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MP News: सीएम मोहन यादव ने दिया स्पष्ट संदेश, प्रदेश में कानून से ऊपर कोई नहीं, जानें किसे दिया झटका
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Thu, 18 Jun 2026 09:22 PM IST
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सार
मध्यप्रदेश सरकार ने सोम डिस्टिलरीज समूह के वर्ष 2026-27 के आबकारी लाइसेंस नवीनीकरण आवेदन खारिज कर दिए हैं। सरकार का कहना है कि नियमों के उल्लंघन और अवैध गतिविधियों के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुख्यमंत्री मोहन यादव की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत मध्यप्रदेश सरकार ने सोम डिस्टिलरीज समूह को बड़ा झटका दिया है। राज्य शासन ने वर्ष 2026-27 के लिए समूह की विभिन्न आबकारी लाइसेंसों के नवीनीकरण संबंधी सभी आवेदनों को निरस्त कर दिया है। सरकार का कहना है कि अवैध गतिविधियों, राजस्व हानि और नियमों के उल्लंघन के मामलों में किसी प्रकार की रियायत नहीं दी जाएगी। आबकारी विभाग के अनुसार किसी भी लाइसेंस का नवीनीकरण स्वतः नहीं किया जाता, बल्कि इसके लिए संबंधित संस्था के रिकॉर्ड, कानूनों के पालन, लाइसेंस की शर्तों के अनुपालन और जनहित से जुड़े पहलुओं का परीक्षण किया जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत सोम डिस्टिलरीज समूह के आवेदनों की समीक्षा की गई।
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पुराने मामलों को ध्यान में रख कर कार्रवाई
जांच के दौरान समूह से जुड़े पुराने मामलों को भी ध्यान में रखा गया। इनमें अवैध शराब परिवहन, कथित रूप से कूटरचित परमिटों के उपयोग, शासकीय राजस्व को नुकसान पहुंचाने और आबकारी कानूनों के उल्लंघन से जुड़े प्रकरण शामिल हैं। इन मामलों से संबंधित उपलब्ध दस्तावेजों, जांच रिपोर्टों और न्यायालयीन अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद लाइसेंस नवीनीकरण नहीं करने का निर्णय लिया गया।
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नवीनीकरण का कोई स्वचालित अधिकार नहीं होता
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 और उससे जुड़े नियमों के तहत नवीनीकरण का कोई स्वचालित अधिकार नहीं होता। प्रत्येक आवेदन का परीक्षण तथ्यों और विधिक प्रावधानों के आधार पर किया जाता है। उच्च न्यायालय ने भी अपने आदेश में कहा था कि लाइसेंस नवीनीकरण के मामलों का निर्णय उपलब्ध तथ्यों, कानून और संबंधित पक्ष के आचरण के आधार पर स्वतंत्र रूप से किया जाना चाहिए। न्यायालय ने नवीनीकरण का कोई स्वतः अधिकार प्रदान नहीं किया था।
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राज्य में कानून का पालन अनिवार्य
राज्य सरकार का कहना है कि वह निवेश और उद्योगों को बढ़ावा देने के पक्ष में है, लेकिन इसके साथ कानून का पालन भी अनिवार्य है। सरकार ऐसे उद्योगों और संस्थानों को प्रोत्साहित करना चाहती है जो नियमों का पालन करते हैं, जबकि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। सरकार ने इस फैसले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की नीति का हिस्सा बताया है। शासन का कहना है कि प्रदेश में कोई भी व्यक्ति या संस्था कानून से ऊपर नहीं है और जनहित के खिलाफ काम करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
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पुराने मामलों को ध्यान में रख कर कार्रवाई
जांच के दौरान समूह से जुड़े पुराने मामलों को भी ध्यान में रखा गया। इनमें अवैध शराब परिवहन, कथित रूप से कूटरचित परमिटों के उपयोग, शासकीय राजस्व को नुकसान पहुंचाने और आबकारी कानूनों के उल्लंघन से जुड़े प्रकरण शामिल हैं। इन मामलों से संबंधित उपलब्ध दस्तावेजों, जांच रिपोर्टों और न्यायालयीन अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद लाइसेंस नवीनीकरण नहीं करने का निर्णय लिया गया।
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नवीनीकरण का कोई स्वचालित अधिकार नहीं होता
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 और उससे जुड़े नियमों के तहत नवीनीकरण का कोई स्वचालित अधिकार नहीं होता। प्रत्येक आवेदन का परीक्षण तथ्यों और विधिक प्रावधानों के आधार पर किया जाता है। उच्च न्यायालय ने भी अपने आदेश में कहा था कि लाइसेंस नवीनीकरण के मामलों का निर्णय उपलब्ध तथ्यों, कानून और संबंधित पक्ष के आचरण के आधार पर स्वतंत्र रूप से किया जाना चाहिए। न्यायालय ने नवीनीकरण का कोई स्वतः अधिकार प्रदान नहीं किया था।
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राज्य में कानून का पालन अनिवार्य
राज्य सरकार का कहना है कि वह निवेश और उद्योगों को बढ़ावा देने के पक्ष में है, लेकिन इसके साथ कानून का पालन भी अनिवार्य है। सरकार ऐसे उद्योगों और संस्थानों को प्रोत्साहित करना चाहती है जो नियमों का पालन करते हैं, जबकि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। सरकार ने इस फैसले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की नीति का हिस्सा बताया है। शासन का कहना है कि प्रदेश में कोई भी व्यक्ति या संस्था कानून से ऊपर नहीं है और जनहित के खिलाफ काम करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
