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MP News: पेशाब की समस्या तो इमाम बनकर नमाज न पढ़ाएं; ईद से पहले विवाद, मुस्लिम संगठनों ने उठाए सवाल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Mon, 16 Mar 2026 07:02 PM IST
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सार

राजधानी भोपाल में ईद की नमाज से पहले जारी एक फतवे को लेकर विवाद गहरा गया है। एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद ताजुल मसाजिद में नमाज पढ़ाने को लेकर उठे सवालों पर मुस्लिम संगठनों ने आपत्ति जताते हुए मामले की जांच की मांग की है।

MP News: If you have urinary problems, don't lead namaz as an imam..., controversy before Eid, Muslim organiza
ताजुल मसाजिद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राजधानी भोपाल में ईद की नमाज से पहले एक फतवे को लेकर विवाद गहरा गया है। एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद ताजुल मसाजिद में नमाज पढ़ाने को लेकर उठे सवालों के बाद मुस्लिम समाज के अलग-अलग संगठनों ने इस मुद्दे पर आपत्ति जताई है। फतवे में यह सवाल उठाया गया है कि अगर किसी व्यक्ति को यूरिन या प्रोस्टेट से जुड़ी ऐसी बीमारी हो, जिसमें पेशाब की बूंदें आने की समस्या रहती हो, तो क्या वह इमाम बनकर लोगों को नमाज पढ़ा सकता है। इसके जवाब में कहा गया कि ऐसी स्थिति में व्यक्ति खुद नमाज पढ़ सकता है, लेकिन वह इमाम बनकर दूसरों को नमाज नहीं पढ़ा सकता।
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मुस्लिम त्योहार कमेटी ने उठाए सवाल
इस फतवे को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमिटी ने आपत्ति जताई है। कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन का कहना है कि ईद से कुछ दिन पहले इस तरह का फतवा सामने आना समाज में भ्रम की स्थिति पैदा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फतवा भोपाल के शहर काजी को निशाना बनाकर जारी किया गया है और इसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। कमेटी ने यह भी कहा कि अगर फतवे को गलत तरीके से वायरल कर विवाद खड़ा किया गया है तो इसकी जांच कराई जानी चाहिए। इसको लेकर उन्होंने पुलिस में शिकायत करने के भी संकेत दिए हैं। 

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फतवा किसने जारी किया
यह फतवा 9 मार्च 2026 को दारुल इफ्ता जाम-ए-एहतमाम मसाजिद कमेटी भोपाल के नाम से जारी किया गया है। कमेटी के पदाधिकारियों ने फतवा जारी करने वाले अब्दुल कलाम पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में जिम्मेदारी के साथ काम किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे समाज में अनावश्यक विवाद की स्थिति बन सकती है। धार्मिक जानकारों का कहना है कि आमतौर पर इस तरह के फतवे धार्मिक नियमों को स्पष्ट करने के लिए जारी किए जाते हैं और जरूरी नहीं कि वे किसी विशेष व्यक्ति से जुड़े हों।

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