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MP News: नौ बाघ शिकार मामलों में एसटीएफ ने वन विभाग से मांगी विस्तृत रिपोर्ट, 14 माह में 66 मौतें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Wed, 04 Mar 2026 07:43 AM IST
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सार
मध्य प्रदेश में बाघों के शिकार और अवयव तस्करी के 9 मामलों की जांच तेज हो गई है। पुलिस की एसटीएफ ने वन विभाग से अब तक की कार्रवाई और गिरफ्तारियों का पूरा ब्योरा मांगा है।
बाघ
- फोटो : संवाद
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विस्तार
मध्य प्रदेश में 9 बाघों के शिकार और अव्यव तस्करी से जुड़े मामलों की जांच और मॉनीटरिंग तेज हो गई है। राज्य पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने इन सभी प्रकरणों में अब तक की कार्रवाई, गिरफ्तारियों और वर्तमान स्थिति को लेकर वन विभाग से विस्तृत जानकारी मांगी है। बता दें कि मध्य प्रदेश पुलिस की एसटीएफ के एडीजी ‘टाइगर सेल’ के अध्यक्ष भी होते हैं। ऐसे में इन मामलों की मॉनिटरिंग और जांच में तेजी लाने की दिशा में इस कदम को अहम माना जा रहा है। बता दें अब तक पिछले 14 माह में बाघों की 66 मौत हो चुकी हैं।
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9 मामलों में पांच शिकार, 3 अव्यव तस्करी से जुड़े
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुल 9 मामलों में से पांच बाघों की मौत शिकार या फंदे में फंसने से हुई, जबकि तीन मामले बाघों के अव्यवों की तस्करी से संबंधित हैं। एक अन्य मामले की जांच अलग पहलुओं से की जा रही है। वर्ष 2023 में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के एक परिक्षेत्र में नर बाघ का शिकार और सिवनी वन मंडल के कुरई क्षेत्र में बाघ के शिकार की घटना की जानकारी मांगी गई। वहीं, वर्ष 2024 में बालाघाट के लामटा परियोजना मंडल के पारासिवनी बीट में नर बाघ का शिकार। नर्मदापुरम के बानापुरा परिक्षेत्र में नर बाघ के शिकार का मामला। साथ ही वर्ष 2025 में बैतूल जिले के सुखतवा परिक्षेत्र की बांसनिया बीट (बग्राम गडचापंडा क्षेत्र) में नर बाघ का शिकार। इसी वर्ष सामने आए अधिकतर मामले बालाघाट वन वृत्त से जुड़े हैं, जहां बाघों के अव्यवों की तस्करी के तीन प्रकरण दर्ज किए गए।
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निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने कहा कि वन्य प्राणी के शिकार के प्रकरण में कहीं ना कहीं विवेचना और जांच में सख्त कार्रवाई की कमी रहती थी। ऐसे मामले की हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। इसलिए मध्य प्रदेश की एसटीएफ को दखल दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे मामलों पर सख्ती से अंकुश नहीं लगाया गया तो बाघ संरक्षण के प्रयासों को गंभीर झटका लग सकता है। उन्होंने सख्त निगरानी, तकनीकी संसाधनों के उपयोग और पुलिस-वन विभाग के बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया है। साथ ही इसमें अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की बात कही है।
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2025 में 55 और दो माह में 11 मौत
मध्य प्रदेश बाघों की मौत और अप्राकृतिक मौत के मामले में देश में नंबर वन बना हुआ है। यहां पर वर्ष 2025 में 55 बाघों की मौत रिपोर्ट हुई थी। वहीं, वर्ष 2026 के शुरुआत दो माह में 11 बाघ की अब तक मौत हो चुकी है। इनमें शिकार के मामले में भी है। लगातार सामने आ रहे शिकार और तस्करी के मामलों ने वन विभाग की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसटीएफ ने वन विभाग से पूछा है कि इन मामलों में अब तक क्या कार्रवाई हुई, कितनी गिरफ्तारियां हुईं और वर्तमान स्थिति क्या है।
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9 मामलों में पांच शिकार, 3 अव्यव तस्करी से जुड़े
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुल 9 मामलों में से पांच बाघों की मौत शिकार या फंदे में फंसने से हुई, जबकि तीन मामले बाघों के अव्यवों की तस्करी से संबंधित हैं। एक अन्य मामले की जांच अलग पहलुओं से की जा रही है। वर्ष 2023 में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के एक परिक्षेत्र में नर बाघ का शिकार और सिवनी वन मंडल के कुरई क्षेत्र में बाघ के शिकार की घटना की जानकारी मांगी गई। वहीं, वर्ष 2024 में बालाघाट के लामटा परियोजना मंडल के पारासिवनी बीट में नर बाघ का शिकार। नर्मदापुरम के बानापुरा परिक्षेत्र में नर बाघ के शिकार का मामला। साथ ही वर्ष 2025 में बैतूल जिले के सुखतवा परिक्षेत्र की बांसनिया बीट (बग्राम गडचापंडा क्षेत्र) में नर बाघ का शिकार। इसी वर्ष सामने आए अधिकतर मामले बालाघाट वन वृत्त से जुड़े हैं, जहां बाघों के अव्यवों की तस्करी के तीन प्रकरण दर्ज किए गए।
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निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने कहा कि वन्य प्राणी के शिकार के प्रकरण में कहीं ना कहीं विवेचना और जांच में सख्त कार्रवाई की कमी रहती थी। ऐसे मामले की हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। इसलिए मध्य प्रदेश की एसटीएफ को दखल दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे मामलों पर सख्ती से अंकुश नहीं लगाया गया तो बाघ संरक्षण के प्रयासों को गंभीर झटका लग सकता है। उन्होंने सख्त निगरानी, तकनीकी संसाधनों के उपयोग और पुलिस-वन विभाग के बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया है। साथ ही इसमें अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की बात कही है।
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2025 में 55 और दो माह में 11 मौत
मध्य प्रदेश बाघों की मौत और अप्राकृतिक मौत के मामले में देश में नंबर वन बना हुआ है। यहां पर वर्ष 2025 में 55 बाघों की मौत रिपोर्ट हुई थी। वहीं, वर्ष 2026 के शुरुआत दो माह में 11 बाघ की अब तक मौत हो चुकी है। इनमें शिकार के मामले में भी है। लगातार सामने आ रहे शिकार और तस्करी के मामलों ने वन विभाग की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसटीएफ ने वन विभाग से पूछा है कि इन मामलों में अब तक क्या कार्रवाई हुई, कितनी गिरफ्तारियां हुईं और वर्तमान स्थिति क्या है।

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