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जाति प्रमाण पत्र विवाद: मंत्री प्रतिमा बागरी को राहत, राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने अजा प्रमाण पत्र को माना वैध
Fri, 17 Jul 2026 08:20 AM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Fri, 17 Jul 2026 08:20 AM IST
सार
मध्य प्रदेश की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी को उनके जाति प्रमाण पत्र विवाद में बड़ी राहत मिली है। राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति ने जांच के बाद उनके एससी जाति प्रमाण पत्र को वैध करार दिया है।
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राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर चल रहे विवाद में उन्हें बड़ी राहत मिली है। राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति ने उनके अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण पत्र को वैध माना है। इस संबंध में समिति ने आदेश जारी कर दिए है। जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान मंत्री प्रतिमा बागरी की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों का परीक्षण किया गया। इनमें उनके पिता और दादा के राजस्व अभिलेखों में भी बागरी (अनुसूचित जाति) दर्ज होने के प्रमाण मिले। समिति ने मामले की पुष्टि के लिए संबंधित जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और तहसीलदार से भी रिपोर्ट मंगाई थी। इन रिपोर्टों में भी उनकी जाति अनुसूचित जाति श्रेणी की पाई गई।
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प्रतिमा बागरी को वर्ष 2018 में सतना जिले की नागौद तहसील से स्थायी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया था। छानबीन समिति ने उपलब्ध दस्तावेजों और अभिलेखों की जांच के बाद इसे विधिसम्मत मानते हुए वैध माना है। जांच के दौरान जनजातीय अनुसंधान संस्थान (टीआरआई) की रिपोर्ट का भी परीक्षण किया गया। रिपोर्ट में बागरी समुदाय की सामाजिक स्थिति, अन्य जातियों के साथ सामाजिक संबंध और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख किया गया है। साथ ही यह भी देखा गया कि सतना जिले में बागरी समुदाय को राजपूत या ठाकुर वर्ग से जोड़ने के पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इन सभी दस्तावेजों और रिपोर्टों के आधार पर राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने मंत्री प्रतिभा बागरी को अनुसूचित जाति वर्ग का सदस्य माना है।
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बता दें कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने 31 मार्च 2025 को शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि मंत्री प्रतिमा बागरी ने गलत दस्तावेजों के आधार पर अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र बनवाया है। जांच में देरी होने पर मामला जबलपुर हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत ने अप्रैल 2026 में राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति को 60 दिन के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए। समिति ने विभिन्न वर्षों की गजट अधिसूचनाओं का अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि 1976 के बाद बागरी जाति पूरे मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति की सूची में शामिल है। शिकायतकर्ता मंत्री के परिवार को राजपूत/ठाकुर बागरी साबित करने के पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। दोनों पक्षों की सुनवाई और सभी दस्तावेजों की समीक्षा के बाद राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति ने प्रतिभा बागरी के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को वैध घोषित कर शिकायत खारिज कर दी।
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प्रतिमा बागरी को वर्ष 2018 में सतना जिले की नागौद तहसील से स्थायी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया था। छानबीन समिति ने उपलब्ध दस्तावेजों और अभिलेखों की जांच के बाद इसे विधिसम्मत मानते हुए वैध माना है। जांच के दौरान जनजातीय अनुसंधान संस्थान (टीआरआई) की रिपोर्ट का भी परीक्षण किया गया। रिपोर्ट में बागरी समुदाय की सामाजिक स्थिति, अन्य जातियों के साथ सामाजिक संबंध और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख किया गया है। साथ ही यह भी देखा गया कि सतना जिले में बागरी समुदाय को राजपूत या ठाकुर वर्ग से जोड़ने के पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इन सभी दस्तावेजों और रिपोर्टों के आधार पर राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने मंत्री प्रतिभा बागरी को अनुसूचित जाति वर्ग का सदस्य माना है।
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बता दें कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने 31 मार्च 2025 को शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि मंत्री प्रतिमा बागरी ने गलत दस्तावेजों के आधार पर अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र बनवाया है। जांच में देरी होने पर मामला जबलपुर हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत ने अप्रैल 2026 में राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति को 60 दिन के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए। समिति ने विभिन्न वर्षों की गजट अधिसूचनाओं का अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि 1976 के बाद बागरी जाति पूरे मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति की सूची में शामिल है। शिकायतकर्ता मंत्री के परिवार को राजपूत/ठाकुर बागरी साबित करने के पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। दोनों पक्षों की सुनवाई और सभी दस्तावेजों की समीक्षा के बाद राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति ने प्रतिभा बागरी के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को वैध घोषित कर शिकायत खारिज कर दी।
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