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MP News: भोपाल में बिल्डर ने पार्क की जमीन को प्लॉट बताकर बेचा, EOW ने खोला फर्जीवाड़ा, FIR दर्ज

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Thu, 22 Jan 2026 04:20 PM IST
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सार

भोपाल में सहकारी संस्था की पार्क और ओपन स्पेस की जमीन को फर्जी नक्शों से प्लॉट बताकर बेचने का बड़ा घोटाला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने मामले को सुनियोजित साजिश मानते हुए मुख्य आरोपियों पर एफआईआर दर्ज की है।

MP News: Park land sold by misrepresenting it as residential plots; EOW uncovers major land scam, FIR register
ईओडब्ल्यू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भोपाल में सहकारी संस्था की पार्क और ओपन स्पेस की जमीन को फर्जी नक्शों के जरिए प्लॉट बताकर बेचने का बड़ा मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने जांच के बाद इसे सुनियोजित भूमि घोटाला मानते हुए मुख्य आरोपियों पर एफआईआर दर्ज की है। भोपाल के नरेला शंकरी क्षेत्र में स्थित एक सहकारी संस्था की जमीन से जुड़े बड़े भूमि घोटाले का खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने विस्तृत जांच के बाद पाया कि सहकारी संस्था की सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित जमीन को फर्जी ले-आउट नक्शों के जरिए निजी प्लॉट के रूप में दिखाकर आम लोगों को बेच दिया गया। इस मामले में EOW ने जीशान अली, उसके सहयोगी एम.एस. बख्श, स्वर्गीय मवासी राम सिंह सहित अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और षड्यंत्र के तहत एफआईआर दर्ज की है।
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यह मामला तब सामने आया जब 10 दिसंबर 2025 को भोपाल निवासी दीपक शुक्ला ने EOW में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि रॉयल हेरिटेज बिल्डर कॉलोनाइज़र से जुड़े जीशान अली ने सहकारी संस्थाओं की जमीन में गंभीर अनियमितताएं की हैं और नरेला शंकर गृह निर्माण सहकारी समिति की भूमि पर स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण और बिक्री की गई है।
EOW की जांच में सामने आया कि नगर तथा ग्राम निवेश (T&CP) द्वारा स्वीकृत मूल ले-आउट में संबंधित भूमि का एक बड़ा हिस्सा पार्क, ओपन स्पेस, मंदिर और बिजली ट्रांसफार्मर के लिए आरक्षित था। लेकिन आरोपियों ने जानबूझकर कूटरचित और अस्वीकृत नक्शे तैयार कर इस सार्वजनिक भूमि को प्लॉट के रूप में दर्शाया। फर्जी नक्शे में पार्क की जमीन पर हाथ से प्लॉट नंबर 254 से 267 तक बना दिए गए।

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जांच के दौरान यह भी सामने आया कि प्लॉट क्रमांक 262, जिसे 17 सितंबर 2002 को अविनाश मिश्रा को बेचा गया, वास्तविकता में जमीन पर मौजूद ही नहीं था। मौके पर जांच में वहां पार्क, मंदिर और विद्युत ट्रांसफार्मर पाए गए। अविनाश मिश्रा ने बताया कि उन्होंने 1.05 लाख देकर प्लॉट खरीदा था, लेकिन बाद में पता चला कि प्लॉट फर्जी है। न तो उन्हें दूसरा प्लॉट मिला और न ही पैसा वापस किया गया।  जांच में यह भी पाया गया कि: जीशान अली ने कर्मचारियों और रिश्तेदारों के नामों का उपयोग करके समिति के पदों पर डमी लोग बैठाए एवं कई वर्षों तक जानबूझकर समिति का ऑडिट नहीं कराया। जमीन बेचने के बाद बची हुई जमीन अपने और अपने परिवार के नाम वापस दर्ज करवा ली गई। जांच में यह भी सामने आया कि 4 फरवरी 2010 एक ही नामांतरण प्रकरण में 1.07 एकड़ भूमि जीशान अली के नाम 6.440 एकड़ भूमि निकहत शर्मा के नाम दर्ज की गई। राजस्व रिकॉर्ड  में  निकहत शमीम और निकहत शर्मा नामों में हेरफेर के प्रमाण भी पाये गए हैं, वर्ष 2021 में इसी जमीन के हिस्सों को करोड़ों रुपये में बेचने के अनुबंध किए गए। जीशान अली ने 1.07 एकड़ भूमि अपने नाम कराने के बाद 20 मार्च  2021 को दो भूखंडों (46600 और 7308 वर्गफीट) की बिक्री के लिए अनुबंध किया जिसकी कुल कीमत 5.25 करोड़ तय हुई। इसमें से 10 लाख अग्रिम जीशान अली ने स्वयं चेक से प्राप्त किए। बावड़ियाकलां की 13 एकड़ भूमि जीशान अली ने अपनी कंपनी रॉयल हेरिटेज बिल्डर्स के माध्यम से  प्लॉट, डुप्लेक्स और शॉपिंग मॉल बनाए जिसमें बैंक का कर्ज न चुकाने पर शॉपिंग मॉल PNB द्वारा कब्जे में ले लिया गया। इससे सहकारी संस्था के वास्तविक एवं अप्रत्यक्ष दोनों तरह का संचालन जीशान अली द्वारा किया जाना पाया गया है।

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जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि इस फर्जी बिक्री से प्राप्त राशि सीधे जीशान अली तक पहुंची। पैसे का लेन-देन उसके सहयोगी एम.एस. बख्श के माध्यम से किया गया। EOW ने पाया कि इन सभी फर्जी प्लॉटों की बिक्री का असली लाभार्थी जीशान अली ही था। इसके अलावा जांच में यह भी खुलासा हुआ कि सहकारी समिति का वास्तविक संचालन वर्षों तक डमी पदाधिकारियों के जरिए किया गया। जानबूझकर ऑडिट नहीं कराया गया और जमीन बेचने के बाद बची हुई जमीन को आरोपियों ने अपने और अपने परिवार के नाम दर्ज करवा लिया। राजस्व रिकॉर्ड में नामों में हेरफेर और नामांतरण में अनियमितताओं के भी प्रमाण मिले हैं। EOW ने पूरे मामले को सुनियोजित साजिश मानते हुए भारतीय दंड विधान की धारा 120-बी, 420, 467, 468 और 471 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। फिलहाल मामले की विवेचना जारी है और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
 
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