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आदिवासी जमीन का सौदा: पटवारी का दावा-8 साल में करीब 3 लाख एकड़ भूमि की हुई बिक्री,राष्ट्रपति से जांच की मांग

Fri, 19 Jun 2026 07:17 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Fri, 19 Jun 2026 07:17 PM IST
सार

पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने आदिवासी जमीनों की बिक्री के मामलों की जांच की मांग करते हुए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 8 वर्षों में करीब 3 लाख एकड़ आदिवासी भूमि का हस्तांतरण हुआ है। साथ ही उन्होंने वनवासी शब्द, वायरल वीडियो और मुख्यमंत्री की टिप्पणियों को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा।

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Sale of Tribal Land: Patwari claims nearly 3 lakh acres sold in 8 years; demands probe by the President.
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी की प्रेसवार्ता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश में आदिवासी समुदाय की जमीनों की खरीद-बिक्री को लेकर बड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हस्तक्षेप की मांग करते हुए आदिवासी भूमि हस्तांतरण के मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराने की अपील की है। पटवारी का आरोप है कि पिछले सात से आठ वर्षों में प्रदेश में करीब तीन लाख एकड़ आदिवासी भूमि का हस्तांतरण हुआ है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। भोपाल में मीडिया से बातचीत के दौरान पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार निवास करते हैं और कानून के तहत उनकी जमीन सामान्य वर्ग के लोग सीधे नहीं खरीद सकते। इसके लिए सक्षम स्तर से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा में पूछे गए प्रश्नों के जवाब से यह जानकारी सामने आई है कि बीते वर्षों में करीब 1.26 लाख हेक्टेयर भूमि का हस्तांतरण हुआ है, जो लगभग तीन लाख एकड़ के बराबर है।
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भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया की समीक्षा की मांग
पटवारी ने आरोप लगाया कि आदिवासी भूमि के सौदों में प्रभावशाली लोगों और निजी कंपनियों की भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों से जुड़े नाम भी सामने आए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मांग की कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए और जिन परिस्थितियों में अनुमति दी गई, उसकी भी समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को पूरे मामले की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए और राज्यपाल के माध्यम से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। पटवारी ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में कांग्रेस की सरकार बनती है तो आदिवासी जमीनों के हस्तांतरण के मामलों की दोबारा समीक्षा की जाएगी। यदि किसी की जमीन गलत तरीके से हस्तांतरित हुई है तो उसे न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
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आदिवासी और वनवासी शब्द पर भी उठाया मुद्दा
जीतू पटवारी ने आदिवासी समुदाय के लिए वनवासी शब्द के इस्तेमाल को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जंगलों में रहने वाले लोगों के लिए वनवासी शब्द का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन पूरे आदिवासी समाज को इसी नाम से संबोधित करना उचित नहीं है। उन्होंने इस मुद्दे पर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी निशाना साधा।
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दिग्विजय सिंह से जुड़े वायरल वीडियो पर दी सफाई
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो को लेकर पूछे गए सवाल पर पटवारी ने कहा कि उनका और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का संबंध बेहद आत्मीय है। उन्होंने कहा कि राजनीति में उन्हें दिग्विजय सिंह से लगातार मार्गदर्शन मिला है और दोनों के बीच किसी तरह का मतभेद नहीं है। पटवारी ने वायरल वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया बताते हुए कहा कि इससे गलत संदेश देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए इस तरह के वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं।

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मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर भी किया पलटवार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा विपक्ष को लेकर की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए पटवारी ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना है। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष को सवालों का जवाब देना चाहिए, न कि व्यक्तिगत टिप्पणियां करनी चाहिए। मुख्यमंत्री द्वारा इस्तेमाल किए गए पप्पू का चप्पू जैसे शब्दों पर कटाक्ष करते हुए पटवारी ने कहा कि चप्पू ही नाव को किनारे तक पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र संवाद और जवाबदेही से चलता है, जबकि अहंकार लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करता है।
 
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