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MP News: देश के 70% सीबीबीओ पर भारतीय किसान संघ ने उठाए सवाल, केंद्र से जांच और कार्रवाई की मांग
Mon, 27 Jul 2026 10:16 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Mon, 27 Jul 2026 10:16 PM IST
सार
भारतीय किसान संघ ने देश में काम कर रहे करीब 70 फीसदी सीबीबीओ के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। संघ ने केंद्र सरकार से ऐसे संगठनों की जांच कर कार्रवाई करने और एफपीओ को आगे भी मजबूत बनाने की व्यवस्था करने की मांग की है।
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भोपाल में किसान संघ की प्रेसवार्ता
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को मजबूत बनाने के लिए काम कर रहे क्लस्टर बेस्ड बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन (सीबीबीओ) के कामकाज पर भारतीय किसान संघ ने सवाल उठाए हैं। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष साईं रेड्डी ने दावा किया कि देश में करीब 1000 सीबीबीओ काम कर रहे हैं, जिनमें लगभग 70 फीसदी अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा पाए। उन्होंने केंद्र सरकार से ऐसे सीबीबीओ के काम की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। भोपाल स्थित भारतीय किसान संघ के कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेड्डी ने कहा कि संगठन ने सीबीबीओ के कामकाज का अध्ययन करने के लिए एक समिति बनाई थी। समिति के अध्ययन में कई सीबीबीओ की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल सामने आए। उनका कहना है कि इन संस्थाओं का उद्देश्य एफपीओ को मजबूत बनाना और किसानों को व्यावसायिक रूप से सक्षम करना था, लेकिन कई जगह अपेक्षित परिणाम नहीं मिले।
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पांच साल बाद एफपीओ को कौन संभालेगा?
रेड्डी ने कहा कि सीबीबीओ की कार्य अवधि पांच साल निर्धारित है और कई संस्थाओं की यह अवधि पूरी हो चुकी है। उन्हें तय राशि भी मिल चुकी है। ऐसे में अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि सीबीबीओ के हटने के बाद एफपीओ को आगे कौन संभालेगा। उन्होंने कहा कि जिन संस्थाओं का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि इसके बाद जिला स्तर पर कलेक्टर, उद्यानिकी अधिकारी और कृषि अधिकारियों के माध्यम से एफपीओ को सहयोग देने की व्यवस्था बनाई जाए।
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'पांच पांडव' मॉडल से मजबूत होंगे एफपीओ
भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने एफपीओ के लिए 'पांच पांडव' मॉडल का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष, सीईओ, डायरेक्टर सहित पांच प्रमुख पदाधिकारियों की मजबूत और ईमानदार टीम एफपीओ को सफल बना सकती है। इसके जरिए किसान संगठन आर्थिक रूप से मजबूत होकर बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं।
ये भी पढ़ें- MP: एमपी को मूंग खरीद का 87% कोटा, अब तक सिर्फ 2% खरीदी; केंद्र बोला- पहले मंजूर मात्रा पूरी करें
बिना शुल्क एफपीओ की मदद करेगा किसान संघ
रेड्डी ने कहा कि सीबीबीओ जिन कामों को पर्याप्त रूप से नहीं कर पाए, उन्हें भारतीय किसान संघ सेवा भाव से बिना शुल्क करने का प्रयास करेगा। इसके लिए अखिल भारतीय स्तर पर 'माही फाउंडेशन' का गठन किया गया है। अलग-अलग राज्यों में फेडरेशन बनाकर एफपीओ को उनसे जोड़ने की योजना है। इससे किसानों को प्रशिक्षण, प्रबंधन, बाजार और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद की जाएगी।
ये भी पढ़ें- दतिया का दंगल: आशुतोष साध रहे जातीय समीकरण तो घनश्याम को जनता से सीधा जुड़ाव पहुंचा रहा लाभ
सभी फसलों की खरीदी की मांग
मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर चल रहे आंदोलन पर रेड्डी ने कहा कि किसानों की समस्या केवल मूंग तक सीमित नहीं है। सरकार को किसानों की सभी फसलों की खरीदी सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने एफपीओ के माध्यम से किसानों को बेहतर बाजार और बिक्री व्यवस्था उपलब्ध कराने की बात भी कही।
ये भी पढ़ें- ओंकारेश्वर हादसे पर CM मोहन यादव सख्त, लापरवाही करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई; दोषी मिले तो बर्खास्तगी
एफपीओ को खाद-बीज बेचने का लाइसेंस देने की मांग
खाद और बीज की किल्लत का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि एफपीओ और पैक्स के माध्यम से गांव स्तर पर वितरण व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। एफपीओ को उर्वरक और बीज बेचने का लाइसेंस देने से किसानों को समय पर खाद-बीज मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में केंद्र सरकार को सुझाव भेजे गए हैं।
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पांच साल बाद एफपीओ को कौन संभालेगा?
रेड्डी ने कहा कि सीबीबीओ की कार्य अवधि पांच साल निर्धारित है और कई संस्थाओं की यह अवधि पूरी हो चुकी है। उन्हें तय राशि भी मिल चुकी है। ऐसे में अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि सीबीबीओ के हटने के बाद एफपीओ को आगे कौन संभालेगा। उन्होंने कहा कि जिन संस्थाओं का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि इसके बाद जिला स्तर पर कलेक्टर, उद्यानिकी अधिकारी और कृषि अधिकारियों के माध्यम से एफपीओ को सहयोग देने की व्यवस्था बनाई जाए।
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'पांच पांडव' मॉडल से मजबूत होंगे एफपीओ
भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने एफपीओ के लिए 'पांच पांडव' मॉडल का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष, सीईओ, डायरेक्टर सहित पांच प्रमुख पदाधिकारियों की मजबूत और ईमानदार टीम एफपीओ को सफल बना सकती है। इसके जरिए किसान संगठन आर्थिक रूप से मजबूत होकर बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं।
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बिना शुल्क एफपीओ की मदद करेगा किसान संघ
रेड्डी ने कहा कि सीबीबीओ जिन कामों को पर्याप्त रूप से नहीं कर पाए, उन्हें भारतीय किसान संघ सेवा भाव से बिना शुल्क करने का प्रयास करेगा। इसके लिए अखिल भारतीय स्तर पर 'माही फाउंडेशन' का गठन किया गया है। अलग-अलग राज्यों में फेडरेशन बनाकर एफपीओ को उनसे जोड़ने की योजना है। इससे किसानों को प्रशिक्षण, प्रबंधन, बाजार और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद की जाएगी।
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सभी फसलों की खरीदी की मांग
मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर चल रहे आंदोलन पर रेड्डी ने कहा कि किसानों की समस्या केवल मूंग तक सीमित नहीं है। सरकार को किसानों की सभी फसलों की खरीदी सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने एफपीओ के माध्यम से किसानों को बेहतर बाजार और बिक्री व्यवस्था उपलब्ध कराने की बात भी कही।
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एफपीओ को खाद-बीज बेचने का लाइसेंस देने की मांग
खाद और बीज की किल्लत का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि एफपीओ और पैक्स के माध्यम से गांव स्तर पर वितरण व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। एफपीओ को उर्वरक और बीज बेचने का लाइसेंस देने से किसानों को समय पर खाद-बीज मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में केंद्र सरकार को सुझाव भेजे गए हैं।
