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MP News: ग्वालियर बनेगा देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग हब, 15 हजार करोड़ का निवेश होगा
Wed, 29 Jul 2026 10:44 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Wed, 29 Jul 2026 10:44 PM IST
सार
ग्वालियर में देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन विकसित किया जाएगा, जिसमें 12 से 15 हजार करोड़ रुपये तक के निवेश की संभावना है। करीब 350 एकड़ में बनने वाले इस जोन से लगभग 5 हजार प्रत्यक्ष रोजगार मिलने का अनुमान है।
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन विकसित किया जाएगा। करीब 350 एकड़ में बनने वाले इस आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र में आने वाले वर्षों में 12 से 15 हजार करोड़ रुपये तक के निवेश की संभावना है। इससे करीब 5 हजार प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने का अनुमान है। परियोजना के पहले चरण में करीब 3500 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। इस संबंध में नई दिल्ली में मध्य प्रदेश सरकार और केंद्रीय दूरसंचार विभाग के बीच एमओयू होगा। इसके बाद परियोजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल से इसे मध्यप्रदेश में हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की बड़ी परियोजना माना जा रहा है।
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एक परिसर में बनेगा पूरा टेलीकॉम इकोसिस्टम
टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में मोबाइल उपकरण, नेटवर्क उपकरण, ऑप्टिकल फाइबर, सेमीकंडक्टर और 5जी-6जी तकनीक से जुड़े रिसर्च एवं डेवलपमेंट सेंटर विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा परीक्षण और प्रमाणन प्रयोगशाला, स्टोरेज, सड़क और आईसीटी जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। परियोजना के पहले चरण के लिए केंद्र सरकार ने 493 करोड़ रुपये का 100 प्रतिशत केंद्रीय अनुदान मंजूर किया है। वहीं, राज्य सरकार करीब 170 एकड़ जमीन नि:शुल्क उपलब्ध करा रही है। इसमें साडा क्षेत्र की 100 एकड़ और ग्वालियर आईटी पार्क की 70 एकड़ जमीन शामिल है।
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कई बड़ी कंपनियां निवेश के लिए तैयार
परियोजना में डिक्सन टेक्नोलॉजीज, एचएफसीएल, तेजस नेटवर्क्स, वीवीडीएन और सिरमा एसजीएस जैसी कंपनियां एंकर निवेशक के रूप में जुड़ रही हैं। पहले चरण में 150 से 200 एकड़ क्षेत्र में करीब 5 हजार करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता बताई गई है।
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आयात घटेगा, स्थानीय उद्योगों को मिलेगा फायदा
टेलीकॉम जोन में राउटर, एंटीना, ऑप्टिकल फाइबर, चिप और दूसरे उपकरणों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर रहेगा। इससे आयात पर निर्भरता कम करने और निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी। एमएसएमई, स्टार्टअप और स्थानीय सप्लायरों को भी बड़ी कंपनियों के साथ काम करने का अवसर मिलेगा। परियोजना के संचालन के लिए विशेष प्रयोजन कंपनी बनाई जाएगी, जिसमें मध्य प्रदेश सरकार की 51 प्रतिशत और केंद्र के दूरसंचार विभाग की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी।
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एक परिसर में बनेगा पूरा टेलीकॉम इकोसिस्टम
टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में मोबाइल उपकरण, नेटवर्क उपकरण, ऑप्टिकल फाइबर, सेमीकंडक्टर और 5जी-6जी तकनीक से जुड़े रिसर्च एवं डेवलपमेंट सेंटर विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा परीक्षण और प्रमाणन प्रयोगशाला, स्टोरेज, सड़क और आईसीटी जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। परियोजना के पहले चरण के लिए केंद्र सरकार ने 493 करोड़ रुपये का 100 प्रतिशत केंद्रीय अनुदान मंजूर किया है। वहीं, राज्य सरकार करीब 170 एकड़ जमीन नि:शुल्क उपलब्ध करा रही है। इसमें साडा क्षेत्र की 100 एकड़ और ग्वालियर आईटी पार्क की 70 एकड़ जमीन शामिल है।
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कई बड़ी कंपनियां निवेश के लिए तैयार
परियोजना में डिक्सन टेक्नोलॉजीज, एचएफसीएल, तेजस नेटवर्क्स, वीवीडीएन और सिरमा एसजीएस जैसी कंपनियां एंकर निवेशक के रूप में जुड़ रही हैं। पहले चरण में 150 से 200 एकड़ क्षेत्र में करीब 5 हजार करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता बताई गई है।
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आयात घटेगा, स्थानीय उद्योगों को मिलेगा फायदा
टेलीकॉम जोन में राउटर, एंटीना, ऑप्टिकल फाइबर, चिप और दूसरे उपकरणों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर रहेगा। इससे आयात पर निर्भरता कम करने और निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी। एमएसएमई, स्टार्टअप और स्थानीय सप्लायरों को भी बड़ी कंपनियों के साथ काम करने का अवसर मिलेगा। परियोजना के संचालन के लिए विशेष प्रयोजन कंपनी बनाई जाएगी, जिसमें मध्य प्रदेश सरकार की 51 प्रतिशत और केंद्र के दूरसंचार विभाग की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी।
