{"_id":"69b198686cc8e880990a2e04","slug":"mp-news-sc-orders-cbi-to-investigate-anjana-murder-case-former-minister-accused-of-protecting-the-accused-2026-03-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"MP News: अंजना हत्याकांड की जांच सीबीआई करेगी, SC का आदेश; पूर्व मंत्री पर है आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP News: अंजना हत्याकांड की जांच सीबीआई करेगी, SC का आदेश; पूर्व मंत्री पर है आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Wed, 11 Mar 2026 09:59 PM IST
विज्ञापन
सार
सागर के बहुचर्चित अंजना हत्याकांड की जांच अब सीबीआई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले को केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर)
- फोटो : ANI
विज्ञापन
विस्तार
प्रदेश के सागर जिले के बरोदिया नौनागिर क्षेत्र में हुए बहुचर्चित अंजना हत्याकांड की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) करेगी। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रदेश पुलिस की जांच पर सवाल उठाए और पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। यह फैसला न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन.के. सिंह की पीठ ने सुनाया।
पीड़ित पक्ष पहले से ही आरोप लगाता रहा है कि इस प्रकरण में कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण आरोपियों को मिला हुआ था। इसी कारण पुलिस की कार्रवाई निष्पक्ष नहीं रही। ऐसे में सीबीआई जांच के आदेश के बाद पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह की मुश्किलें बढ़ने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट में पीड़ित पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने मामले को जोरदार ढंग से रखा। अदालत के आदेश के बाद अब सीबीआई की टीम पूरे मामले की जांच करेगी। इसके तहत अब तक की पुलिस जांच, केस डायरी, सबूत और दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर नए सिरे से जांच की जाएगी। जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल करेगी कि कहीं आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण तो नहीं मिला और क्या गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की गई। माना जा रहा है कि सीबीआई की जांच के बाद इस बहुचर्चित मामले में कई नए पहलुओं का खुलासा हो सकता है।
ये भी पढ़ें- LPG Crisis: भोपाल में छोटी दुकानों पर ताले, ट्रेनों में बंद हुआ खाना, घरेलू सिलेंडर के लिए लगी लंबी लाइनें
शुरुआत छेड़छाड़ के मामले से, फिर बढ़ता गया विवाद
पीड़ित परिवार का कहना है कि वर्ष 2019 में अंजना के साथ छेड़छाड़ की घटना के बाद जब शिकायत दर्ज कराई गई, तब आरोपियों पर कठोर धाराएं लगाने के बजाय मामला हल्का कर दिया गया। परिवार का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण पुलिस ने शुरू से ही मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
ये भी पढ़ें- MP News: जीतू पटवारी बोले-जल संसाधन विभाग में कुछ कंपनियों को बार-बार मिल रहा टेंडर, CBI में करेंगे शिकायत
गवाहों और परिजनों की मौत से बढ़ा मामला
केस वापस लेने का दबाव बनाए जाने के बीच अंजना के भाई नितिन की कथित रूप से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इसके बाद मामले के एक अन्य गवाह और रिश्तेदार चाचा राजेंद्र की भी हत्या हो गई। इन घटनाओं ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया था। सबसे ज्यादा विवाद उस समय हुआ जब मुख्य गवाह अंजना की मौत हो गई। राजेंद्र के शव को लाते समय अंजना की एंबुलेंस से गिरकर मौत हो गई थी। उस समय पुलिस ने इसे वाहन से गिरने की घटना बताया था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई गंभीर चोटें और सिर में बड़ा फ्रैक्चर सामने आया था। इसके बाद परिवार ने हत्या की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
ये भी पढ़ें- Bhopal: सड़क मरम्मत में लापरवाही, दुकानों में भरा पानी, लाखों के नुकसान का आरोप, व्यापारियों ने किया चक्का जाम
राजनीतिक स्तर पर भी उठा था मामला
एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत के बाद यह मामला प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया था। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह समेत कई नेताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर न्याय दिलाने का भरोसा दिया था। इस मामले में मुख्यमंत्री ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर सांत्वना दी थी। हालांकि, परिवार का आरोप रहा कि स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों के कारण निष्पक्ष जांच नहीं हो पाई।
Trending Videos
पीड़ित पक्ष पहले से ही आरोप लगाता रहा है कि इस प्रकरण में कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण आरोपियों को मिला हुआ था। इसी कारण पुलिस की कार्रवाई निष्पक्ष नहीं रही। ऐसे में सीबीआई जांच के आदेश के बाद पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह की मुश्किलें बढ़ने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट में पीड़ित पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने मामले को जोरदार ढंग से रखा। अदालत के आदेश के बाद अब सीबीआई की टीम पूरे मामले की जांच करेगी। इसके तहत अब तक की पुलिस जांच, केस डायरी, सबूत और दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर नए सिरे से जांच की जाएगी। जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल करेगी कि कहीं आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण तो नहीं मिला और क्या गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की गई। माना जा रहा है कि सीबीआई की जांच के बाद इस बहुचर्चित मामले में कई नए पहलुओं का खुलासा हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- LPG Crisis: भोपाल में छोटी दुकानों पर ताले, ट्रेनों में बंद हुआ खाना, घरेलू सिलेंडर के लिए लगी लंबी लाइनें
शुरुआत छेड़छाड़ के मामले से, फिर बढ़ता गया विवाद
पीड़ित परिवार का कहना है कि वर्ष 2019 में अंजना के साथ छेड़छाड़ की घटना के बाद जब शिकायत दर्ज कराई गई, तब आरोपियों पर कठोर धाराएं लगाने के बजाय मामला हल्का कर दिया गया। परिवार का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण पुलिस ने शुरू से ही मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
ये भी पढ़ें- MP News: जीतू पटवारी बोले-जल संसाधन विभाग में कुछ कंपनियों को बार-बार मिल रहा टेंडर, CBI में करेंगे शिकायत
गवाहों और परिजनों की मौत से बढ़ा मामला
केस वापस लेने का दबाव बनाए जाने के बीच अंजना के भाई नितिन की कथित रूप से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इसके बाद मामले के एक अन्य गवाह और रिश्तेदार चाचा राजेंद्र की भी हत्या हो गई। इन घटनाओं ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया था। सबसे ज्यादा विवाद उस समय हुआ जब मुख्य गवाह अंजना की मौत हो गई। राजेंद्र के शव को लाते समय अंजना की एंबुलेंस से गिरकर मौत हो गई थी। उस समय पुलिस ने इसे वाहन से गिरने की घटना बताया था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई गंभीर चोटें और सिर में बड़ा फ्रैक्चर सामने आया था। इसके बाद परिवार ने हत्या की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
ये भी पढ़ें- Bhopal: सड़क मरम्मत में लापरवाही, दुकानों में भरा पानी, लाखों के नुकसान का आरोप, व्यापारियों ने किया चक्का जाम
राजनीतिक स्तर पर भी उठा था मामला
एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत के बाद यह मामला प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया था। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह समेत कई नेताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर न्याय दिलाने का भरोसा दिया था। इस मामले में मुख्यमंत्री ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर सांत्वना दी थी। हालांकि, परिवार का आरोप रहा कि स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों के कारण निष्पक्ष जांच नहीं हो पाई।

कमेंट
कमेंट X