगतान
Fri, 17 Jul 2026 06:20 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Fri, 17 Jul 2026 06:20 PM IST
सार
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि प्रभावित गांवों में अपात्र लोगों को भी मुआवजा दिया गया, जबकि कई वास्तविक आदिवासी परिवार अब भी वंचित हैं। उन्होंने ग्राम सभा प्रक्रिया, पुनर्वास और ठेका आवंटन पर भी सवाल उठाते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
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नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भोपाल में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने दावा किया कि परियोजना से प्रभावित खरिहानी गांव में एक मुस्लिम (खान) परिवार के नाम भी मुआवजा स्वीकृत किया गया, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि गांव में ऐसा कोई परिवार कभी रहा ही नहीं। सिंघार ने सवाल उठाया कि जब संबंधित परिवार गांव का निवासी नहीं था तो उसके खाते में मुआवजा कैसे पहुंचा। उन्होंने आरोप लगाया कि खरिहानी गांव में मकानों के लिए करीब 11 करोड़ रुपये का मुआवजा स्वीकृत हुआ, लेकिन उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार लगभग 8 करोड़ रुपये ऐसे लोगों को दिए गए, जिनका गांव से कोई संबंध नहीं था या जो वर्ष 1980-90 में ही गांव छोड़ चुके थे। उनका दावा है कि आंदोलनकारियों ने दस्तावेजों के आधार पर 500 से अधिक संदिग्ध मुआवजा मामलों की पहचान की है।
असल प्रभावित आज भी मुआवजे से वंचित
सिंघार ने कहा कि वास्तविक आदिवासी और किसान परिवार आज भी मुआवजे और पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं, जबकि अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाने के आरोप सामने आ रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की कि एक कैबिनेट बैठक परियोजना प्रभावित क्षेत्र में भी आयोजित कर प्रभावित परिवारों की समस्याएं सुनी जाएं।
ग्राम सभा प्रक्रिया पर भी सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि कई गांवों में ग्राम सभा की वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उनका दावा है कि अलग-अलग पंचायतों के कार्यवाही रजिस्टरों में एक जैसी भाषा दर्ज है और कई बैठकों का समय भी एक जैसा दिखाया गया है। उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक अनियमितता बताया।
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घोस्ट हस्ताक्षर' का भी लगाया आरोप
सिंघार ने दावा किया कि एक ग्राम पंचायत के कार्यवाही रजिस्टर में ऐसे व्यक्ति के हस्ताक्षर दर्ज हैं, जिसने उस समय सरपंच पद संभाला ही नहीं था। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना में पुनर्वास और भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी हुए बिना ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। उनका कहना है कि कई प्रभावित परिवारों के मकान तोड़े गए, जबकि उन्हें पूरा मुआवजा और वैकल्पिक पुनर्वास नहीं मिला।
भाजपा और निर्माण कंपनी पर भी साधा निशाना
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि परियोजना से जुड़ी निर्माण कंपनी एनसीसी लिमिटेड ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए भाजपा को 60 करोड़ रुपये का चंदा दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इसी के बदले कंपनी को परियोजना का हजारों करोड़ रुपये का ठेका मिला। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सोशल ऑडिट की मांग की।
यह भी पढ़ें-भोपाल में हिन्दू संगठन ने संदिग्ध मांस से भरा ऑटो पकड़ा, गौमांस होने का आरोप, जांच रिपोर्ट का इंतजार
सरकार से की ये मांगें
सिंघार ने मांग की कि मुआवजा वितरण, ग्राम सभा की प्रक्रिया, भूमि अभिलेख, पुनर्वास, पुलिस कार्रवाई और ठेका आवंटन की स्वतंत्र जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो उसे निष्पक्ष जांच से पीछे नहीं हटना चाहिए।
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असल प्रभावित आज भी मुआवजे से वंचित
सिंघार ने कहा कि वास्तविक आदिवासी और किसान परिवार आज भी मुआवजे और पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं, जबकि अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाने के आरोप सामने आ रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की कि एक कैबिनेट बैठक परियोजना प्रभावित क्षेत्र में भी आयोजित कर प्रभावित परिवारों की समस्याएं सुनी जाएं।
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ग्राम सभा प्रक्रिया पर भी सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि कई गांवों में ग्राम सभा की वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उनका दावा है कि अलग-अलग पंचायतों के कार्यवाही रजिस्टरों में एक जैसी भाषा दर्ज है और कई बैठकों का समय भी एक जैसा दिखाया गया है। उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक अनियमितता बताया।
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घोस्ट हस्ताक्षर' का भी लगाया आरोप
सिंघार ने दावा किया कि एक ग्राम पंचायत के कार्यवाही रजिस्टर में ऐसे व्यक्ति के हस्ताक्षर दर्ज हैं, जिसने उस समय सरपंच पद संभाला ही नहीं था। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना में पुनर्वास और भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी हुए बिना ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। उनका कहना है कि कई प्रभावित परिवारों के मकान तोड़े गए, जबकि उन्हें पूरा मुआवजा और वैकल्पिक पुनर्वास नहीं मिला।
भाजपा और निर्माण कंपनी पर भी साधा निशाना
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि परियोजना से जुड़ी निर्माण कंपनी एनसीसी लिमिटेड ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए भाजपा को 60 करोड़ रुपये का चंदा दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इसी के बदले कंपनी को परियोजना का हजारों करोड़ रुपये का ठेका मिला। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सोशल ऑडिट की मांग की।
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सरकार से की ये मांगें
सिंघार ने मांग की कि मुआवजा वितरण, ग्राम सभा की प्रक्रिया, भूमि अभिलेख, पुनर्वास, पुलिस कार्रवाई और ठेका आवंटन की स्वतंत्र जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो उसे निष्पक्ष जांच से पीछे नहीं हटना चाहिए।
