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MP News: एमपी में पांच जिलों में शराब दुकानों की नीलामी अटकी, भोपाल की 29 दुकानों के लिए भी नहीं लगी बोली

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Tue, 03 Mar 2026 06:59 PM IST
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सार

मध्यप्रदेश में नई आबकारी नीति के तहत शराब दुकानों की नीलामी के पहले चरण में पांच जिलों के कुछ समूहों में एक भी बोली नहीं लगी। भोपाल की 29 दुकानों के लिए भी टेंडर नहीं आने से अब दोबारा प्रक्रिया कराई जाएगी।

MP News: Auction of liquor shops in five districts of MP stalled, no bids were placed for 29 shops in Bhopal.
जहरीली शराब के कारण दर्जनों लोगों की मौत चिंताजनक (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ani
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विस्तार

प्रदेश में नई आबकारी नीति के तहत शराब दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया का पहला चरण पूरा हो गया है। इस चरण में सरकार को आरक्षित मूल्य से करीब 173 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त राजस्व प्राप्ति हुई है। हालांकि पांच जिलों में कुछ समूहों के लिए एक भी निविदा प्राप्त नहीं हुई, जिसके चलते वहां पुनः टेंडर प्रक्रिया कराई जाएगी। भोपाल, अलीराजपुर, अनूपपुर, मुरैना और नीमच जिलों के कुछ समूहों में किसी भी ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई। इन जिलों के संबंधित समूहों के लिए अब दोबारा निविदा आमंत्रित की जाएगी। भोपाल में शराब दुकानों के नए ठेकों की प्रक्रिया इस बार आसान नहीं दिख रही है। नई आबकारी नीति के तहत 87 कम्पोजिट शराब दुकानों की ई-नीलामी शुरू तो हो गई, लेकिन पहले चरण में रखी गई 29 दुकानों के लिए एक भी टेंडर जमा नहीं हुआ। अब इन दुकानों के लिए दोबारा प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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4 बड़े ग्रुप की जगह 20 छोटे ग्रुप
पिछले साल तक जिले की सभी दुकानें 4 बड़े समूहों में थीं। इस बार सरकार ने व्यवस्था बदलते हुए 87 दुकानों को 20 छोटे समूहों में बांट दिया है। उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि छोटे और नए कारोबारी भी आसानी से ठेका ले सकें और बड़े ठेकेदारों का दबदबा कम हो। पहले चरण में 7 समूहों की 29 दुकानों को टेंडर में शामिल किया गया था। इनका कुल आरक्षित मूल्य करीब 520 करोड़ रुपए रखा गया था। लेकिन अंतिम समय तक एक भी बोली सामने नहीं आई। वहीं, इस साल सभी 87 दुकानों का कुल आरक्षित मूल्य 1432 करोड़ रुपए तय किया गया है। यह पिछले साल की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत ज्यादा है। पिछले वित्तीय वर्ष में ये ठेके करीब 1193 करोड़ रुपए में गए थे। इस बार कीमत बढ़ने से कुछ समूह काफी महंगे हो गए हैं।

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238 करोड़ मिलेगा अतिरिक्त राजस्व 
विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बड़े समूहों को तोड़ने के कारण कुछ बड़े ठेकेदार सक्रिय नहीं हुए। वहीं बाजार में घाटे की चर्चा भी की जा रही है। हालांकि विभागीय आंकड़ों के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष में फरवरी तक कई समूहों को 50 करोड़ रुपए से अधिक का लाभ हुआ है। ऐसे में घाटे की बातों पर सवाल उठ रहे हैं। नई व्यवस्था से सरकार को करीब 238 करोड़ रुपए अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है। अधिकारियों का कहना है कि दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी और आने वाले चरणों में बेहतर प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।

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19 हजार करोड़ रुपए राजस्व जुटाने का लक्ष्य 
पहले चरण में 324 समूहों के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी। इनमें से 150 समूहों के ठेकों पर बोलियां प्राप्त हुईं। कुल 455 निविदाएं जमा हुईं। सरकार ने इन समूहों के लिए आरक्षित मूल्य निर्धारित किया था, जिसके मुकाबले बेहतर प्रतिस्पर्धा देखने को मिली और राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। सरकार ने आगामी वर्ष में 19 हजार करोड़ रुपए राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।  
 
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