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MP: मालवा की बदलेगी तस्वीर, 16 हजार वर्ग KM में फैलेगा विकास, 5 लाख नौकरियां और 6 जिलों को मिलेगी नई रफ्तार

Sat, 20 Jun 2026 05:06 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Sat, 20 Jun 2026 05:06 PM IST
सार

उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (यूआईएमआर) के जरिए मालवा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर औद्योगिक, आर्थिक और आधारभूत विकास की तैयारी की जा रही है। इस परियोजना से 6 जिलों के हजारों गांवों को नई पहचान मिलेगी और करीब 5 लाख रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
 

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MP: Malwa's landscape set to transform; development to span 16,000 sq km, creating 5 lakh jobs and giving new
डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश सरकार मालवा क्षेत्र को देश के सबसे बड़े विकास केंद्रों में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के विजन के तहत विकसित किया जा रहा उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (यूआईएमआर) प्रदेश के विकास का नया प्रवेश द्वार बनने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य इंदौर जैसे बड़े शहरों के विकास को आसपास के जिलों, तहसीलों और गांवों तक पहुंचाना है, ताकि विकास का लाभ केवल शहरों तक सीमित न रहकर पूरे क्षेत्र को मिल सके। यूआईएमआर का दायरा लगातार बढ़ाया गया है और अब यह 16 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला होगा। इसके अंतर्गत इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, रतलाम और शाजापुर जिलों की 38 तहसीलें तथा 2781 गांव शामिल किए गए हैं। इस क्षेत्र में करीब सवा करोड़ लोग निवास करते हैं। सरकार का मानना है कि यह मॉडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को साकार करने में मध्यप्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करेगा।
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13,500 हेक्टेयर का औद्योगिक लैंड बैंक विकसित हो रहा
प्रदेश सरकार ने इस क्षेत्र को औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों का नया केंद्र बनाने की योजना तैयार की है। यूआईएमआर के अंतर्गत 13,500 हेक्टेयर से अधिक का औद्योगिक लैंड बैंक विकसित किया जा रहा है। साथ ही 14 नए औद्योगिक पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव है। इन परियोजनाओं से आने वाले वर्षों में लगभग 5 लाख नए रोजगार सृजित होने की संभावना है।  
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विक्रम उद्योगपुरी को एक 'एंकर सिटी' बनेगी 
औद्योगिक विकास के तहत पीथमपुर को इलेक्ट्रिक व्हीकल और एडवांस इंजीनियरिंग उद्योगों का प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा। वहीं उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी को एंकर सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। रतलाम को लॉजिस्टिक्स और निर्यात गतिविधियों का बड़ा केंद्र बनाने की योजना है, जिससे प्रदेश के उद्योगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक आसान पहुंच मिल सकेगी। 

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पूरे क्षेत्र में 60 मिनट कनेक्टिविटी बनाना लक्ष्य 
यूआईएमआर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी आधुनिक कनेक्टिविटी योजना है। सरकार का लक्ष्य पूरे क्षेत्र में ‘60 मिनट कनेक्टिविटी’ स्थापित करना है, जिससे लोग एक घंटे के भीतर प्रमुख आर्थिक और औद्योगिक केंद्रों तक पहुंच सकें। इसके लिए इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, इंदौर-भोपाल एक्सप्रेसवे और मेट्रो विस्तार जैसी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। यह क्षेत्र सीधे दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डीएमआईसी) से भी जुड़ेगा, जिससे उद्योगों को परिवहन और निर्यात में बड़ा लाभ मिलेगा। 


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लैंड पूलिंग मॉडल लागू किया जाएगा 
परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू किसानों की भागीदारी भी है। इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर में देश के पहले बड़े लैंड पूलिंग मॉडल को लागू किया जा रहा है। इसके तहत किसानों की भूमि विकास कार्यों के लिए ली जाएगी और उन्हें उनकी 60 प्रतिशत विकसित भूमि वापस लौटाई जाएगी। इससे किसान केवल जमीन देने वाले नहीं बल्कि विकास प्रक्रिया के प्रत्यक्ष भागीदार बनेंगे और उनकी संपत्ति का मूल्य भी कई गुना बढ़ सकेगा। 

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‘ब्लू-ग्रीन डेवलपमेंट पॉलिसी’ लागू की जाएगी
सरकार ने विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी है। यूआईएमआर में ‘ब्लू-ग्रीन डेवलपमेंट पॉलिसी’ लागू की जाएगी। इसके तहत नर्मदा नदी और अन्य जल स्रोतों के आसपास निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित किया जाएगा। वन क्षेत्रों की सुरक्षा और हरियाली बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्रों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली लागू होगी ताकि प्रदूषण को रोका जा सके। भविष्य के औद्योगिक क्लस्टरों को कार्बन न्यूट्रल बनाने का भी लक्ष्य रखा गया है। 

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जीडीपी में पर्यटन का योगदान 10% 
पर्यटन के क्षेत्र में भी यूआईएमआर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक राज्य की जीडीपी में पर्यटन का योगदान 10 प्रतिशत तक पहुंचाना है। उज्जैन, ओंकारेश्वर, मांडू और महेश्वर को जोड़कर एक विशेष पर्यटन सर्किट विकसित किया जाएगा। इसमें धार्मिक पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन, नर्मदा रिवर फ्रंट विकास और हेरिटेज होटलों का विस्तार शामिल होगा। 

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मेट्रोपॉलिटिन अथॉरिटी करेंगी योजनाएं तैयार 
इसके साथ ही प्रदेश सरकार ‘मध्यप्रदेश महानगरीय क्षेत्र नियोजन एवं विकास अधिनियम-2025’ के माध्यम से शहरी विकास को वैज्ञानिक और डेटा आधारित बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। प्रस्तावित मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी अगले कई दशकों की आबादी, यातायात और बुनियादी सुविधाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार करेगी, जिससे भविष्य में अव्यवस्थित शहरीकरण की समस्या से बचा जा सके।
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